किसी-किसी के बदन पर बाल क्यों बिलकुल नहीं होते?

किसी के बदन पर घने बाल क्यों होते हैं?

कुछ इंसानों के बाल लंबे और सीधे होते हैं. वहीं, कुछ इंसानों के बाल घुंघराले होते हैं.

कभी आपने सोचा है कि ऐसा क्यों होता है? हर इंसान के बाल अलग क्यों होते हैं? किसी के बदन पर घने बाल होते हैं, तो किसी के शरीर पर एक भी बाल नहीं होते.

अगर आप इस सवाल से परेशान हैं, तो अकेले नहीं हैं. दुनिया भर में बहुत से वैज्ञानिक ऐसे हैं जो इन सवालों के जवाब बरसों से तलाश रहे हैं.

अब तक इसकी कोई ठोस वजह सामने नहीं आई है. मगर वैज्ञानिकों के हाथ एक भेड़ लगी है, जो हमारे इन सवालों के जवाब दे सकती है. ये भेड़ न्यूज़ीलैंड में है, जिसका नाम है शैरॉन.

आम तौर पर भेड़ों के बाल घुंघराले और मोटे होते हैं. मगर शैरॉन नाम की इस भेड़ के बाल सीधे और बेहद चमकदार हैं. और ये भेड़ भी वैज्ञानिकों को इत्तेफ़ाक़न ही मिल गई.

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असल में कुछ दिनों पहले न्यूज़ीलैंड के ओटागो इलाक़े में अजीब तरह का मेमना पैदा हुआ. ये पैदा तो भेड़ से हुआ था, मगर देखने में बकरी जैसा लगता था.

पहले तो ये लगा कि ये भेड़ और बकरी की संकर नस्ल का भेड़ है. मगर जब उसके डीएनए की पड़ताल की गई तो पता चला कि ये असल में भेड़ ही है, जो क़ुदरती वजह से ऐसे पैदा हुई.

भेड़ जिसके बाल हों बकरी जैसे

बरसों से वैज्ञानिक भेड़ों की ऐसी नस्ल की तलाश थी जो हो तो भेड़ जैसी, मगर उसके बाल हों बकरी जैसे सीधे और चमकदार. ऐसा ऊन बहुत काम का हो सकता था.

फिर वैज्ञानिकों ने किसानों से अपील की कि अगर किसी के पास ऐसी भेड़ हो तो उन्हें बताए.

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असल में वैज्ञानिक ऐसी भेड़ों पर तजुर्बे करके इंसानों के बालों की बनावट और हर इंसान के बाल में फ़र्क़ को समझना चाहते हैं.

न्यूज़ीलैंड के रिसर्चर जेफ प्लोमैन कहते हैं कि भेड़ों के बाल घुंघराले होते हैं. वहीं बकरियों के बाल सीधे. लेकिन भेड़ों के बाल तेज़ी से बढ़ते हैं. उन्हें कई बार काटा जा सकता है. वहीं बकरियों के बाल के साथ ऐसा नहीं किया जा सकता.

बकरी से मिलते-जुलते जीन वाली भेड़

अगर ऐसा हो कि भेड़ों के बाल बकरियों जैसे चमकीले और सीधे हों मगर उगें भेड़ों की तरह बार-बार, तो इंसानों का बड़ा फ़ायदा हो जाए. इसीलिए ऐसी भेड़ों की तलाश वैज्ञानिक बरसों से कर रहे थे.

लेकिन, दिक़्क़त ये है कि ऐसी भेड़ें जिनके जीन बकरियों और भेड़ों से मिलते हैं, वो ज़्यादा दिनों तक बच नहीं पातीं, साल भर के भीतर ही उनकी मौत हो जाती है. इसलिए वैज्ञानिकों का रिसर्च ज़्यादा आगे बढ़ नहीं पा रहा था.

अच्छी बात ये रही कि बकरी जैसी दिखने वाली भेड़ की मौत से पहले उसका डीएनए ले लिया गया था. इसके बाद ही वैज्ञानिकों ने विज्ञापन दिया कि जिसके पास भी अलग तरह की भेड़ हो, वो उन्हें ख़बर करे.

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इस तरह शैरॉन नाम की भेड़ की मां का पता चला, जिसका नाम वैज्ञानिकों ने मैक्सीन दिया था.

वो ज़्यादा दिन तक ज़िंदा नहीं रही. मगर उसने शैरॉन नाम के इस मेमने को जन्म दिया. ये मेमना मैक्सीन और एक मैरिनो भेड़ का बच्चा है.

