आपको 'अरब देशों के कामसूत्र' के बारे में मालूम है?

अरबी साहित्य में यौन का विषय इमेज कॉपीरइट Alamy

जब भी सेक्स साहित्य के बारे में बात होती है तो ज़हन में कुछ ख़ास नाम उभरते हैं. 'लोलिता' 'लेडी चैटरलीज़ लवर', 'फ़िफ़्टी शेड्स ऑफ़ ग्रे' जैसे नाम हमारे दिमाग़ में आते हैं. सेक्स पर सबसे चर्चित क़िताब हिदुस्तान में लिखी गई. ये है वात्स्यायन की 'कामसूत्र.'

संस्कृत में लिखा गया ये ग्रंथ पूरी दुनिया में यौन संबंध के सबसे अच्छे साहित्य के तौर पर मशहूर है. सर रिचर्ड फ़्रांसिस बर्टन ने कामसूत्र का अंग्रेज़ी में तर्जुमा किया है. इसके और भी बहुत से अनुवाद दुनिया भर में मशहूर हैं. मगर आज हम बात कामसूत्र की नहीं करेंगे. आज बात होगी अरब देशों के सेक्स साहित्य की.

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Image caption अंग्रेज़ लेखर सर रिचर्ड बुर्टोन ने अंग्रेजी के पाठकों को पहली बार 'कामसूत्र' और 'द परफ्यूम्ड गार्डन' से परिचित करवाया

अरब देशों में...

चौंक गए न आप! सेक्स पर आधारित क़िताबें और अरब देशों में. बात बिल्कुल हैरानी की ही है. मगर है पूरी तरह सच. कामसूत्र का अनुवाद करने वाले सर रिचर्ड फ्रांसिस बर्टन ने ही अरबी की एक किताब का अनुवाद किया था. इस किताब का नाम था, 'द परफ़्यूमड गार्डन'. हालांकि ये मूल अरबी का अनुवाद नहीं था.

बर्टन ने इसे फ्रेंच ज़बान से अंग्रेज़ी में अनुवादित किया था. इस क़िताब को पंद्रहवीं सदी में अरब देश ट्यूनिशिया के शेख़ नफ़ज़ोई ने लिखा था. इस किताब में जिस्मानी रिश्ते बनाने के बहुत से तरीक़ों को तफ़सील से बताया गया है. कामसूत्र के बारे में आम राय है कि ये सेक्स करने के तरीक़ों के बारे में लिखी गई है.

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Image caption काठमांडू की एक नक्काशीदार मूर्ति

महिलाओं का आत्मविश्वास

जबकि ये किताब महिलाओं के अधिकारों पर ज़्यादा ज़ोर देती है. इस किताब के अनुसार सेक्स का अधिकार सिर्फ़ मर्द का नहीं है. बल्कि इसमें औरत की भागीदारी भी बराबर की है. लिहाज़ा उसके अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती.

दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है कि कामसूत्र सेक्स के मामले में महिलाओं को आत्मविश्वास से लबरेज़ करने की बात करती है. इसके बरअक्स 'द परफ़्यूमड गार्डन' में जिस्मानी रिश्ते के ख़ालिस अंदाज़ में मज़ा लेने पर चर्चा की गई है. इसके अलावा इस किताब में कहानियों के ज़रिए सेक्स करने के तरीक़े बताए गए हैं.

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Image caption 'एक हज़ार और एक रात' की तर्ज पर ही 'द परफ्यूम्ड गार्डन' की कहानियां भी जीवंत शैली में ही लिखी गई हैं

मनोरंजन से भरपूर

ये कहानियां उसी अंदाज़ में लिखी गई हैं जिस अंदाज़ में अलिफ़-लैला लिखी गई है. जोकि मनोरंजन से भरपूर है. 'द परफ्यूम्ड गार्डन' में समलैंगिकता पर भी ख़ूब खुलकर चर्चा की गई है. बर्टन ने अपने तर्जुमे में 21 चैप्टर सिर्फ़ इन्हीं विषयों पर लिखे हैं.

