समंदर के सीने में दफ़न ये ख़ूबसूरत राज़!

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कहते हैं समंदर की गहराइयों में क़ुदरत के बहुत से राज़ छुपे हैं, जिनसे इंसान आज भी पर्दा नहीं उठा पाया है.

इसके साथ ही इंसानी ज़िंदगी की तबाही के भी बहुत से राज़ समंदर ने अपने सीने में छुपा रखे हैं. आपको ब्रिटिश जहाज़ टटाइटेनिक का किस्सा तो याद होगा ही.

सैकड़ों लोग ज़िंदगी की रंगीनियों से रूबरू होने के लिए समंदर का दामन थाम कर चल दिए थे. लेकिन जब बीच रास्ते में ही हादसे के अंधेरे ने टाइटेनिक को भटका दिया तो समंदर ने इसे अपने दामन में समेट लिया. और इंसान के लिए टाइटेनिक जहाज़ एक इतिहास बन गया.

लेकिन समंदर इंसान की इस अमानत की हिफ़ाज़त आज भी कर रहा है.

टाइटेनिक जैसे ही और भी बहुत से ऐसे जहाज़ समंदर की तह में दबे हैं, जो निकले थे एक नए सफर पर. नई मंज़िल की तलाश में, लेकिन जब रास्ता भटके या हादसे का शिकार हुए तो समंदर ने ही उन्हें पनाह दी.

तारीख का हिस्सा बन चुकी इन चीज़ों को समंदर की गहराई तक जाकर देखना तो हर किसी के बस की बात नहीं. लिहाज़ा तारीख के कुछ क़द्रदान समंदर में जाकर इन चीजों की तस्वीरें हमारे लिए सबूत के तौर पर ला रहे हैं. और उनका ये तजुर्बा ज़बरदस्त दिलचस्प रहा है.

पिछले साल ब्रिटेन के फ़ोटोग्राफ़र स्टीव जॉन्स ने कुछ ऐसे ही जहाज़ों की तस्वीरों की नुमाइश की थी. उन्हों ने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान बमबारी के शिकार हुए अमरीकी लड़ाकू जहाज़ बी-17 जी फ्लाइंग फोर्ट्रेस की तस्वीरों की भी नुमाइश की थी. बाल्टिक सागर में लैटविया के पास विस नाम की जगह पर ये विमान डूब गया था.

इस हादसे में जहाज़ के सह-पायलट अर्नेस्ट विएना की मौत हो गई थी. जब इन तस्वीरों को विएना के परिवार वालों ने देखा तो उन्हें लगा, मानो वो एक बार फिर से अर्नेस्ट से मुलाकात कर रहे हैं.

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समंदर की तह में फोटोग्राफी

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स्टीव कहते हैं समंदर की गहाराइयों में जाकर फोटोग्राफी करने का अपना अलग ही मज़ा है. ये हौसला भी बढ़ाता है और मज़ेदार भी.

जब आप समंदर में जाकर इन जहाज़ों के मलबे को देखते हैं. ऐसा लगता है कि आप सौ साल पीछे चले गए हैं. इतनी गहराई में बरसों से वैसे ही पड़े मलबे देखकर हैरानी होती है.

आंखे खुली की खुली रह जाती है. और अफसोस भी होता है कि नए सफर का आग़ज़ करने वाले ज़हाज़ मंज़िल पर पहुंचने से पहले ही कैसे अपना रास्ता खो बैठे.

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समंदर की तह में बैठे जहाज़ों के ये मलबे इतिहास बन चुके हैं. बहुत सा मलबा तो खुद ही खत्म हो गया. वक़्त रहते इनकी तस्वीरें नहीं ली गईं, तो शायद इनकी फोटो भी नसीब नही हो पाएगी.

बर्बाद होते इन मलबे के ढेरों को सिर्फ तस्वीरों में कैद करके ही ज़िंदा रखा जा सकता है.

समुद्र के भीतर जाकर ऐसे ही मलबों की फोटोग्राफी करने वाले फ्रीलांस ब्रिटिश फोटोग्राफर आंद्रे नाइबर्ग अपना तजुर्बा बयान करते हैं. वो कहते हैं कि समंदर के पानी में तैरते हुए फोटोग्राफी की जाती है.

ऐसा लगता है जैसे आप उसी दौर में आ खड़े हुए हैं, जब इन जहाज़ों ने अपना सफर शुरू किया था.

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आंद्रे का शौक़ है पानी की गहराई में जाकर ऐसी चीजों की फोटोग्राफी करना जो ज़मीनी ज़िंदगी की चीज़ों से मेल खाती हैं.

पानी में फोटोग्राफी करने के लिए उनकी सबसे पसंदीदा साइट है एस.एस थिसलगॉर्म. ये जहाज़ दूसरे विश्व युद्ध के दौरान लाल सागर में डुबा दिया गया था.

इसे दुनिया की सबसे बेहतरीन जहाज के मलबे की साइट माना जाता है. आंद्रे ने अब तक जितनी भी अंडरवाटर फोटोग्राफी की है, उसमें इस साइट की फोटोग्राफी सबसे शानदार हैं. वो यहां अपनी पत्नी के साथ फोटोग्राफी करने आए थे.

लेकिन आंद्रे का सबसे शानदार तजुर्बा रहा था, 1942 में डूबे अमरीकी लड़ाकू जहाज़, एस.एस प्रेसिडेंट कूलिज की तस्वीरें लेना.

वो और उनकी पत्नी उस वक़्त चौंक उठे थे, जब अचानक बेतहाशा नीली रौशनी में दोनों नहा गए थे. कुछ देर के लिए तो दोनों को समझ में ही नहीं आया कि हो क्या रहा है.

