हरे चेहरे वाले एक 'बागी' की कहानी

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के कट्टर विरोधी नेता अलेक्से नवाल्नी इमेज कॉपीरइट Alexei Navalny
Image caption रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के कट्टर विरोधी नेता अलेक्से नवाल्नी

इंसान की ज़िंदगी में रंगों की बहुत अहमियत है. इनके ज़रिए इंसान की हर कैफ़ियत बयां की जा सकती है.

जैसे लाल रंग हवस को दर्शाता है. नीला रंग उदासी को बताता है. पीला रंग कायरता की निशानी माना जाता है.

क्या आपको मालूम है कि चुनौती और ललकार को दर्शाने के लिए कौन-सा रंग है? इस सवाल का जवाब हाल ही में रूस में हुई एक सियासी घटना से मिल सकता है.

रूस में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के कट्टर विरोधी नेता अलेक्से नवाल्नी के चेहरे पर हाल ही में हरा रंग लगा दिया गया.

ये घटना 20 मार्च को साइबेरिया के बरनौल शहर में हुई. अलेक्से ने इसे ना तो अपनी तौहीन समझा और ना ही इसे किसी से छुपाया.

उन्होंने गहरे हरे रंग से पुते अपने चेहरे की तस्वीर के साथ एक वीडियो मैसेज अपनी वेबसाइट पर पोस्ट कर दिया.

अलेक्स् के विरोधियों ने ये हरक़त भले ही उन्हें नीचा दिखाने के लिए की थी. लेकिन अलेक्स् ने अपने एक दांव से ख़ुद को डराने की विरोधियों की इस कोशिश को अपनी ताक़त का ज़रिया बना लिया.

ब्लॉगर जो पुतिन के लिए सिरदर्द बन गया है

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Image caption मिस्र में ओसीरिस को पुनर्जन्म का देवता माना जाता है

अलेक्से ने इसी हालत में अपने समर्थकों के साथ एक सेल्फ़ी ली और उसे ट्विटर और फ़ेसबुक पर अपलोड किया.

ऐसा करते हुए शायद खुद अलेक्से को इस बात का अंदाज़ा नहीं रहा होगा कि ये तस्वीर उन्हें कितनी शोहरत दिला देगी. हरे रंग से रंगी उनकी ये तस्वीर प्राचीन मिस्र और ग्रीस के देवता ओसीरिस से मिलती है.

मिस्र में ओसीरिस को पुनर्जन्म का देवता माना जाता है. यही नहीं ओसीरिस को वसंत ऋतु का देवता भी माना जाता है.

अलेक्से पर 20 मार्च 2017 को हमला किया गया था. उस दिन उत्तरी गोलार्ध में वसंत ऋतु की शुरुआत हुई थी. इस इत्तेफ़ाक़ को अलेक्से के सियासी जीवन में एक अध्याय के तौर पर देखा जाने लगा है.

माना जाने लगा है कि अब अलेक्से नए राजनेता के तौर पर पुनर्जन्म ले रहे हैं. वो ऐसे नेता बनने वाले हैं जिसे कभी कोई ताक़त दबा नहीं सकती.

दूसरे शब्दों में पुतिन के ख़िलाफ़ उठने वाली अलेक्से की आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता. ओसीरिस के हरे चेहरे का पश्चिम की कला की दुनिया पर काफ़ी असर रहा है.

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400 ईस्वी के आस-पास यूरोप में ग्रीन मैन के नाम से कला की दुनिया में एक किरदार गढ़ा गया था. इस ग्रीन मैन की तस्वीरें, पत्थरों पर ख़ूब उकेरी गईं.

कई धार्मिक इमारतों की दीवारों पर ग्रीन मैन की छवि बनाई गई. इसमें इस काल्पनिक क़िरदार का चेहरा, हरी पत्तियों और लताओं के ज़रिए बनाया जाता था.

लंबे वक़्त तक यूरोपीय देशों की इमारतों पर ये ग्रीन मैन छाया रहा. दिलचस्प बात ये है कि ये उस वक़्त की ईसाई परंपराओं के ख़िलाफ़ था. फिर भी कलाकारों ने इसे ख़ूब बनाया.

धार्मिक इमारतों पर भी ग्रीन मैन को जगह मिली. आज भी इंग्लैंड के नॉर्विच चिड़ियाघर में ग्रीन मैन की आकृति देखने को मिलती है.

इसके पीछे क्या मक़सद था, ये तो आज तक पूरी तरह नहीं समझा जा सका है. शायद ईसाई धर्म के पहले के बुतपरस्त, इस ग्रीन मैन को पुनर्जन्म का प्रतीक मानते थे. इसीलिए ईसाई धर्म में भी इसे जगह मिल गई.

शायद इसके फूले हुए गाल और बड़ी आंखें नई ज़िंदगी के प्रतीक माने जाते थे. ये मौत को चुनौती देता सा लगता था. तब हरा चेहरा, नई ज़िंदगी की मिसाल बन चुका था.

मगर अलेक्से नवाल्नी की तस्वीर से आज हरा रंग बग़ावत का प्रतीक बन गया है.

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