अब उपग्रहों पर होगी जीवन की खोज!

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Image caption बृहस्पति के चंद्रमा यूरोपा पर हो सकता है जीवन

सितारों के आगे भी क्या दूसरा जहां है? दुनियाभर के अंतरिक्ष वैज्ञानिक इस सवाल का जवाब हमारे-आप के लिए, पूरी दुनिया के लिए, इंसानियत के लिए तलाश कर रहे हैं कि आख़िर ब्रह्मांड में अगर कहीं और ज़िंदगी है, तो वो है कहां?

अब ब्रह्मांड का तो कोई ओर-छोर है नहीं. इसीलिए धरती के आस-पास यानी हमारे सौर मंडल में धरती के सिवा कहीं और ज़िंदगी की तलाश सबसे ज़्यादा तेज़ी से हो रही है. अभी भी सौर मंडल के बहुत से ऐसे राज़ हैं जो नामालूम हैं. इसीलिए वैज्ञानिक उम्मीद से हैं कि सौर मंडल में कहीं और भी ज़िंदगी है.

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सबसे पहले तो इसकी तलाश ग्रहों पर की गई. मंगल ग्रह, धरती के क़रीब है. यहां का माहौल धरती के वायुमंडल जैसा लगता था. इसीलिए सबसे पहले मंगल पर ज़िंदगी की तलाश की गई. कई स्पेस मिशन भेजे गए.

मगर अब मंगल पर जीवन होने की संभावना धूमिल हो चली है. तमाम मार्स मिशन ये संकेत दे रहे हैं कि मंगल पर ज़िंदगी के आसार कम ही हैं.

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Image caption कैसिनी मिशन को नासा ने ख़त्म किया

चंद्रमा पर पानी के सबूत

मंगल के अलावा हमारे सौर मंडल के जो और ग्रह हैं, वो सूरज से इतने दूर हैं. इतने ठंडे हैं कि वहां ज़िंदगी पनपने की गुंजाइश कम लगती है.

तो, वैज्ञानिकों का ध्यान बृहस्पति, शनि और अरुण-वरुण ग्रहों के उपग्रहों यानी चंद्रमा पर ज़िंदगी तलाशने पर गया है.

जब नासा का वोएजर अंतरिक्ष यान शनि ग्रह के चंद्रमा एन्सेलाडस के क़रीब से गुज़रा तो उसे वहां पर पानी के सबूत मिले. बर्फ़ीले माहौल में कई किलोमीटर पानी होने की उम्मीद वोएजर ग्रह ने जगाई, तो नासा ने दूसरा स्पेस मिशन यानी कैसिनी-ह्यूजेंस शनि ग्रह की पड़ताल के लिए रवाना किया.

अब तो कैसिनी मिशन भी नासा ने ख़त्म कर दिया है. ये अंतरिक्ष यान शनि के छल्लों में समा गया है. यानी अब अगर हमें शनि के चंद्रमा एन्सेलाडस पर ज़िंदगी के आसार तलाशने हैं, तो नया मिशन भेजना होगा.

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Image caption शनि ग्रह

ग्रह पर उपग्रह के जीवन की तलाश

नासा और यूरोपीय स्पेस एजेंसी इसकी तैयारी कर भी रहे हैं. कम से कम चार ऐसे मिशन को लेकर चर्चा चल रही है, जो हमारे सौर मंडल में ज़िंदगी की तलाश के लिए भेजे जाएंगे.

नासा के वैज्ञानिक क्रिस मैक्के कहते हैं कि अब ज़ोर मंगल ग्रह के बजाय ग्रहों के उपग्रहों पर जीवन की पड़ताल पर ज़्यादा है.

इसका सबसे बड़ा उम्मीदवार है, शनि का एन्सेलाडस. कैसिनी मिशन ने पता लगाया है कि एन्सेलाडस पर सतह से कई किलोमीटर की गहराई में पानी हो सकता है. इस उपग्रह के माहौल में ज़िंदगी पनपने के लिए ज़रूरी कार्बन, नाइट्रोजन और हाइड्रोजन भी हैं. इसलिए एन्सेलाडस की पड़ताल करने के लिए अगले कुछ सालों में नया मिशन भेजने पर विचार किया जा रहा है.

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इसके अलावा भी अमरीकी स्पेस एजेंसी नासा कुछ धूमकेतुओं, एस्टेरॉयड और ग्रहों की पड़ताल के लिए अंतरिक्ष यान भेजने पर विचार कर रही है. क्रिस मैक्के को लगता है कि इसमें बाज़ी एन्सेलाडस ही मारेगा.

