कई शादी करने से यहां हो रही हैं गंभीर जेनेटिक बीमारियां

सड़क की तस्वीर इमेज कॉपीरइट iStock

इंसान का दिल चंचल होता है. कभी किसी पर आया, कभी किसी पर. समाज में तो एक शादी करके घर बसाने की मान्यता है. मगर तमाम मर्दों और औरतों की ख़्वाहिश होती है कि वो ज़िंदगी में तरह-तरह के तजुर्बे करें. यानी अलग-अलग साथियों के साथ रिश्ते बनाएं और वक़्त गुज़ारें.

मोटे हैं और फ़िट भी, तब भी चिंता कम नहीं

बहुत से मज़हबों में और दुनिया के कई हिस्सों में एक से ज़्यादा शादियां करने का चलन है. हालांकि ज़्यादातर धर्म सिर्फ़ एक ही जीवनसाथी रखने पर ज़ोर देते हैं. लेकिन कई जगहों पर आज भी कई शादियां करने का रिवाज है.

अमरीका में भी दो छोटे-छोटे शहर हैं जहां पर लोग कई शादियां करने की पुरानी परंपरा निभा रहे हैं. इनमें से एक है यूटा सूबे का प्रोवो सिटी तो दूसरा है पास ही स्थित शॉर्ट क्रीक क़स्बा.

इमेज कॉपीरइट iStock
Image caption कोलोराडो शहर में भी रहता है घुमंतू समुदाय

ख़ास तरह की हो रहीं जेनेटिक बीमारियां

यूटा सूबे के प्रोवो सिटी के बाशिंदे एक अजीबो-ग़रीब बीमारी के शिकार हैं. यहां ईसाइयों का ऐसा फ़िरक़ा रहता है जो ईसाई मज़हब की सबसे पुरानी रिवायतों पर अमल करता है.

उन्नीसवीं सदी में यहां के लोग चर्च ऑफ़ जीज़स क्राइस्ट लेटर डे सेंट्स यानी एल.डी.एस के हुक्म को अपना ईमान समझते थे. ये चर्च यहां के लोगों को कई शादियां करने का हुक्म देता था. इस चर्च को चलाने वाले ब्रिंघम यंग की 55 पत्नियां और 59 बच्चे थे. हालांकि बाद में इस प्रथा पर रोक लगा दी गई. लेकिन जब तक ये अमल में रही यहां के लोग मर्ज़ी के मुताबिक़ शादियां करते चले गए.

'लोगों को लगता था कि मुझे सेक्स की लत है'

उन्नीसवीं सदी में यहां के बाशिंदों के एक साथ कई शादियां करने का नतीजा ये शहर अब भुगत रहा है. यहां के लोग एक ख़ास तरह की जेनेटिक बीमारी के शिकार हो रहे हैं. यहां बच्चे दिमाग़ी और जिस्मानी तौर पर विकलांग होने लगे हैं. ये बीमारी इन दुर्लभ है कि चालीस करोड़ लोगों में से किसी एक को होती है.

लेकिन प्रोवो सिटी में ये बीमारी यहां 20 महीने के बच्चे से लेकर 2 साल तक के लगभग सभी बच्चों में थी. इसे फ्यूमरस डेफिशिएंसी कहा जाता है.

वायग्रा का इस्तेमाल करते हों तो ये बातें जान लें

अजीब चेहरा हो जाता है इस बीमारी में

ये आनुवांशिक बीमारी है. यानी एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में जाती है. इस बीमारी में शरीर पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाता है. चेहरे की बनावट भी कुछ अजीब तरह की हो जाती है. माथा बाहर की तरफ़ निकल आता है. आंखें फटी-फटी सी हो जाती हैं. कुछ बच्चे तो बैठने और चलने तक के क़ाबिल नहीं हो पाते हैं.

यूटा की सरहद से सटे इलाक़े शॉर्ट क्रीक के बच्चों में भी इसी बीमारी के लक्षण पाए गए. दरअसल ये वो इलाक़ा है जो बीसवीं सदी में एल.डी.एस फ़िरक़े से अलग हो गया था. लेकिन यहां भी लोग कई शादियां करते थे.

फ़्यूमरस डेफ़िशिएंसी एक ख़ास एंज़ाइम के कमज़ोर होने की वजह से होती है. एंजाइम किसी भी जीव के लिए बहुत ज़रूरी होते हैं. ये शरीर में ऊर्जा के स्तर को बनाए रखते हैं.

