दुनिया बदलने वाले वो 11 आइडिया, पोस्टकार्ड पर

इमेज कॉपीरइट Richard Fisher

इंसान के लिए दुनिया को एक बेहतर जगह बनाने के लिए बहुत सी कोशिशें की जा रही हैं. बड़े-बड़े बुद्धिजीवी और नौजवान नस्ल के लोग इस दिशा में काम कर रहे हैं.

हाल ही में बीबीसी ने सिडनी में वर्ल्ड चेंजिंग आइडियाज़ समिट का आयोजन किया. इसमें विज्ञान, मनोविज्ञान, अंतरिक्ष का सफ़र करने वाले वैज्ञानिकों से लेकर खान-पान के मामलों के माहिर शामिल हुए. दुनिया को कैसे एक बेहतर जगह बनाया जाए, इस पर सभी ने अपनी अपनी राय रखी.

इस शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों को एक पोस्टकार्ड पर अपनी राय लिखने को कहा गया. अब आप कहेंगे जब हम डिजिटल दुनिया में रह रहे हैं, तो, पुराने ज़माने के पोस्टकार्ड क्यों दिए गए.

दरअसल हाथ से लिखे गए शब्दों में एक अपनापन नज़र आता है. पोस्ट कार्ड पर बहुत कम शब्दों में बात लिखी जा सकती है. कम शब्दों में अपनी बात कहना एक उम्दा हुनर है. ये हुनर हरेक के पास नहीं होता.

इमेज कॉपीरइट Richard Fisher

शिखर सम्मेलन में शामिल हुई नताशा कोस्तका लिखती हैं कि हाथ से लिखने की कला से दुनिया को बदला जा सकता है. अच्छी लिखावट एक कला है. भले ही ये कला नई तकनीक के सामने कहीं नहीं टिकती. फिर भी हमें अपनी पुरानी कला को छोड़ना नहीं चाहिए. हालांकि नताशा की राय से बहुत लोग सहमत नहीं थे.

रशेल कारबेरी ने बिजली पैदा करने का एक बड़ा ही अनोखा ख़याल पेश किया. उनके मुताबिक़ जिम सबके लिए आसानी से और मुफ़्त में मुहैया करवा दिए जाएं. कुछ लोगों ने संसाधनों को बचाने के लिए भी ज़ोर दिया. जैसे रिसर्चर वीना सहजवाला का कहना था कि ई-वेस्ट रिसाइकल करने के लिए माइक्रो फैक्ट्री बनाई जाएं.

ताकि, इलेक्ट्रॉनिक मशीनों में इस्तेमाल होने वाली महंगी धातुओं जैसे सोना, प्लैटिनम, चांदी आदि को निकाला जा सके और उनका इस्तेमाल दूसरी चीज़ों के लिए किया जा सके. इनके मुताबिक़ रिसाइकिल किए गए मेटल को बेचने के बजाए लीज़ पर दिया जाए. इस तरह ये कबाड़ वापस खदानों में काम करने वालों के पास जाएगा. अब ये उनकी मर्ज़ी होगी की वो इस कबाड़ को रिसाइकिल करें या फिर खुदाई करके और धातुएं निकालें.

पर्यावरण की चिंता करने वाले कुछ प्रतिभागियों ने सलाह दी कि लंबी दूरी के लिए कार और ट्रकों आवाजाही बंद कर देनी चाहिए. इस से ईंधन की बचत होगी.

इमेज कॉपीरइट Richard Fisher

इस शिखर सम्मेलन में खाना भी एक अहम विषय था. डॉ रोज़मेरी स्टैंटन के मुताबिक़ ऑस्ट्रेलिया दुनिया का ऐसा देश है, जहां सबसे ज़्यादा मीट खाया जाता है. लेकिन हम सभी को फल-सब्ज़ियों का इस्तेमाल ज़्यादा करना चाहिए. क्योंकि, ये पर्यावरण और सेहत दोनों के लिए मुफ़ीद हैं.

बीबीसी टीवी के प्रिज़ेंटर रिचर्ड मोज़ले के मुताबिक़ आठ हफ़्ते तक ब्लड शुगर डाइट लेने से टाइप-2 शुगर पर क़ाबू पाया जा सकता है. रिचर्ड ने खाने पर एक क़िताब भी लिखी है. इसमें उन्होंने कम कार्बोहाइड्रेट वाले समुद्री खानों का ज़िक्र किया है.

कुछ प्रतिभागियों ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि अच्छा खाना खाने की आदत डालना काफ़ी नहीं है. हमें अपने बच्चों को ये बात समझानी होगी कि वो अपनी सेहत के लिए सजग रहें. अच्छी सेहत और तेज़ सेहतमंद दिमाग़ के लिए वर्ज़िश और संतुलित भोजन दोनों ज़रूरी हैं.

शिखर सम्मेलन में बहुत से विषयों पर चर्चा हुई और नए ख़्यालात सामने आए. लेकिन सबसे अहम विषय था विश्व के प्रति इंसान का नज़रिया. इस विषय पर अपने विचार साझा करने के लिए यहां मौजूद थे पूर्व अंतरिक्ष यात्री रोन गरान. वो अमरीका के एरिज़ोना में रहते हैं.

इमेज कॉपीरइट Richard Fisher

लेकिन जब रॉन अपने घर के बारे में सोचते हैं तो वो अंतरिक्ष से नज़र आने वाली धरती को अपना घर मानते हैं. उनका कहना है जब आप अंतरिक्ष से धरती देखते हैं तो वहां से मुल्कों की सरहदें रूकावट जैसी लगती हैं.

दुनिया बदलने के लिए एडम जैकब ने ख़्याल पेश किया कि कुछ वक़्त के लिए सारी दुनिया से मुल्कों की सरहदों को हटा दिया जाए. कुछ वक़्त के लिए सभी को बिना रोक-टोक के एक दूसरे के इलाक़े में जाने दिया जाए. ताकि लोग एक दूसरे को बहतर तरीक़े से समझ सकें.

हालांकि किसी भी सूरत से ये ख़्याल अमल में नहीं लाया जा सकता. लेकिन सैर सपाटे करने के लिहाज़ से ये ख़्याल अच्छा है. अगर हमारे बच्चे कम उम्र से ही एक दूसरे के देश और संस्कृति को जानेंगे तो आपस में मेल-मोहब्बत भी बढ़ेगी. दुनिया को देखने का उनका नज़रिया बदलेगा. और इसमें नई तकनीक जैसे वैब-केम, वीडियो चैट आदि बेहतरीन रोल निभा सकते हैं.

बहरहाल इस शिखर सम्मेलन में बहुत तरह के ख़्यालात सामने आए. जिसमें कुछ सुनकर मज़े लेने वाले थे तो कुछ वाक़ई दुनिया को बदल देने वाले थे.

अंग्रेज़ी में मूल लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. यह बीबीसी उपलब्ध है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)