पैसे जुटाने हों तो ये नुस्खे आजमाएं

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दुनिया में बहुत से लोग परोपकार के काम में लगे हैं. मगर दूसरों की मदद के लिए भी पैसों की ज़रूरत होती है. जिसे जुटाने में परोपकारी लोगों को अच्छी ख़ासी मशक़्क़त करनी पड़ती है.

तो, अगर आप कोई स्वयंसेवी संस्था चलाते हैं और उसके लिए पैसे जुटाने में दिक़्क़त हो रही है. तो हम आपको ऐसे पांच नुस्खे बताते हैं जो आपके काम आ सकते हैं.

1. घिसी-पिटी तस्वीरों का इस्तेमाल न करें: अक्सर लोग मदद जुटाने के लिए मज़लूम बच्चों की, तबाही के मंज़र के सामने लाचार खड़े लोगों की तस्वीरों का इस्तेमाल करते हैं. ये तस्वीरें आपके बहुत काम की नहीं हैं. अगर युद्ध से हुई तबाही की तस्वीर में किसी ख़ूबसूरत बच्चे का चेहरा दिखेगा तो लोग कम मदद करेंगे. अल्बर्टा यूनिवर्सिटी के कराए इस रिसर्च से पता चला कि तबाही की तस्वीरों के बीच प्यारे बच्चे दिखते हैं तो लोगों को लगता है कि ये बच्चे स्मार्ट हैं. अपनी मदद ख़ुद कर लेंगे. इन्हें मदद की कम ज़रूरत है.

इसी तरह युद्ध से हुई बर्बादी की तस्वीरें देखकर कम ही लोग मदद करते हैं. इनके मुक़ाबले क़ुदरत के क़हर की तस्वीरें, लोगों को मदद के लिए ज़्यादा आगे आने की प्रेरणा देती हैं. साथ ही लोग ऐसे लोगों की मदद करना चाहते हैं जो किसी आफ़त के बाद ख़ुद भी अपनी ज़िंदगी को पटरी पर लाने में जुटे हों. तो परोपकार के लिए पैसे जुटा रहे हों, तो ऐसी तस्वीरें संभावित मददगारों को दिखाएं जिनमें तबाही के शिकार लोग अपना घर फिर से बनाने की कोशिश कर रहे हों. आपको ज़्यादा रक़म मिलेगी.

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2. हमेशा ख़ास कहानियों पर भरोसा न करें: अक्सर किसी आपदा के बाद लोग, कुछ नाम लेकर, कुछ लोगों की कहानियां सुनाकर मदद जुटाने की कोशिश करते हैं. उन्हें लगता है कि लोगों के नाम सुनकर, मदद करने वाले उस इंसान से जुड़ाव महसूस करेंगे और ज़्यादा दान करेंगे. पर होता इसके उलट है. कई बार किसी एक इंसान के बजाय लोग ज़्यादा से ज़्यादा लोगों की मदद करना चाहते हैं.

ऐसे में किसी एक इंसान की कहानी सुनकर उन्हें लगता है कि किसी एक की क्या मदद करना. इसराइल में हुई एक रिसर्च में देखा गया कि कुछ महिलाओं को जब एक ख़ास महिला की मदद को कहा गया तो उन्होंने दिल खोलकर मदद की. लेकिन जब उनसे कई आदमियों के लिए मदद मांगी गई तो उन्होंने और भी ज़्यादा दान किया.

यही बात मर्दों के मामले में भी देखी गई. वो किसी एक आदमी की मदद के लिए अपनी जेबें ज़्यादा ढीली करने को राज़ी नहीं थे. मगर, जब उन्हें ये बताया गया कि इससे कई महिलाओं की मदद होगी, तो वो ज़्यादा पैसे देने को राज़ी हो गए.

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3. शब्दों का इस्तेमाल सावधानी से करें: जब किसी से दान मांगें तो उसे ये बताना ज़रूरी होता है कि आख़िर वो क्या कर रहा है. किसी की मदद कर रहा है या इंसानों के प्रति अपना प्यार जता रहा है. ब्रिटिश मनोवैज्ञानिक निकोलस गुगेन ने इस बारे में दिलचस्प तजुर्बा किया. उन्होंने 14 दुकानों में दान पात्र रखे. किसी में लिखा दान करें. किसी में लिखा दान करें क्योंकि ये प्यार करने जैसा है.

किसी में लिखा कि दान करें क्योंकि इससे किसी की मदद होती है. जब बाद में सभी डिब्बों के पैसे गिने गए तो पता चला कि जिस डिब्बे में दान का मतलब प्यार करना बताया गया था उसमें सबसे ज़्यादा पैसे थे. साफ़ है कि मदद करने से ज़्यादा लोगों को प्यार करने की भावना अच्छी लगी. क्योंकि इससे इंसान से जुड़ाव और मदद का भाव ज़्यादा ज़ाहिर हुआ. तो एनजीओ चलाने वाले इस बात का ख़ास ख़्याल रखें कि वो किन शब्दों का ज़िक्र करके मदद जुटाना चाहेंगे.

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4. दान की रक़म को सार्वजनिक करें: तमाम तजुर्बों से ये मालूम हुआ है कि दान करने वाले चाहते हैं कि उनकी कोशिश को दुनिया जाने. जब भी लोगों को लगता है कि उनके परोपकार के काम को कोई देख रहा है, तो वो मदद करने के लिए ज़्यादा उत्साहित होते हैं.

अगर किसी को पता है कि दान करने पर या किसी की मदद करने पर उसके नाम की चर्चा होगी, तो वो ज़्यादा उत्साहित होकर मदद के लिए आगे आता है. इसलिए इस बात पर ज़ोर रहे कि दान देने वाले को आप भरोसा दे सकें कि उसका नाम दुनिया को पता चलेगा. उसकी मदद की लोग तारीफ़ करेंगे.

5. करोड़पतियों को दान के नफ़े-नुक़सान न बताएं: किसी करोड़पति कारोबारी से दान लेने जाएं तो सीधे दान मांगें. जैसे ही आप उसको इसके फ़ायदे नुक़सान की बातें गिनाने लगेंगे, वो अपना नफ़ा-नुक़सान तौलने लगेगा.

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Image caption फोर्ब्स के मुताबिक जेके राउलिंग ने करीब 16 करोड़ डॉलर दान किए हैं.

वो मदद की रक़म को इन्वेस्टमेंट के तौर पर देखेगा. फिर उस पर रिटर्न की उम्मीद भी लगा बैठेगा. बेहतर है कि ज़्यादा पैसे वालों से आप सीधे मदद की गुहार लगाएं. इसमें आपको ज़्यादा कामयाबी मिलने की उम्मीद है.

तो इन छोटी-छोटी बातों का ख़्याल रखकर आप, लोगों से मदद के लिए ज़्यादा पैसे जुटा सकते हैं.

(मूल लेख अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी फ़्यूचर पर उपलब्ध है.)

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