बहुत से लोगों का कहना है कि बर्टन इस किताब का दूसरा भाग द सेंटेड गार्डेन के नाम से लिखने वाले थे. लेकिन इससे पहले ही उनकी मौत हो गई. बाद में उनके बहुत से काम को उनकी बीवी इज़ाबेल ने आग के हवाले कर दिया.

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Image caption 'कामसूत्र' का विषयवस्तु यौन शिक्षा देना है लेकिन 'द परफ़्यूम्ड गार्डन' लोगों का मनोरंजन भी करती है

धार्मिक मान्यता

अरबी साहित्य की जानकार सारा इर्विंग का कहना है कि आज भले ही अरब देशों में सेक्स के ज़िक्र तक से बचा जाता है. मगर, एक ज़माना था जब अरब देशों में सेक्स का लुत्फ़ बयान करने वाली किताबों को धार्मिक मान्यता प्राप्त थी. माना जाता था कि ये किताबें इंसान को जिस्मानी रिश्ते बनाने की सही तालीम देती हैं.

लिहाज़ा इन्हें भगवान का वरदान माना जाता था. लेकिन आज अरब देशों में सेक्स एक बड़ा हौवा बना हुआ है. ऐसा नहीं है कि वहां के लोग सेक्स नहीं करते या सेक्स की ख़्वाहिश नहीं होती. लेकिन वो इस विषय पर बात करने से कन्नी काटते हैं. उनके लिए इस विषय पर बात करना किसी तीसरी दुनिया की बात करने जैसा है.

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Image caption अरबी साहित्य में काम के विषय को कई बार केंद्र में रखा गया है

'अलिफ़ लैला' की कहानियां

ऐसे में 'द परफ्यूमड गार्डेन' जैसी किताबों को शैतानी किताब की तरह से देखा जाता है. एक तरफ़ कहा जाता है कि अरब देशों में सेक्स एक हौवा है. दूसरी तरफ़ ये भी कहा जाता है कि यहां सेक्स के लिए पागलपन की हद तक दीवानगी है.

लोग भले ही इस विषय पर बात करने से कतराएं, लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि हर दौर में अरबी लोग जिस्मानी रिश्तों को लिए भरपूर ख़्वाहिशमंद थे. बर्टन ने अरबी साहित्य का अंग्रेज़ी भाषा में ख़ूब अनुवाद किया है. जिसमें 'अलिफ़ लैला' की कहानियां भी शामिल हैं.

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राजकुमार शहरयार

हालांकि ये कहानियां फ़ारसी भाषा में 'हज़ार अफ़साने' के नाम से भी लिखी गई हैं. लेकिन इन सभी कहानियों के मूल में अहम मुद्दा सेक्स ही होता था. मिसाल के लिए हज़ार अफ़साने में एक कहानी राजकुमार शहरयार की है. एक दिन राजकुमार को पता चलता है कि उसकी बीवी ने उससे बेवफ़ाई की है. लिहाज़ा वो उसे क़त्ल कर देता है.

उसके बाद वो हर रोज़ एक कुंवारी लड़की के साथ रात गुज़ारता है और सुबह होने से पहले उसे क़त्ल कर देता है. एक दिन जब उसके वज़ीर की बेटी को उसकी दुल्हन बनाया गया तो उसने राजकुमार को पूरी रात एक के बाद एक कहानियां सुनाकर उलझाए रखा.

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बराबरी का हक़

राजकुमारी की कहानियां शहरयार को इतनी अच्छी लगी कि वो हर रात उससे एक कहानी सुनने लगा. एक ये सिलसिला एक हज़ार रातों तक चला और आख़िर कार राजकुमारी ने शहरयार को अपने पति के तौर पर जीत लिया. शहरज़ाद की कहानियों का संग्रह शहज़ादे की एक हज़ार रातों के नाम से जाना जाता है.