बाद में पता चला कि वो तो मछलियों का एक झुंड था, जो शिकार की तलाश में उधर से गुज़र रहा था.

सावधानी रखना जरुरी

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पानी की गहराइयों में फोटोग्राफी करने वालों को आंद्रे नाइबर्ग सलाह देते हैं कि जब भी आप फोटोग्राफी के लिए जाएं तो अपना कैमरा और दूसरा सामान अच्छी तरह से चेक करके जाएं.

बहुत सी ऐसी जगहें होती हैं जहां रौशनी नहीं पहुंचती, और आप टॉर्च भी ना जला सकें. ऐसे में एक लाइन में चलना ज़रूरी है.

अमरीका की जेनिफर आईडल दुनिया की ऐसी पहली महिला हैं जिन्होंने करीब 50 बार समंदर में जाकर इन मलबों की फोटोग्राफी की.

अपने तजुर्बे को बयान करते हुए वो कहती हैं कि उन्हें समंदर में जाकर चट्टानों या वहां के जीवों की फोटोग्राफी करने से ज़्यादा उन्हें ऐतिहासिक महत्व वाले मलबे की फोटोग्राफी करना ज़्यादा पसंद है.

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उन्होंने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान डूबी जर्मनी की उस पनडुब्बी की फोटोग्राफी की है, जिसे नॉर्थ कैरोलिना में अमरीका तटरक्षकों ने डुबो दिया था. जेनिफर कहती हैं कि इस बोट की फोटोग्राफी करना उनके लिए सबसे ज़्यादा मज़ेदार रहा.

जेनिफर कहती हैं कि ऐसे मलबे की अच्छी तस्वीरें लेते समय कुछ खास बातों का ख्याल रखना ज़रूरी है. अक्सर ये मलबे बेतरतीब होते हैं. इसलिए फोटो लेते समय फोकस करना बहुत ज़रूरी है.

साथ ही मलबे के अंदर की तस्वीरे लेनी ज़रूरी हैं. क्योंकि, इसी से पता चलता है कि किस तकनीक का इस्तेमाल किया गया होगा. दमदार तस्वीरें लेने के लिए पूरी प्लानिंग करने ज़रूरी होता है. हो सकता है कि कोई मलबा एक बार में तस्वीरों में पूरी तरह क़ैद न हो सके.

जिस मलबे की तस्वीर आप लेने जा रहे हैं उसके बारे में जानकारी होना बहुत ज़रूरी है. और फिर इस मलबे में अंदर घुसने के लिए आपको रणनीति बनानी होगी.

ये बातें रखें ध्यान

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चूंकि ये मलबे सालों से समंदर में पड़े हैं लिहाज़ा समंदर का ही हिस्सा बन चुके हैं. समुद्री जीव इनमें अपना घर बसा लेते हैं. ऐसे में जब कोई तैराक यहां पहुंचता है तो उसे तरह तरह की मछलियों और दूसरे जीवों से सामना करना पड़ता है.

ऐसे में ये तैराक की ज़िम्मेदारी है कि वो जब फोटो ले तो इन जीवों को किसी तरह की कोई परेशानी ना हो. समंदर की तह में पड़े इस मलबे को उसी तरह आदर और सम्मान करना चाहिए, जैसे आप किसी कब्रिस्तान में जाकर वहां दफ़न लोगों का करते हैं.

अगर मलबे के अलावा भी कोई ऐसी चीज़ नजर आती है जो तैराक को भी हैरान कर दे, तो, इसकी जानकारी ज़िम्मेदार विभाग को बतानी चाहिए.

सबसे अहम ये है कि किसी भी तैराक को समुद्री क़ानूनों की जानकरी होना लाज़मी है. चूंकि ये मलबे ज़्यादार जंगी जहाज़ों के हैं. तो, हो सकता है कि इन में कुछ ऐसा जंगी सामान मौजूद हो जो अभी भी एक्टिव हो, जैसे बम या बारूद का गोला.

ऐसे में इस तरह के किसी भी सामान को छुए बगैर ही अपना काम कीजिए.

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स्पेन के जॉर्डी बेनितेज़ पेशे से एक बैंकर हैं. लेकिन 12 साल पहले ही उन्हों ने अंडर वॉटर फोटोग्राफी शुरू की है. उन्हों ने 1941 में पानी में डूबे बर्तानवी लड़ाकू जहाज़ एस एस थिसिलगॉर्म की तस्वीरें ली हैं.

इसका मलबा साल 1950 में मिला था. जॉर्डी कहते हैं कि इस जहाज़ पर आज भी दूसरे विश्व युद्ध के दौरान इस्तेमाल होने वाले जंगी हथियार और दूसरे साज़ो सामान मौजूद हैं.

उस दौर की बाइक, ट्रेन और ट्रक जहाज़ के विंग वगैरह मलबे में मौजूद हैं. यहां पहुंचकर जब इन चीज़ों को देखते हैं, तो लगता है कि आप एक बार फिर से 70 साल पहले के दौर में आ खड़े हुए हैं.

जॉर्डी का कहना है कि जब भी आप इस तरह के मलबे की फोटोग्राफी के लिए जाए तो वाइड एंगल लेंस का इस्तेमाल करें. कोशिश करें कि क़ुदरती रौशनी में तस्वीरें लें.

समंदर के सीने में दफ़्न ये राज़ बेहद ख़ूबसूरत हैं. इन्हें बाक़ी दुनिया के सामने लाने वाले इन बहादुर फोटोग्राफर को हमारा सलाम.

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