हालांकि सिर्फ़ एन्सेलाडस ही ऐसा उपग्रह नहीं, जिस पर वैज्ञानिकों की निगाह है. बृहस्पति ग्रह के चंद्रमा यूरोपा, कैलिस्टो और गैनीमेड पर भी ज़िंदगी के आसार होने की उम्मीद है. वरुण या नेपच्यून ग्रह के चंद्रमा ट्राइटन के बारे में वैज्ञानिक ऐसी ही अटकलें लगा रहे हैं.

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बृहस्पति के चंद्रमा पर मिशन

आज की तारीख़ मे बृहस्पति का चंद्रमा यूरोपा भविष्य के स्पेस मिशन का सबसे बड़ा लक्ष्य है. साठ के दशक में ही कहा जाता था कि यूरोपा पर ज़िंदगी के आसार हो सकते हैं. मशहूर फंतासी लेखक आर्थर सी. क्लार्क ने तो अपनी एक क़िताब में बर्फ़ की मोटी परत के नीचे भरी-पूरी दुनिया बसी होने की कल्पना भी की थी.

यूरोपा के बारे में कहा जाता है कि बर्फ़ की कई किलोमीटर मोटी परत के भीतर पानी के समंदर और झीलें हैं. नासा के यान गैलीलियो ने 90 के दशक में ही हमें बताया था कि यूरोपा में 15-20 किलोमीटर की गहराई में पानी है.

भले ही अभी एन्सेलाडस की पड़ताल के लिए मिशन भेजे जाने में कुछ साल इंतज़ार करना पड़ेगा. मगर, यूरोपीय स्पेस एजेंसी ने जूस के नाम से एक अंतरिक्ष यान यूरोपा को भेजने की तैयारी शुरू कर दी है. ये स्पेस मिशन 2022 में बृहस्पति के उपग्रहों यूरोपा, कैलिस्टो और गैनीमेड की पड़ताल के लिए रवाना किया जाएगा.

इसी तरह नासा भी यूरोपा क्लिपर के नाम से एक स्पेस मिशन यूरोपा की पड़ताल के लिए भेजने वाला है.

ऐसे स्पेस मिशन के लिए सबसे ज़रूरी चीज़ है ऐसा रोबोट जो बर्फ़ की मोटी परत के भीतर जाकर पानी और ज़िंदगी की तलाश कर सके.

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Image caption बर्फ़ में काम करने वाले रोबोट बनाने होंगे

बर्फ़ में काम करने वाले रोबोट

नासा और यूरोपीय स्पेस एजेंसी अभी इस दिशा में काम कर ही रहे हैं. कई मॉडल टेस्ट किए जा रहे हैं, जो कई किलोमीटर मोटी बर्फ़ की परत के पार जा सकें.

नासा के वैज्ञानिक हरि नायर कहते हैं कि नासा की पासाडेना स्थित जेट प्रोपल्ज़न लैब में कई वैज्ञानिक ऐसा रोबोट रोवर तैयार करने में जुटे हैं, जो बर्फ़ीले माहौल में काम कर सके. नायर कहते हैं कि कुछ ऐसे अंतरिक्ष यान बनाने की तैयारी है, जो इन ठंडे चंद्रमा पर लैंड कर के खुदाई का काम कर सकें.

चुनौती ये है कि सर्द माहौल में काम करने लायक़ रोबोट तैयार किए जाएं. इसके लिए एटमी बैटरी से चलने वाले रोबोट का टेस्ट किया जा रहा है. नायर मानते हैं कि ऐसा रोबोट तैयार करने में 15 से 20 साल लग सकते हैं.

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ब्रह्मांड या हमारे सौर मंडल में ऐसी जगह तलाशना जहां ज़िंदगी पनप रही हो, इंसानियत का सदियों से ख़्वाब रहा है. अगर कोई स्पेस मिशन ऐसा कर पाता है तो वो बहुत बड़ी खोज होगी.

क्रिस मैक्के कहते हैं कि हम जब भी ब्रह्मांड में कहीं और ज़िंदगी की तलाश के बारे में सोचते हैं, तो हमें लगता है कि ऐसा है ही. लेकिन ये ज़रूरी नहीं. फिलहाल तो ऐसे कोई सबूत नहीं मिले हैं.

हां, एक उम्मीद है जिसकी रौशनी में इंसान कभी सौर मंडल में, तो कभी इसके बाहर दूसरी दुनिया की तलाश में जुटा है.

(अंग्रेजी में मूल लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी फ़्यूचर पर उपलब्ध है.)

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