वो कैसेनोवा जिसे दुनिया नहीं जानती

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कैसेनोवा लफ़्ज़ सुनते ही हमारे ज़ेहन में एक लंपट, पाजी क़िस्म के शोहदे का ख़्याल आता है. सदियों से ये शब्द, रंगीन मिजाज़ इंसानों के बारे में इस्तेमाल किया जाता रहा है. इस नाम को सुनते ही लोग ये मतलब निकालते हैं कि फलां शख़्स के बहुत सारी महिलाओं से जिस्मानी रिश्ते होंगे.

वो सिर्फ़ महिलाओं को रिझाने में अपने शब-ओ-रोज़ तमाम करता होगा. हम उसे कैसेनोवा बुलाते हैं जिसका ज़िंदगी में एक ही मक़सद होता है, ज़्यादा से ज़्यादा महिलाओं को रिझाकर उनसे जिस्मानी रिश्ता बनाना. ऐसे लोगों के बारे में माना जाता है कि ये हर महिला को लड़की कहकर ही पुकारते हैं, वो भी बेहद ख़ास, अश्लील अंदाज़ में.

मगर, आपने कभी सोचा कि ये कैसेनोवा शब्द कहां से आया? आख़िर ये शख़्स था कौन? इसने इतनी बदनामी कैसे कमाई?

चलिए आज आपको मिलवाते हैं असल कैसेनोवा से. जी हां, कैसेनोवा वाक़ई एक इंसान का नाम था, जो अठारहवीं सदी के यूरोप में रहा करता था. उसने एक मस्तमौला अय्याश की ज़िंदगी बिताई. बुढ़ापे का अकेलापन काटने के लिए कैसेनोवा ने जो अपनी आत्मकथा लिखी, उसी से उससे जुड़े तमाम क़िस्सों का जन्म हुआ.

यही वजह है कि आज कैसेनोवा का मतलब अय्याश, रंगीनमिज़ाज शोहदा ही लगाया जाता है. पर, आप ये जानकर हैरान हो जाएंगे कि ख़ुद कैसेनोवा ने इन क़िस्सों को बढ़ावा नहीं दिया. अगर आज कैसेनोवा ज़िंदा हो जाए, तो अपने बारे में इतनी कहानियां सुनकर हैरान हो जाएगा. लेकिन उसने अपने दिल से जो भी लिखा, वो शायद आज आत्मकथा लिखने वालों के सच के दावे को कमज़ोर कर दे.

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कैसेनोवा का पूरा नाम था, गियाकोमा गिरोलामो कैसेनोवा. वो 1725 में इटली के वेनिस शहर में पैदा हुआ था. उसके मां-बाप ग़रीब कलाकार थे. जिस वक़्त वो पैदा हुआ उस वक़्त, वेनिस शहर अपने पानी वाले रास्तों के बजाय अपने दुराचार, वेश्याओं और जुए के अड्डों के लिए बदनाम था. रईस युवा वहां आकर अय्याशी करते थे.

ऐसे माहौल में पैदा हुए कैसेनोवा को महज़ नौ साल की उम्र में उसके मां-बाप ने वेनिस से इटली के पादुआ शहर भेज दिया. वहां वो अपने शिक्षक के साथ रहता था. कैसेनोवा बहुत मेहनती था. उसने पादुआ में रहते हुए 17 साल में क़ानून की डिग्री हासिल की. इसके अलावा उसने केमिस्ट्री, गणित और मेडिकल की भी पढ़ाई की. साथ ही नैतिक दर्शनशास्त्र में भी महारत हासिल की. यहीं पर उसने जुएबाज़ी भी सीखी. और यहीं पर उसने अपने ट्यूटर की बेटी से कामुकता और यौन संबंध का पहला पाठ भी पढ़ा.

