प्राचीन भारत में 'सेक्स' को लेकर खुला था माहौल

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भारत में आम तौर पर सेक्स पर खुलकर बातें करना अजीबो-ग़रीब माना जाता है. सेक्स में लोगों की दिलचस्पी में कोई कमी नहीं, मगर ज़्यादातर भारतीय इस पर चर्चा से बचते हैं. जि्स्मानी ताल्लुक़ को लेकर बातचीत को लेकर ये झिझक आज भारतीय समाज में बेहद आम है.

यही वजह है कि सामान्य यौन संबंध से इतर सेक्सुअल रिलेशनशिप को अपराध माना जाता है. सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में समलैंगिक यौन संबंध को अपराध घोषित किया था. अगस्त 2015 में सरकार ने क़रीब 800 पॉर्न वेबसाइट पर पाबंदी लगा दी थी ताकि बच्चों के ख़िलाफ़ यौन अपराध और यौन हिंसा रोकी जा सके.

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मध्य युग में...

हालांकि इस पाबंदी में बाद में कुछ ढील दी गई थी. सेक्स को लेकर ये झिझक भारत में पिछली कुछ सदियों की देन है. मध्य युग में मुस्लिम शासकों और फिर ब्रिटिश राज के दौरान सेक्स विषय से पर्देदारी की गई. भारत में ताक़तवर ब्राह्मणवादी सोच ने भी इस पर्देदारी को बनाए रखा, बल्कि कई बार तो ये ज़बरदस्ती लागू किया गया.

लेकिन हिंदुस्तान में सेक्स को लेकर ख़यालात हमेशा से ऐसे नहीं थे. ऐसा नहीं था कि भारत में लोग हमेशा ही यौन संबंध को लेकर बात करने से कतराते थे. प्राचीन भारत में यौन संबंधों पर न सिर्फ़ खुलकर चर्चा होती थी, बल्कि सेक्स एक विषय के तौर पर पढ़ाया भी जाता था. तेरहवीं सदी से पहले भारत में सेक्स को लेकर माहौल बेहद खुला था.

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ईसा से चार सदी पूर्व

सेक्स के विषय पर पहला ग्रंथ, 'कामसूत्र' भारत में ईसा से चार सदी पूर्व से लेकर ईसा के बाद की दूसरी सदी के बीच लिखा गया था. प्राचीन भारत में यौन संबंधों को लेकर माहौल कितना खुला था, इसके तमाम सबूत मिलते हैं. मसलन ओडिशा स्थित कोणार्क के सूर्य मंदिर में तराशे हुए नग्न बुत देखने को मिलते हैं.

इसी तरह बुद्ध धर्म से जुड़ी अजंता और एलोरा की गुफ़ाओं में भी युवतियों की नग्न मूर्तियां देखने को मिलती हैं. महाराष्ट्र स्थित अजंता के गुफ़ा चित्र ईसा से दो सदी पहले बनाए गए थे. वहीं एलोरा की कलाकृतियां पांचवीं से दसवीं सदी के बीच की बताई जाती हैं.

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विश्व धरोहर

भारत में सेक्स का खुला चित्रण मध्य प्रदेश के खजुराहो स्थित मंदिरों में देखने को मिलता है. ये मंदिर क़रीब एक हज़ार साल पुराने हैं. इन्हें चंदेल राजाओं ने 950 से 1050 ईस्वी के बीच बनवाया था. उस दौरान कुल 85 मंदिर बनाए गए थे. लेकिन आज इनमें से सिर्फ़ 22 ही बचे हैं. यूनेस्को ने इन्हें 1986 में विश्व की धरोहर घोषित किया था.

इन मंदिरों में यौन संबंधों का हर रूप देखने को मिलता है. औरतों और मर्दों के तराशे हुए नंगे बुत हैं. दीवारों पर तमाम सेक्स पोज़ीशन को उकेरा गया है. यहां पर तीन लोग एक साथ यौन संबंध बनाते हुए देखे जा सकते हैं. तो, एक साथ कई जोड़े यौन उत्सव मनाते भी उकेरे गए हैं.

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मंदिर की नक्काशियों में...

