लंदन के म्यूज़ियम में मौजूद है कंकालों का ख़जाना

इमेज कॉपीरइट Amanda Ruggeri

म्यूज़ियम ऑफ लंदन के तहखाने में बेहद अजीब क़िस्म का ख़ज़ाना रखा है. इसके बारे में शायद ही यहां आने वालों को भनक हो. म्यूज़ियम में ऊपर भले ही आपको चलते हुए रोमन काल से लेकर विक्टोरिया युग में जाने का एहसास हो. तहखाने में जाएंगे तो यक़ीनन आप चौंक जाएंगे.

इस तहख़ाने में तरतीब से रखे हुए हैं हज़ारों गत्ते के बक्से. ठीक वैसे ही जैसे आप, घर बदलते वक़्त इस्तेमाल करते हैं, सामान पैक करने के लिए. आप सोचेंगे कि इनमें कुछ ख़ास सामान रखा है. मगर इनके लेबल देखेंगे तो चौंक जाएंगे. इन पर लिखा हुआ है मानव कंकाल.

बरसों पहले ख़त्म हो चुकी ज़िंदगियों के ये सबूत, लंदन और उसके आस-पास की खुदाई के दौरान मिले हैं. इनमें से कई महज़ एक सदी पुराने हैं तो बहुत से हज़ार साल पुराने भी हैं. लंदन म्यूज़ियम में जमा ये मानव कंकाल, शायद इंसानी अवशेषों का दुनिया में सबसे बड़ा ख़ज़ाना हैं.

इन कंकालों की देखभाल करने वाली येलेना बेक्वालाक कहती हैं कि ये इंग्लैंड के रोमनकाल से लेकर उन्नीसवीं सदी तक की कहानी सुनाने वाले कंकाल हैं. इन्होंने इतिहासकारों को लंदन का इतिहास यूं बताया है, जैसे कोई बुजुर्ग पुराना क़िस्सा सुना रहा हो.

इमेज कॉपीरइट Amanda Ruggeri

येलेना बताती हैं कि इन कंकालों की पड़ताल के बाद कई बार इतिहासकारों ने लंदन के इतिहास में फेरबदल किया है. जैसे कि लंदन की बदनाम 'ब्लैक डेथ' यानी प्लेग से हुई मौत से जुड़ी बातों को इन कंकालों के ज़रिए नए सिरे से जाना समझा गया. माना जाता है कि ब्लैक डेथ के दौरान लंदन शहर पूरी तरह तबाहो-बर्बाद हो गया था. मगर इन कंकालों को देखकर पता चलता है कि प्लेग से मरने वालों की क़ब्रें बेहद करीने से खोदी गई थीं. यहां कोई भगदड़ का माहौल नहीं दिखता.

इसी तरह ये माना जाता है कि मध्य युग में इंसान दांतों की सफ़ाई को लेकर बेपरवाह थे. दांतों की सफ़ाई का चलन, आधुनिक युग की देन माना जाता है. मगर, लंदन में मिले कंकाल बताते हैं कि मध्य युग में लोगों के दांत ज़्यादा साफ़ रहते थे. शायद इसका ताल्लुक़ हमारे चीनी खाने से है. क्योंकि चीनी ही हमारे दांतों को सबसे ज़्यादा नुक़सान पहुंचाती है.

इसी तरह लंदन के इन कंकालों से पता चलता है कि इंग्लैंड में औद्योगिक क्रांति का असर लोगों की सेहत पर कैसा पड़ा था. हालांकि अभी इसकी पूरी पड़ताल की जानी बाक़ी है.

इमेज कॉपीरइट Amer Ghazzal/Alamy

लंदन में पिछली कई सदियों में लाखों लोग दफ़न किए गए हैं. इनमें से ज़्यादातर कंकाल, शहर के विकास के लिए होने वाली खुदाई के दौरान निकले हैं. कभी मेट्रो के लिए तो कभी नई इमारतें बनाने के लिए.

