'यहां की मिट्टी कामुकता की ओर धकेलती है'

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2017 में साइप्रस के शहर पाफोस को यूरोप की सांस्कृतिक राजधानी का दर्जा मिलेगा. समंदर किनारे बसे इस छोटे से सैलानियों वाले शहर को देखकर बिल्कुल भी ऐसा नहीं लगता कि इसे ये दर्जा मिलना चाहिए. आख़िर यहां कंक्रीट के जंगलों, कुछ समुद्री किनारों और खंडहरों के सिवा और है ही क्या!

पाफोस शहर, पश्चिमी साइप्रस में स्थित है. ये यहां का मशहूर टूरिस्ट ठिकाना है. जहां भारतीय और चीनी रेस्टोरेंट हैं, पब हैं, छोटी-मोटी दुकानें हैं, पार्लर हैं. कुल मिलाकर यूरोप में जब सत्तर के दशक में टूरिज़्म पर बहुत ज़ोर था, ये शहर उसी दौर की याद दिलाता है. मानो पिछले चालीस-पचास सालों में यहां कोई तरक़्क़ी नहीं हुई.

फिर आख़िर इस शहर को अगले साल यूरोप की सांस्कृतिक राजधानी क्यों बनाया जाएगा? यहां तक कि इस शहर के लोग भी इस चुनाव से हैरान हैं.

तो चलिए इस रहस्य पर से हम पर्दा उठाते हैं.

असल में ये शहर, बहुत सी पौराणिक ग्रीक-रोमन कथाओं का केंद्र रहा है. इसका पता बाक़ी दुनिया को 1966 में चला. जब अपने खेत की जुताई कर रहे एक किसान को अचानक, ज़मीन में दबे पुराने शहर के खंडहर दिखाई दिए.

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इसके बाद हुई खुदाई में ज़मीन के अंदर पूरा का पूरा ऐतिहासिक शहर मिला. इसमें विला थे, महल थे, थिएटर थे, क़िले थे और मक़बरे थे. भूमध्य सागर के इलाक़े में ये सबसे बड़ा रोमन शहर था.

ये खंडहर भी पौराणिक शहर निया पाफोस का एक हिस्सा भर हैं. ईसा के बाद की चौथी सदी में आए भयंकर भूकंप ने पूरे शहर को नक़्शे से मिटा दिया था. इन बचे-खुचे खंडहरों, इनके चितकबरे फ़र्श के निशान को यूनेस्को ने विश्व की सांस्कृतिक धरोहर का दर्जा दिया है. यहां पर जगह-जगह पुराने यूनानी किरदारों जैसे थिस्बे और पाइरामोस, इको, नार्सिसस, गैनीमेड, अपोलो और डैफ्ने के क़िस्से बिखरे हुए मिलते हैं.

बरसों चली खुदाई और फिर इसे सहेजने का अभियान पूरा होने के बाद पाफोस के इन खंडहरों को बाक़ी दुनिया के लिए खोल दिया गया है. इसमें यूनान में सेक्स की देवी एफ्रोडाइट का मंदिर भी है. जो ईसा पूर्व बारह सौ में बना था. भूमध्यसागर के आस-पास के इलाक़ों में एफ्रोडाइट का मंदिर, प्रेम के मंदिर के तौर पर मशहूर है.

आज साइप्रस में एफ्रोडाइट में किराए के कमरे से लेकर टैक्सी सर्विस तक चलाई जाती है. प्राचीन काल में इस देवी के मंदिर में आने वाले, एफ्रोडाइट के सामने सिजदा करते थे. इसके बाद वो मंदिर की दासियों के साथ यौन संबंध बनाते थे. कहते हैं कि ये उस दौर का सेक्स टूरिज़्म था. यहां आने वाले हर शख़्स के लिए अनजान महिला से सेक्स करना अनिवार्य था.

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ग्रीक इतिहासकार हेरोडोटस ने इस परंपरा का ज़िक्र किया है. वो लिखते हैं कि हर महिला को शादी से पहले इस मंदिर में जाकर किसी अनजान शख़्स से यौन संबंध बनाना होता था. अमीर हो या ग़रीब, हर घराने की लड़की को ऐसा करना होता था. बहुत सी बदसूरत महिलाओं को तो इसके लिए बरसों इंतज़ार करना पड़ता था.

यहां आने वाले मर्द, मंदिर में प्रेम की देवी एफ्रोडाइट के सामने सिर नवाने के बाद वहां मौजूद महिलाओ में से अपनी पसंद की लड़की चुनते थे. उसे पैसे देते थे और उसके साथ सेक्स करते थे. कोई भी लड़की इससे इनकार नहीं कर सकती थी.

ब्रितानी इतिहासकार जेम्स फ्रेज़र ने भी साइप्रस की इस परंपरा का ज़िक्र अपनी क़िताब, 'द गोल्डेन बो' में किया है.

फ्रेज़र ने लिखा है कि साइप्रस की हर महिला को शादी से पहले ख़ुद को बेचना पड़ता था. फ्रेज़र के मुताबिक़ यही परंपरा, आर्मीनिया, बेबीलोन, तुर्की और बालबेक में भी चलन में थी. हालांकि ईसा से चार सौ साल पहले रोमन राजा कांस्टैंटाइन ने इस पर रोक लगा दी थी.

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इसका ज़िक्र 1336 में जर्मन पादरी लुडोल्फ़ की किताब में भी मिलता है. लुडोल्फ़ ने लिखा था कि मर्दों को साइप्रस जाने से बचना चाहिए. क्योंकि वहां की मिट्टी उन्हें कामुकता की तरफ़ धकेलती है.

ग्रीक-रोमन परंपरा में प्रेम और ख़ूबसूरती की देवी कही जाने वाली एफ्रोडाइट को वीनस के नाम से भी जाना जाता है. कहते हैं कि ये साइप्रस के पहले पुजारी-राजा की रखैल थी. कहते हैं कि ये समुद्र के झाग से पैदा हुई थी.

आज 21वीं सदी में भी साइप्रस में ये क़िस्से ख़ूब मशहूर हैं. स्थानीय निवासियों को अपने इस इतिहास पर बहुत गर्व और यक़ीन है. समंदर के बीच स्थित एक चट्टान को दिखाकर लोग बताते हैं कि वीनस या एफ्रोडाइट, उसी जगह पर समंदर से निकली थी. सैलानियों को घुमाने वाली बसें, यहां कुछ देर के लिए ज़रूर रुकती हैं.

उस दौर के तमाम क़िस्सों के बहुत कम सबूत पाफोस में मिलते हैं. मगर कुछ रोमन सिक्कों पर उकेरी गई तस्वीरों से इन दास्तानों पर मुहर सी लगती है. बहुत से रोमन सिक्के आज ब्रिटिश म्यूज़ियम में मौजूद हैं, जो ऐसे ग्रीको-रोमन क़िस्से सुनाते से मालूम होते हैं.

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साइप्रस के शहर पाफोस की पहाड़ियां हों या जंगल, हर जगह से कोई न कोई क़िस्सा जुड़ा हुआ है. खंडहरों ने इन क़िस्सों पर मुहर लगा दी है. स्थानीय लोगों को भी ये क़िस्से सुनाने में ख़ूब मज़ा आता है. ख़ास तौर से प्रेम और सेक्स की देवी एफ्रोडाइट से जुड़ी कहानियां.

यही वजह है कि पाफोस को 2017 के लिए यूरोप की सांस्कृतिक राजधानी चुना गया है.

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