चंद मिनटों में घंटों की वर्जिश का फायदा

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Image caption थोड़ी बहुत स्ट्रेचिंग ही कर पाते हैं, तो वो भी ठीक है

अपनी सेहत का ख़याल रखिए. खाने पर ध्यान दीजिए. लंबी और सेहतमंद ज़िंदगी चाहते हैं तो रोज़ वर्ज़िश कीजिए.

ये बातें सुनने में बहुत अच्छी लगती हैं. और लगता है ये तो बड़ा आसान सा काम है, चुटकी बजाते ही हो जाएगा.

लेकिन असल में नियमित रूप से कसरत करना इतना आसान भी नहीं है. क्योंकि हमारे पास खुद के लिए टाइम ही नहीं है.

हम हर वक़्त इतने मसरूफ़ रहते हैं कि सेहत कहीं बहुत पीछे छूट जाती है. पेट भरने के लिए दौड़ते-भागते कुछ खा लेते हैं.

बस इतना ही काफी रहता है. हममें से बहुत से लोग हर बार नए साल की शुरुआत पर ये ठानते हैं कि इस साल तो रोज़ वर्ज़िश के लिए वक़्त निकालेंगे. अपना वज़न इतना घटा लेंगे. अपने शरीर को एकदम फिट बना लेंगे. ना जाने क्या-क्या सोच लेते हैं.

लेकिन ये सारे संकल्प कुछ ही दिनों में हवा हो जाते हैं और हम वापस अपने ढर्रे पर आ जाते हैं.

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Image caption कसरत से शुगर और इंसुलिन का पैमाना दुरुस्त रहता है

वज़न कम करने और फिट शरीर पाने के लिए सबसे ज़्यादा ज़रूरी है इच्छाशक्ति होना.

तो जिन लोगों के पास मज़बूत इच्छाशक्ति नहीं है उनके लिए विज्ञान ने कुछ आसान तरीक़े बता दिए हैं. इन्हें अपनाकर आपको अच्छे नतीजे मिल सकते हैं.

अगर आप कसरत के लिए वक्त नहीं निकाल पाते हैं औऱ थोड़ी बहुत स्ट्रेचिंग ही कर पाते हैं, तो वो भी ठीक है. लेकिन अगर आप ये सोचते हैं कि इतना ही काफ़ी है तो आप गलत हैं. इससे आपके शरीर को बहुत फ़ायदा नहीं होगा.

कोई भी मेहनत वाली एक्सरसाइज करने से पहले और बाद में थोड़ी एरोबिक कसरत भी कर लेनी चाहिए. इससे आपकी कुछ कैलोरी तो खत्म होगी ही, आपके शरीर में गर्मी भी आएगी.

अपने शरीर को सुंदर बनाने के लिए बॉडी बिल्डर अपनी मांसपेशियां बनाते हैं, या, खिलाड़ी बॉडी बनाते हैं, ये एक आम धारणा है. लेकिन ये ग़लत है. हर रोज़ कार्डियोवास्कुलर एक्सरसाइज करने के बहुत से फ़ायदे होते हैं.

इससे आपका शुगर और इंसुलिन का पैमाना दुरुस्त रहता है. कैंसर और टाइप-2 की डायबिटीज़ का खतरा भी कम होता है.

बुज़ुर्गों के लिए तो थोड़ा मांस शरीर पर होना वैसे भी ज़रूरी है क्योंकि बढ़ती उम्र के साथ हड्डियों से मांस हटने लगता है. हर रोज़ कसरत करने से कमर के दर्द और हड्डियों के कमज़ोर होने की बीमारी से लड़ने में मदद मिलती है.

बॉडी बनाने के लिए बाज़ार में तरह तरह के प्रोडक्ट आ गए हैं. ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को रिझाने के लिए कम क़ीमत वाले शेक और दवाएं भी मौजूद हैं. लेकिन वो चॉकलेट मिले दूध से ज़्यादा कुछ नहीं हैं.

अच्छे सप्लीमेंट में भरपूर मात्रा में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और सोडियम होते हैं. इन्हें लेने से कसरत के दौरान होने वाले नुक़सान की भरपाई हो जाती है. शरीर को फिर से जानदार बनने में मदद मिलती हैं.

अगर जिम में घंटों पसीना बहाने के बाद भी आपको कोई फ़ायदा नहीं हो रहा है, तो आपके लिए हाई-इन्टेंसिटी ट्रेनिंग जैसे प्रोग्राम भी मौजूद हैं.

यहां चंद मिनटों की मेहनत से आपको घंटों की रवायती वर्ज़िश जैसे नतीजे मिल सकते हैं. लेकिन इसका फ़ायदा सभी को एक जैसा नहीं मिलता है.

एक तजुर्बे के मुताबिक़, ऐसी हाई-इन्टेंसिटी वर्ज़िश से 15 फीसदी लोगों को फायदा हुआ और 20 फीसद को कोई फायदा नहीं हुआ. ये अंतर हर इंसान के शरीर की बनावट की वजह से होता है.

15 फीसदी लोगों को इन छोटी छोटी कसरत से वही नतीजे मिले जो कुछ लोगों को घंटों मेहनत करने के बाद मिलते थे.

हाई-इन्टेंसिटी ट्रेनिंग कैसे काम करती है? इसके नतीजे हरेक शख्स पर अलग क्यों हैं? ये जानने के लिए एक तजुर्बा किया गया.

इस तजुर्बे में जो लोग शामिल हुए उन्होंने एक हफ़्ते तक रोज 15 मिनट वर्ज़िश की. उनके ब्लड प्रेशर में 16 फ़ीसद गिरावट आई. ख़ून में 17 फ़ीसद तक ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ गई. इससे पता चलता है उनका दिल और फेफड़े कितनी अच्छी तरह से काम कर रहे थे.

बहरहाल सलाह यही दी जाती है कि आप अपनी ज़िंदगी के लिए अपनी मसरूफ़ियत से कुछ पल कसरत के लिए ज़रूर निकालें. क्योंकि जान है तो जहान है.

मौत का एक दिन तय है. वो तभी आएगी जब उसका वक़्त आएगा. लेकिन अगर आपने अपनी सेहत का ख्याल नहीं रखा तो आप मौत आने तक अपने शरीर का बोझ ढोते रहेंगे.

इन बुनियादी बातों के सिवा, विज्ञान हमें फिट रहने में किस तरह से मदद कर सकता है? इस सवाल का जवाब, बीबीसी फ्यूचर के वर्ल्ड चेंजिग आइडियाज़ समिट में तलाशने की कोशिश होगी.

वर्ल्ड चेंजिग आइडियाज़ समिट 15 नवंबर को ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में होगा. वैसे, तब तक आप कसरत करते रह सकते हैं. उससे कोई नुक़सान नहीं.

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