पढ़ाई पूरी करके जब वो वेनिस लौटा तो उसने सारी ताक़त सिर्फ़ सेक्स करने और इसके लिए साथी तलाशने में झोंक दी. लगातार अय्याशी और जुए की लत से उस पर काफ़ी क़र्ज़ हो गया और आख़िर में कैसेनोवा को जेल की हवा खानी पड़ी. इसके बाद तो बदनामी जैसे हाथ धोकर उसके पीछे पड़ गई. कैसेनोवा की हरकतें भी ऐसी थीं कि अय्याशी उसका दूसरा नाम हो गया. वो सेना में भर्ती हुआ. मगर जल्द ही वहां से ऊबकर वो पेशेवर जुआरी बन गया. कुछ ही दिन में उसका जुए से भी दिल भर गया तो वो वायोलिन बजाने लगा.

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तमाम करियर आज़माने के बाद उसकी ज़िंदगी में निर्णायक मोड़ उस वक़्त आया, जब कैसेनोवा ने वेनिस के एक रईस की ज़िंदगी बचाई. इसके बदले में उसे काफ़ी मदद मिली. जिसकी वजह से उसने यूरोप के तमाम शहरों, मसलन प्राग, पेरिस, वियना, मैड्रिड और मॉस्को की सैर की. इस दौरान उसकी इश्क़बाज़ी जारी रही.

उसने ईसाइयत के ख़िलाफ़ ख़ुफ़िया मिशन यानी फ्रीमैसनरी में भी शिरकत की. वो ज्योतिषी भी बना. कैसेनोवा की हरकतों की वजह से पुलिस अक्सर उसके पीछे पड़ी रहती थी. यहां तक कि कोर्ट ने भी कैसेनोवा की हरकतों की जांच का फ़रमान जारी कर दिया.

कैसेनोवा को तीस साल की उम्र में एक बार फिर गिरफ़्तार किया गया. उसे बिना मुक़दमा चलाए ही पांच साल क़ैद की सज़ा दी गई. उसे वेनिस के डोज महल में क़ैद करके रखा गया. मगर कैसेनोवा वहां से भाग निकला. क़ैद से छूटकर वो फ्रांस पहुंचा. वहां उसने एक सरकारी लॉटरी को शुरू करने में मदद की. फिर वो जासूस बन गया.

जैसे ही क़र्ज़ और जिस्मानी रिश्ते उस पर बोझ बनने लगते, वो एक शहर छोड़कर दूसरे की तरफ़ रवाना हो जाता. इस तरह उसने अपनी जवानी के दिन फ्रांस, हॉलैंड, इंग्लैंड, बेल्जियम, रूस और स्पेन में बिताए.

पचास साल की उम्र तक आते-आते न उसका दिलकश रंग-रूप बचा था और न ही उसकी जेब में पैसे थे. इसलिए वो वेनिस लौट आया.

कैसेनोवा की ज़िंदगी बेहद दिलचस्प और तेज़ रफ़्तारी की कहानी है. इसमें उसके यौन संबंधों के क़िस्सों को शामिल कर लें तो ये और भी मज़ेदार हो जाती है. ख़ुद कैसेनोवा का दावा है कि उसने 120 महिलाओं के साथ सेक्स किया.

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मगर वो सिर्फ़ अय्याशी में तल्लीन रहा हो ऐसा भी नहीं. कैसेनोवा ने अपनी पढ़ाई-लिखाई का भी सदुपयोग किया. उसने गणित के बारे में कई लेख लिखे. साथ ही कैसेनोवा ने एक साइंस फ़िक्शन भी लिखा. मशहूर ग्रीक महागाथा इलियड का उसने अनुवाद किया. अपने दौर में उसने फ्रांस के मशहूर चिंतक वॉल्टेयर से लेकर बेंजामिन फ्रैंकलिन और कैथरीन महान तक से संवाद किया.

1785 में उसे वेनिस से एक बार फिर तड़ीपार कर दिया गया. वजह ये थी कि कैसेनोवा ने शहर के अमीर-उमरा के बारे में एक मज़ाक़िया लेख लिख दिया था.

