नादिया जिसने दुनिया भर को संगीत दिया

  • 24 अप्रैल 2017
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आज कहानी एक ऐसी महिला की जो दुनिया के नामी संगीतकारों की उस्ताद कही जाती है. जिसके बारे में कहा जाता है कि वो सुकरात के बाद दुनिया की सबसे बड़ी गुरू थी.

उस महिला का नाम था, नादिया बोलेंजर.

पश्चिमी संगीत की दुनिया में नादिया बोलेंजर एक ऐसा नाम है जिसने संगीत की उन बारीकियों से दुनिया को वाक़िफ़ कराया, जिन्हें पहले कभी पहचाना ही नहीं गया था.

लेकिन अफ़सोस, कि ये अज़ीम नाम दुनिया की नज़रों में उस तरह नहीं आ सका, जितनी उसकी क़ाबिलियत थी.

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नादिया के शागिर्दों की फेहरिस्त पर नज़र डालें तो, बीसवीं सदी के एक से एक नामचीन संगीतकार वहां नज़र आते हैं. लियोनार्ड बर्नस्टाइन, आरोन कॉपलैंड, क्विंसी जोन्स, एस्टर पियाज़्ज़ोला, फिलिप ग्लास, जॉन इलियट गार्डिनर जैसे बड़े संगीतकारों ने नादिया की सरपरस्ती में संगीत की तालीम हासिल की थी. इन सभी को नादिया ने ना सिर्फ संगीत को रूह में उतारने की एक अलग समझ दी थी, बल्कि अपने संगीत से एक अलग ज़ुबान पैदा करने का हुनर भी सिखाया.

अपनी इन्ही ख़ासयतों की वजह से वो मौसीक़ी की दुनिया की एक अज़ीम उस्ताद कही जाती हैं. नादिया बोलेंजर सिर्फ़ आज के दौर की नहीं, बल्कि इंसानी तारीख़ के हर दौर के लिए संगीत का एक बड़ा नाम हैं.

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बहुत सादा और आम से चेहरे-मोहरे वाली नादिया बोलेंजर का जन्म 1887 में हुआ था. अपनी 92 साल की ज़िंदगी में उन्होंने आधुनिक पश्चिमी संगीत को एक नया आयाम दिया. उसे नई ऊंचाई पर पहुंचाया.

हुनर को नहीं सराहा गया

बचपन में नादिया अपनी छोटी बहन लिली से बहुत जलती थीं. असल में लिली को संगीत की समझ बहुत ज़्यादा थी. उन्होंने बहुत कम उम्र में ही पेरिस कंज़रवेटोयर में संगीत की तालीम लेनी शुरू कर दी थी. मगर कभी भी लिली के रहते हुए नादिया के हुनर को नहीं सराहा गया.

अफ़सोस की बात ये कि लिली की 24 साल की उम्र में मौत हो गई. इसके बाद नादिया ने लिली के काम को बाक़ी दुनिया तक पहुंचाने को अपना मिशन बना लिया.

नादिया ने पेरिस में पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने घर पर संगीत की तालीम देने का काम शुरू कर दिया था. लेकिन इसके बाद उन्होंने ब्रिटेन और अमरीका में मशहूर संगीत विद्यालयों जैसे जूलियट स्कूल, यहूदी मोइनोहिन स्कूल, रॉयल कॉलेज ऑफ म्यूज़िक और रॉयल अकेडमी ऑफ़ म्यूज़िक जैसी बड़ी संस्थाओं में भी संगीत की उस्तादी की.

संगीत पढ़ाने के अपनी अद्भुत करियर के दौरान नादिया ने अमरीका और यूरोपियन सिम्फनी ऑर्केस्ट्रा का संचालन किया. वो पहली महिला थीं जिन्हें संगीत के इतने बड़े कार्यक्रम संचालित करने का मौक़ा मिला था. ये मौक़ा उन्हें सिर्फ़ और सिर्फ़ उनकी क़ाबलियत की बदौलत मिला था.

यही नहीं उन्होंने बीबीसी सिम्फ़नी, बोस्टन सिम्फ़नी, हाले ऑर्केस्ट्रा और न्यूयॉर्क फिल्हार्मोनिक जैसे म्यूज़िक कॉन्सर्ट का भी संचालन किया. नादिया इगोर स्ट्राविंस्की जैसे बड़े संगीतकार की भी गुरू थीं. संगीत को नई दिशाएं देने वाले बहुत से प्रोग्राम को नादिया ने एक नई ज़िंदगी बख्शी थी.

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Image caption अमरीकी संगीतकार क्विंसी जोंस ने बताया था कि उनके म्यूज़िक पर नादिया की शख़्सियत का गहरा असर रहा है

नादिया बोलांजेर के बारे में बड़े अफ़सोस से कहना पड़ता है कि उनका नाम कभी क्लासिकल म्यूज़िक की दुनिया से बाहर ना आ सका. हालांकि ऐसा नहीं था कि वो सिर्फ़ शास्त्रीय संगीत की ही जानकार थी. जैज़, टैंगो, फंक और हिप-हॉप जैसे संगीत की भी वो अच्छी समझ रखती थीं.

नादिया बहुत जुझारू, मेहनती और लगन से काम करने वाली महिला थीं. लेकिन इसके साथ-साथ वो उतनी ही पेचीदा और उलझे हुए मिज़ाज की थी.

पिछले साल बीबीसी प्रोम में अमरीकी संगीतकार क्विंसी जोंस ने बताया था कि उनके म्यूज़िक पर नादिया की शख़्सियत का गहरा असर था. म्यूज़िक की दुनिया में वो जो भी बन पाए वो सिर्फ़ और सिर्फ़ नादिया की बदौलत मुमकिन हो पाया.

आवाज़ की ख़ूबसूरती

क्विंसी बताते हैं नादिया अपने हरेक शागिर्द को उसकी आवाज़ की ख़ूबसूरती से रूबरू कराती थी. वो कहती थीं जिसकी ज़िंदगी में कुछ नया करने को नहीं है, उसका संगीत भी कभी नया नहीं हो सकता. वो जैसा है वैसा ही रहेगा. संगीत में नयापन लाने के लिए ज़िंदगी के तजुर्बों से गुज़रना बहुत ज़रूरी है.

क्विंसी जोंस ने ही माइकल जैक्सन के एल्बम थ्रिलर का संगीत तैयार किया था. वो आज की तारीख़ तक दुनिया में सबसे ज़्यादा बिकने वाला एल्बम है.

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नादिया बोलांजेर बीसवीं और इक्कीसवीं सदी में संगीत की दुनिया की ऐसी हस्ती हैं, जिसका नाम सुनहरे लफ़ज़ों में लिखा जाना चाहिए. लेकिन अफ़सोस कि आज ये नाम कुछ लोगों को छोड़कर किसी को याद तक नहीं.

उनकी विरासत को सलाम.

(अंग्रेजी में मूल लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी कल्चर पर उपलब्ध है.)

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