अब शैरॉन को बड़े आराम के माहौल में रखा जा रहा है, ताकि इसे ज़्यादा दिन तक ज़िंदा रखा जा सके और वैज्ञानिक बालों पर रिसर्च को आगे बढ़ा सकें.

कुछ सवालों के ठोस जवाब

बाल ऐसी चीज़ हैं जो आम तौर पर सभी स्तनधारी जीवों में होते हैं. चूहे, भेड़, बकरियां, शेर, बंदर समेत तमाम स्तनधारियों के बाल होते हैं. मगर इन सब जानवरों में भेड़ो के बालों की बनावट इंसान के बालों से सबसे ज़्यादा मिलती है.

इंसानों के घुंघराले या सीधे बाल क्यों होते हैं? खुरदरे या चिकने बाल क्यों होते हैं? पतले या मोटे बाल क्यों होते हैं?

इन सवालों के जवाब बरसों से तलाशे जा रहे हैं. मगर ठोस जवाब अब तक नहीं मिल सका है. अगर इन सवालों के जवाब मिल जाएं, तो हेयर केयर प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनियां ख़ास तरह के बालों के लिए ख़ास प्रोडक्ट बना सकती हैं.

साथ ही कई अपराधों की जांच में भी बालों की बनावट का पता होने से मदद मिल सकती है.

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बालों की बनावट बहुत पेचीदा होती है. कुछ लोगों के बाल गीले होने पर घुंघराले हो जाते हैं. वहीं किसी के बाल धोने के बाद सीधे और चमकदार हो जाते हैं. इसके लिए कौन से जीन ज़िम्मेदार होते हैं, इसका अब तक ठीक तौर पर पता नहीं चला है.

हां, मोटे तौर पर ये ज़रूर मालूम है कि पतले बाल घुंघराले होते हैं. वहीं सीधे बाल मोटे और ख़ुरदरे. ठीक यही हाल मेरीनो भेड़ों का होता है.

इनके बाल बेहद घुंघराले होते हैं. मगर पतले होते हैं. अब अगर वैज्ञानिकों को इसके लिए ज़िम्मेदार जीन का पता चल जाए, तो वो डीएनए में हेर-फेर करके भेड़ों की ऐसी नस्लें पैदा कर सकते हैं, जिनके बाल सीधे और चमकदार हों.

घुंघराले बाल और स्वास्थ्य की दिक्कत

इससे हमें ज़्यादा बेहतर क्वालिटी का ऊन मिल जाएगा. वैज्ञानिक मानते हैं कि हमारे पुरखों के बाल घुंघराले ही होते रहे होंगे.

अचानक ही क़ुदरती वजह, जिसे वैज्ञानिक भाषा में म्यूटेशन या जीन परिवर्तन कहते हैं, उसकी वजह से किसी इंसान के बाल सीधे हो गए. फिर धीरे-धीरे ऐसे बालों वाले इंसान ज़्यादा होने लगे.

उसकी वजह ये थी कि घुंघराले बालों वाले इंसानों को सेहत की कई दिक़्क़तें होती थीं.

अब शैरॉन भेड़ पर वैज्ञानिक तजुर्बों की मदद से इंसान की कई बीमारियों की जड़ का पता चलने की उम्मीद है. साथ ही त्वचा की कई बीमारियों का इलाज भी शैरॉन पर तजुर्बा करके तलाशा जा सकता है.

हालांकि अमरीका में वैज्ञानिक बालों के जीन की बनावट के ज़रिए कुछ सवालों के जवाब तलाश रहे हैं.

मगर अब शैरॉन नाम के इस मेमने में दुनिया भर के वैज्ञानिकों को नई उम्मीद दिख रही है. सबसे बड़ा फ़ायदा तो इस बात का होने वाला है कि सीधे बाल वाली मेरीनो भेड़ों की नस्ल पैदा की जा सकती है.

इसीलिए शैरॉन की काफ़ी ख़ातिरदारी की जा रही है. उसे एयर कंडीशंड बाड़े में रखा जा रहा है. उसके लिए ख़ास जैकेट बनाई गई है, ताकि वो सर्दी से न मर जाए. बाल काटते वक़्त शैरॉन को कितना तनाव होता है, उसकी निगरानी भी होती है.

हमारे बालों में छुपे तमाम राज़ों पर से पर्दा उठाने में शैरॉन काफ़ी कारगर साबित हो सकती है.

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