दरअसल शहरयार का मानना था कि उसकी बीवी को सिर्फ़ उसके साथ ही जिस्मानी रिश्ता बनाना चाहिए था. यानि किसी महिला के साथ जिस्मानी रिश्ता बनाने के बाद मर्द उसे अपनी जागीर समझ लेता है. वो उसे इस रिश्ते में बराबरी का हक़ देना नहीं चाहता है.

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Image caption पासोलिनी ने 1974 में इस विषय पर एक फिल्म भी बनाई थी

दीवार तोड़ने की कोशिश

जबकि भारत में लिखी गई कामसूत्र में इस रिश्ते में औरत को बराबर का शरीक माना गया है. यानी कहा जा सकता है कि कामसूत्र प्राचीन होकर भी आधुनिक है. अरब देशों में भले ही आज भी सेक्स के विषय पर बात करना मुश्किल होता हो लेकिन नई नस्ल इस दीवार को तोड़ने की कोशिश कर रही है.

एक बार फिर से अरब देशों में जिस्मानी रिश्तों पर आधारित साहित्य लिखा जाने लगा है. जैसे कि 2001 में अम्मार अब्दुल हामिद ने 'मेंसट्रुएशन' नाम की किताब लिखी थी. जिसमें एक इमाम के बेटे की कहानी बयान की गई है. इस लड़के को एक शादीशुदा महिला से इश्क़ हो जाता है. वो उस महिला के साथ जिस्मानी रिश्ता बना लेता है.

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अरब देशों का समाज

अब अरबी महिलाओं ने भी इस तरह का साहित्य लिखने में अपना हाथ आज़माना शुरू कर दिया है. साल 2005 में 'नज़्मा' नाम से एक किताब लिखी गई थी. इसे एक महिला ने लिखा था. अरब इतिहास में जिस्मानी रिश्तों पर किसी महिला के हाथ से लिखी गई ये पहली किताब थी. इसके बाद और भी बहुत सी किताबें सामने आईं.

मोरक्को के मोहम्मद चौकरी ने तो अपनी किताब में वेश्याओं और यौन रोगों तक का ज़िक्र किया है. सीरिया की स्कॉलर और लेखिका सल्वा नईमी के मुताबिक़ इस बात को लेकर कोई हैरानी नहीं होनी चाहिए कि अरब देशों में जिस्मानी रिश्तों पर इतनी किताबें लिखी गई हैं. अरबी समाज में सेक्स सबसे ज़्यादा आनंद की चीज़ माना गया है.

पुराना साहित्य

इनके मुताबिक़ अरबी ज़बान सेक्स की ज़बान है. ये और बात है कि अरबी समाज में लड़की और लड़के में बड़े पैमाने पर फ़र्क़ किया जाता है. इनके जीवन पर धर्म का गहरा प्रभाव है. धर्म ही बताता है कि समाज में एक लड़की और लड़के का रिश्ता कैसा हो. तन्हाई में उन्हें कैसे एक दूसरे के साथ पेश आना चाहिए.

हालांकि बहुत से यूरोपियन कलाकारों और लेखकों ने सेक्स के मामले में अरब देशों को अय्याश के तौर पर दिखाया है. इनके मुताबिक़ अरब देशों में सेक्स को ज़िनाकारी माना जाता है. जबकि ऐसा नहीं है. अरब देशों में जिस्मानी संबंधों पर जितने पुराने साहित्य हैं, उन सभी में इसे ज़्यादा से ज़्यादा पुरकशिश बनाने पर ज़ोर दिया गया.

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वात्स्यायन का कामसूत्र

साथ ही सेक्स को ज़हनी और जिस्मानी सुकून देने वाला माना गया है. इसके लिए तरीक़े भी सुझाए गए हैं. इस सबके बावजूद वात्स्यायन का कामसूत्र अरबी साहित्य पर भारी है. क्योंकि ये सिर्फ़ जिस्मानी रिश्ते बनाने की बात नहीं करती, बल्कि महिलाओं के हक़ की भी बात करती है.

शायद इसीलिए आज भी इसकी उपयोगिता और अहमियत कम नहीं हुई है.

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