इमेज कॉपीरइट iStock
Image caption सॉल्ट लेक सिटी में यूटा

फ्यूमरस एंज़ाइम को ऊर्जा पहुंचाता हैं. लेकिन जब फ़्यूमरस ही कमज़ोर हो जाते हैं, तो एंज़ाइम तक ऊर्जा नहीं पहुंच पाती. हमारे पूरे शरीर के वज़न का सिर्फ़ दो फ़ीसद ही वज़न हमारे दिमाग़ का होता है. लेकिन पूरी शरीर को जितनी ऊर्जा चाहिए उसका बीस फीसद हिस्सा सिर्फ़ दिमाग़ को चाहिए.

मां-बाप के ख़राब जीन से होती है बीमारी

फ़्यूमरस डेफ़िशिएंसी की वजह से जब एंज़ाइम को ऊर्जा नहीं मिलती तो दिमाग़ को भी नहीं मिल पाती. नतीजा ये होता है कि दिमाग़ काम करना बंद कर देता है और शरीर का विकास रूक जाता है.

कुछ की हालत तो इतनी ख़राब हो जाती है कि उन्हें तमाम उम्र खाने की नलियों के सहारे जीना पड़ता है. शरीर पर बैठी मक्खी तक नहीं उड़ा सकते.

क्या आपके वॉशिंग मशीन में भी पत्थर है?

फ़्यूमरस डेफ़िशिएंसी तभी होती है जब कोई बच्चा अपने मां और बाप दोनों से एक-एक ख़राब जीन हासिल कर लेता है. अब शॉर्ट क्रीक में ये बीमारी इतनी ज़्यादा क्यों फैली ये जानने के लिए हमें तारीख़ के पन्नों को पलटना होगा.

असल में कई-कई शादियां करने के चक्कर में प्रोवो सिटी और शॉर्ट क्रीक में एक ही परिवार के कई लोग हो गए. नतीजा ये हुआ कि अक्सर उन दो लोगों में शादियां हो जाती हैं, जिनमें इस बीमारी के जीन होते हैं. इस वजह से यहां होने वाले कई बच्चों को फ्यूमरस डेफिशिएंसी हो गई.

इमेज कॉपीरइट iStock
Image caption माना जाता है चंगेज़ खान की थी बहुत सारी बीवीयां

ख़ानदानी तौर पर जुड़े हैं सभी बच्चे

अब यहां जो भी बच्चे हैं वो ख़ानदानी तौर पर एक-दूसरे से किसी न किसी तरह से जुड़े हुए हैं. मिसाल के तौर पर शॉर्ट क्रीक में दो सरनेम ज़्यादा मिलते हैं. जेसोप और बारलो. मतलब ये कि आज की आबादी का एक बड़ा हिस्सा जेम्स या बारलो का वंशज है.

इतिहासकार बेंजामिन बिस्टलाइन कहते हैं कि शॉर्ट क्रीक में 75 से 80 फीसद आबादी का एक दूसरे से खूनी रिश्ता है. पूरी आबादी में हर दूसरे शख्स के जीन में कोई ना कोई ख़राबी है. बहुत से बच्चे तो बालिग़ होने की उम्र तक पहुंचने से पहले ही ख़त्म हो जाते हैं.

ऐसे लोग सेक्स को एंजॉय नहीं कर पाते

जानकारों का कहना है कि सेहतमंद आबादी बनाने के लिए ज़रूरी है कि शादियां अलग-अलग समुदायों के बीच हों. ताकि मुख़्तलिफ़ जीन के लोग के मिलने से नई नस्ल अलग तरह के जीन के साथ पैदा हो. लेकिन कई बीवियां रखने की वजह से शॉर्ट क्रीक के लोगों का जीन पूल छोटा हो गया है. इसी वजह से क़स्बे के लोग फ्यूमरस डेफिशिएंसी के ज़्यादा शिकार हो रहे हैं.

इमेज कॉपीरइट iStock
Image caption पश्चिमी अफ़्रीका में बहुविवाह है प्रचलित

केन्या में कई शादियों के लिए बिल पास

एक से ज़्यादा बीवियां रखने का चलन अफ़्रीक़ा में भी बहुत बड़े पैमाने पर है. केन्या की संसद ने तो 2014 में बिल पास करके इसके लिए कानून बना दिया है. पश्चिमी अफ़्रीक़ा के बहुत से देशों में तो ये प्रथा हज़ारों साल से चली आ रही है. यहां भी बहुत से लोगों के जीन में ख़राबी पाई गई है.

तो साहब, क़िस्सा मुख़्तसर ये कि बीवियां तो हमेशा दूसरों की अच्छी लगती हैं. मगर, बेहतर हो कि एक से शादी करके उसी से निबाह कीजिए. वरना आपकी आने वाली नस्लें ऐसी गंभीर बीमारियों की शिकार हो सकती हैं.

(मूल लेख अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी फ़्यूचर पर उपलब्ध है.)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

मिलते-जुलते मुद्दे