कई नक़्क़ाशियों में तो औरत-मर्द ऐसी सेक्सुअल पोज़ीशन में उकेरे गए हैं, जो सोचने पर असंभव से मालूम होते हैं. दूर-दूर से सैलानी सेक्स के इन मंदिरों को देखने आते हैं. यहां पर देवी-देवताओं, योद्धाओं, संगीतकारों, जानवरों और परिंदों की मूर्तियां भी उकेरी गई हैं.

मंदिर में पूजा करने वाले भी आते हैं और सेक्सुअल पोज़ीशन की कलाकृतियां देखने वाले भी. देवी-देवताओं की मूर्तियों के बीच ही यौन संबंध को खुलकर दर्शाने वाली ये मूर्तियां आज के भारत में देखकर हैरानी होती है. मगर प्राचीन भारत में सेक्स को लेकर ज़्यादा खुलापन था, ये बात ये मंदिर ज़ाहिर करते हैं.

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फाइन आर्ट की पढ़ाई

खजुराहो के मंदिर क़रीब हज़ार साल पुराने हैं. कहा जाता है कि चंदेल राजा तंत्र-मंत्र में यक़ीन रखते थे. तांत्रिक पूजा में मर्द के साथ औरत को भी बराबरी की अहमियत दी गई है. इसीलिए इन राजाओं ने ये मंदिर बनवाए जहां सेक्स को खुलेआम देवी-देवताओं की मूर्तियों के साथ उकेरा गया है.

वैसे कुछ लोग ये भी कहते हैं कि उस दौर में मंदिर, पूजा-पाठ के साथ तालीम के केंद्र भी हुआ करते ते. यहां पर लोग फ़ाइन आर्ट की पढ़ाई भी करने आते थे. इसीलिए यहां यौन संबंध बनाने की कला को खुलकर दर्शाया गया है. सेक्स को नई ज़िंदगी की शुरुआत का शुभ संकेत माना जाता था.

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राजवंश का केंद्र

हिंदू धर्म में सेक्स को ज़िंदगी का अहम हिस्सा माना जाता है. इसी वजह से मंदिर में पूजा-पाठ और युद्ध के मंज़र के बीच सेक्स की तस्वीरें भी उकेरी गई हैं. इन्हें छुपाने की ज़रा भी कोशिश नहीं की गई. यानी किसी को भी इन्हें देखने की आज़ादी थी. ये बात साफ़ नहीं है कि ये मंदिर खजुराहो में क्यों बनाए गए.

खजुराहो किसी राजवंश का केंद्र नहीं था. इन मंदिरों के आज भी बचे रहने की वजह शायद यही थी कि ये सुनसान इलाक़े में दुनिया की नजरों से दूर स्थित थे. 1838 में अंग्रेज़ कैप्टन टी एस बर्ट ने खजुराहो के मंदिरों को खोजा था. कहा जाता है कि कैप्टन बर्ट के हिंदुस्तानी मातहतों ने ही उनसे वहां जाने और मंदिरों को देखने की गुज़ारिश की थी.

धर्म और नैतिकता

राहत की बात ये है कि हाल के दिनों में भारत में तेज़ी से उभरी 'मोरल पुलिस' के हमले से भी ये मंदिर बचे रहे हैं. कई ऐसे संगठन हैं जिन्होंने नैतिकता और धर्म के नाम पर कई कलाकृतियों और क़िताबों को नष्ट कर दिया. इनमें सलमान रुश्दी की क़िताबों से लेकर मक़बूल फ़िदा हुसैन की पेंटिंग्स तक शामिल हैं.

इन पर नग्नता फैलाने के आरोप लगाकर विरोध किया गया. यहां घूमने आने वालों को गाइड खुलकर इन नग्न मूर्तियों के बारे में बताते हैं. लोग इन बातों को ख़ूब दिलचस्पी लेकर सुनते हैं. ख़ास तौर से कंदरिया महादेव मंदिर के बारे में. किसी को भी सेक्स को दर्शाने वाले इन मंदिरों से एतराज़ करते नहीं देखा जाता.

न ही इन्हें देखकर लोग छुप-छुपकर हंसते हैं, न ही इनका मज़ाक़ उड़ाते हैं. शायद इन्हें लोग धार्मिक नज़रिए से देखते हैं, इसीलिए इनका विरोध नहीं होता. खजुराहो के ये मंदिर भारत की सहिष्णुता और संस्कृति के सबसे बड़े गवाह हैं.

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