जानकार कहते हैं कि पहले चर्च ही क़ब्रिस्तानों की देख-रेख करते थे. कई बार जब चर्चों को अपने स्कूल का विस्तार करना होता था तो वो पुराने क़ब्रिस्तानों को ही बेच देते थे. इन्हीं की खुदाई के दौरान बहुत से कंकाल मिले. जैसे कि 2011 में चर्च ऑफ इंग्लैंड के प्राइमरी स्कूल के खेल के मैदान की खुदाई में 959 कंकाल मिले.

कई बार पुराने कंकालों को फिर से दफ़न कर दिया जाता है. ऐसा विकास की प्रक्रिया के दौरान निकले कंकालों के साथ होता है, या फिर कुछ ऐसे कंकाल मिलते हैं जिनसे बहुत ज़्यादा जानकारी होने की उम्मीद नहीं होती. फिर भी ऐसे कंकाल काफ़ी मात्रा में मिल जाते हैं जिनसे लंदन के इतिहास की झलक मिल सकती है. ऐसे कंकाल म्यूज़ियम ऑफ लंदन की देख-रेख में दे दिए जाते हैं.

इमेज कॉपीरइट Amanda Ruggeri

कई बार अच्छे से संवारे हुए बाल या करीने से काटे गए नाखून मिलते हैं. ये अक्सर मध्य युग के होते हैं.

अब इन कंकालों को दो हिस्सों में बांटकर इनकी पड़ताल की जा रही है. जैसे कि क़रीब पंद्रह सौ कंकाल लंदन के हैं और एक हज़ार कंकाल लंदन के बाहर के. इसी तरह कुछ औद्योगिक क्रांति से पहले के हैं तो कुछ उसके बाद के हैं. इनके बीच तुलना करके दो अलग-अलग दौर के बीच के फ़र्क़ को समझने की कोशिश की जा रही है.

कंकालों की पड़ताल में आधुनिक तकनीक काफ़ी मददगार साबित हो रही है. जैसे कि रेडियोग्राफी और सीटी स्कैन. इनकी मदद से उस दौर के इंसानों की सेहत के बारे में अच्छी ख़ासी जानकारी मालूम हो जाती है.

जैसे कि औद्योगिक क्रांति से इंग्लैंड के लोगों का रहन-सहन काफ़ी बेहतर हुआ था. लेकिन उन्हें मोटापे और डायबिटीज़ जैसी बीमारियों से भी दो-चार होना पड़ा. म्यूज़ियम में रखे कंकालों से ये बातें सामने आई हैं. अक्सर बीमारियों का असर हमारी हड्डियों पर होता है. इनकी महीन जांच से हमें इस असर का अंदाज़ा होता है.

इमेज कॉपीरइट Amanda Ruggeri

पहले इतिहासकार उस दौर के दस्तावेज़ों से अंदाज़ा लगाते थे कि किसी ख़ास दौर में लोगों को किस तरह की बीमारियां होती थीं. लेकिन, दिक़्क़त ये है कि अलग दौर में डॉक्टर किसी मर्ज़ को अलग-अलग तरह से समझते और लिखते थे. इसलिए आज कंकालों की पड़ताल से हमारी पुराने दौर के लोगों की बीमारियों की समझ बेहतर हुई है.

कंकालों पर किसी धातु का असर भी दिखता है. जैसे कि एक टकसाल के क़रीब के क़ब्रिस्तान से मिले कंकालों पर हरे निशान मिले हैं. जो बताते हैं कि पास ही कोई टकसाल थी. जहां से निकले केमिकल ने क़ब्रिस्तान में दफ़न कंकालों पर असर डाला.

कंकालों के डीएनए टेस्ट से और भी कई बातें सामने आती हैं. जिनकी पड़ताल में वैज्ञानिक जुटे हुए हैं. उम्मीद है कि लंदन के म्यूज़ियम के इस ख़ज़ाने से, इंग्लैंड के इतिहास के कई नए क़िस्से सामने आएंगे.

(अंग्रेज़ी में मूल लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी पर उपलब्ध है.)