कैसेनोवा का बुढ़ापा अकेलेपन में गुज़रा. उसे आज के चेक रिपब्लिक के एक क़स्बे में एक सामंत के यहां लाइब्रेरियन की नौकरी मिली थी. अपने शिकारी कुत्तों के साथ कैसेनोवा ने अपना आख़िरी वक़्त बिताया. एक आलीशान, रईसाना, रंगीनमिज़ाज और अय्याशी की ज़िंदगी के बाद ये उसके लिए दुर्दिन ही थे.

यहीं रहते हुए कैसेनोवा ने बारह खंडो में अपनी आत्मकथा लिखी. ये आत्मकथा उसकी अय्याशी के क़िस्सों के लिए ज़्यादा मशहूर हुई. जबकि ये रोज़नामचा ज़्यादा लगती है कोई आत्मकथा कम. मगर जिस तरह कैसेनोवा ने विस्तार से अपने यौन संबंधों के बारे में लिखा, उससे लोगों की नज़र में उसका किरदार वो बना जिसे हम आज जानते हैं.

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कैसेनोवा ने अपनी आत्मकथा 1789 में लिखनी शुरू की थी. ताकि वो अपने अकेलेपन की तकलीफ़ से उबर सके. उसने अपने एक दोस्त को लिखे ख़त में बताया कि वो रोज़ाना 13-13 घंटे लिखा करता था. कैसेनोवा ने लिखा कि आज वो अपनी ज़िंदगी के लुत्फ़भरे दिनों को याद कर रहा है. मगर उसमें नया क्या है?

उसकी आत्मकथा, एक अधूरे वाक्य के साथ ख़त्म होती है. जिस वक़्त वो अपने 49वें साल का कोई क़िस्सा बयां कर रहा था.

वेटिकन ने उसकी आत्मकथा को प्रतिबंधित क़िताबों की लिस्ट में डाल दिया था. बरसों तक तो ये छपी ही नहीं.

कैसेनोवा की आत्मकथा 1821 में छपी. उन्नीसवीं सदी के आख़िर में कैसेनोवा की आत्मकथा को फ्रांस की राष्ट्रीय लाइब्रेरी में नटखट क़िताबों के ख़ास शेल्फ़ में रखा गया था.

मगर, अमरीका की स्कूल टीचर कैथलीन गोंज़ालेज़ ने कैसेनोवा की नई पहचान दुनिया को दिखाने की कोशिश की है.

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उन्होंने कैसेनोवा पर रिसर्च किया तो पाया कि कैसेनोवा के बहुत से दावे जो बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए हुए माने जाते थे, वो सच्चाई के बेहद क़रीब थे.

उस शख़्स ने अपनी ज़िंदगी के किसी पहलू को नहीं छुपाया था. उसके सेक्स संबंधों को तो लोगों ने चटखारे लेकर पढ़ा. मगर उसने वेनिस और यूरोप के दूसरे शहरों की ज़िंदगी और खान-पान के बारे में जो लिखा, उसे नज़रअंदाज़ कर दिया गया. महिलाओं से रिश्ते बनाने के मोर्चे पर भी उसने अपनी नाकामियों को ईमानदारी से लिखा था. लेकिन, लोगों ने उस पर भी ध्यान नहीं दिया.

कैसेनोवा की आत्मकथा, 'हिस्टोरी डे मा वी' को लोगों ने कामुक कथा के तौर पर पढ़ा. मगर बाद में तमाम इतिहासकारों ने पाया कि उसमें कैसेनोवा के रिश्तों के सिवा भी बहुत कुछ है. उस दौर के समाज और रहन-सहन की झलक भी कैसेनोवा की आत्मकथा में मिलती है.

इन्हीं बातों को उजागर करने के लिए कैथलीन गोंजालेज ने कैसेनोवा की जीवनी लिखी है. कैथलीन को उम्मीद है कि अब दुनिया कैसेनोवा के बारे में अपना ख़्याल बदलेगी.

मार्च 2017 में कैसेनोवा की ज़िंदगी पर आधारित एक नृत्य नाटक या बैले, पेश किया जाने वाला है. इसका मंचन लंदन में होगा.

(अंग्रेजी में मूल लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी कल्चर पर उपलब्ध है.)

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