विराम चिह्न बताते हैं कि कैसे इंसान हैं आप

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हम सब ने व्याकरण पढ़ी है. हिंदी का, अंग्रेज़ी का या उर्दू का या किसी और भाषा का. व्याकरण वो बुनियादी उसूल हैं, जिनके दायरे में रहकर किसी ज़बान का इस्तेमाल होता है.

हर ज़बान में विराम चिह्न यानी कॉमा, फुलस्टॉप या अर्ध विराम, पूर्ण विराम को इस्तेमाल करने के नियम हैं. मगर आज सोशल मीडिया के दौर में व्याकरण के तमाम नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं.

यूं भी बर्तानवी लेखक ए जी गार्डिनर ने अपनी कहानी All about A dog में लिखा है कि नियम, इंसान की सुविधा के लिए होते हैं, परेशान करने के लिए नहीं.

ट्रंप करते हैं धुआंधार इस्तेमाल

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शायद यही वजह है कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उस विराम चिह्न का धुआंधार इस्तेमाल करते हैं, जिसके बारे में कहा गया है कि उसे जहां तक मुमकिन हो इस्तेमाल ही न करें.

ट्रंप जिस विराम चिह्न का बेहिसाब इस्तेमाल करते हैं, वो है mark of exclaimation (!). हिंदी में इसे विस्मयादिबोधक चिह्न कहा जाता है. अंग्रेज़ी के व्याकरण की तमाम किताबें कहती हैं कि इस का इस्तेमाल न ही करें तो अच्छा.

मगर ट्रंप वो इंसान तो हैं नहीं जो नियम-क़ायदे मानें. इसलिए वो हर दूसरे ट्वीट में इसे लगा देते हैं. एक-दो नहीं, कम से कम तीन बार. अमरीका में इसे exclaimation point कहते हैं.

ट्रंप ने साल 2016 में exclaimation point वाले कुल 2251 ट्वीट किए. यानी वो अपने कुल ट्वीट में से 68 फ़ीसद में इसका इस्तेमाल कर रहे थे.

ट्रंप ने इस चिह्न का किया राजनीतिकरण

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Image caption 18 सदी के डॉक्टर जॉनसन जिन्होंने 'exclaimation' के बारे में बताया था

ट्रंप ही क्यों, आज के दौर में कमोबेश हर शख़्स इस चिह्न का बेझिझक इस्तेमाल कर रहा है.

कहने वाले ये भी कह सकते हैं कि ट्रंप ने इस विराम चिह्न का राजनीतिकरण कर डाला है. ज़बान के उसूलों के पक्के लोग इसे विराम चिह्न का बेजा इस्तेमाल बताकर नाक-भौं सिकोड़ते ही हैं.

मशहूर अमरीकी लेखक बिल ब्रायसन कहते हैं कि exclaimation point या mark of exclaimation या विस्मयादिबोधक चिह्न का इस्तेमाल जज़्बातों के ज्वार को जताने के लिए होता है. कई बार इसके ज़रिए तुरंत ध्यान खींचने की कोशिश होती है, तो कई बार किसी बात पर अचरज जताने के लिए. ये बेहद ख़ुश इंसान के जज़्बात जताने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है और दुखों का पहाड़ टूटने पर भी.

अंग्रेज़ी भाषा का इतिहास बताता है कि चौदहवीं सदी में exclaimation point को the point of admiration कहा जाता था. सत्रहवीं सदी आते-आते इसे wonderer कहा जाने लगा. हालिया मिसालें बताती हैं कि महिलाएं इसका ज़्यादा इस्तेमाल करती हैं.

मगर अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मुक़ाबले उनकी प्रतिद्वंदी रही हिलेरी क्लिंटन इसका बमुश्किल ही इस्तेमाल करती थीं!

उन्नीसवीं सदी तक आते-आते विस्मयादिबोधक चिह्न के इस्तेमाल का तरीक़ा बदला. पहले जहां इसे दूसरों की तारीफ़ करते वक़्त लगाया जाता था. वहीं उन्नीसवीं सदी में इसे ख़ुद के जज़्बात ज़ाहिर करने के लिए इस्तेमाल किया जाने लगा.

तो, हम ये कह सकते हैं कि exclaimation point या mark of exclaimation व्याकरण की सेल्फ़ी है!

चेखव ने Exclaimation Mark पर कहानी ही लिख दी थी

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Image caption अंतोन चेखव

इंटरनेट के इस दौर में सेल्फ़ी का ज़माना है, तो भाषा की इस सेल्फ़ी का भी धुआंधार इस्तेमाल हो रहा है. कोई चौंक जाता है तो इसे इस्तेमाल करता है. कोई सवाल उठाना चाहता तो भी अपने वाक्य में विस्मयादिबोधक चिह्न लगाता है. कोई ग़ुस्से के इज़हार के लिए इसे लगाता है तो कोई बेहिसाब ख़ुशी इसके ज़रिए जताता है.

मशहूर रूसी लेखक अंतोन चेखव ने तो इस पर एक कहानी ही लिख डाली थी. इस कहानी का नाम था The Exclaimation Mark. ये कहानी एक सरकारी अफ़सर के बारे में थी. उन्हें अचानक ये एहसास होता है कि अपने चालीस साल के करियर में उन्होंने एक भी बार mark of exclaimation का इस्तेमाल नहीं किया.

बीसवीं सदी की शुरुआत में ब्रिटेन के फोलर भाइयों हेनरी और फ्रांसिस ने किंग्स इंग्लिश नाम की क़िताब लिखी. इसमें उन्होंने साफ़-साफ़ लिखा कि exclaimation point का इस्तेमाल उसी सूरत में हो जब आप वाक़ई हैरान रह गए हों. जैसे कि आप डर जताना चाहते हों, या किसी की गाली सुनकर चौंक गए हों, तभी विस्यमादिबोधक चिह्न का इस्तेमाल करें.

सोशल मीडिया ने इसके चलन को और बढ़ा दिया

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मगर इक्कीसवीं सदी में जिस विराम चिह्न को फोलर भाइयों ने कभी-कभी इस्तेमाल करने को कहा था, वो आज धड़ल्ले से लगाया जा रहा है.

आज इंटरनेट, ई-मेल और सोशल मीडिया ने इसके चलन को और बढ़ा दिया है. हम जितना ही इसका इस्तेमाल करते हैं, उतनी ही इसकी और ज़रूरत बढ़ती जाती है.

आज किसी भी वाक्य को सांस लेने की मुहलत देने वाले अर्धविराम या कॉमा की जगह हम exclaimation point (!) का ही ज़्यादा इस्तेमाल करते हैं.

इसका ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल हमारे किरदार की तरफ़ भी इशारा करता है. जैसे किसी और चीज़ का बेजा इस्तेमाल हमारे बारे में इशारे देता है. उसी तरह punctuation mark का इस्तेमाल भी.

शायद हम सब दुनिया में आ रहे ज़बरदस्त बदलावों को देखकर इतने हैरान हैं कि बार-बार अचरज से लिख बैठते हैं ये विस्मायदिबोधक चिह्न या mark of exclaimation.

(मूल लेख का अंग्रेज़ी अनुवाद पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)

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