दुनिया के दो देशों की इस दोस्ती को जानते हैं?

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आपने दोस्ती की कई मिसालें सुनी होंगी, कई क़िस्से पढ़े होंगे. पर, आज हम आपको दोस्ती की बिल्कुल ही अलग कहानी सुनाते हैं.

इसके लिए आपको हमारे साथ पूर्वी यूरोप की सैर पर चलना होगा.

दोस्ती का ये क़िस्सा है यूरोप के दो देशों के बीच का. दो ऐसे देश, जिनकी सीमाएं भी एक-दूसरे से नहीं मिलतीं. मगर इनके बीच कई सौ सालों से पक्की दोस्ती है.

ये दो दोस्त देश हैं हंगरी और पोलैंड. इन देशों के बारे में कहा जाता है कि-हंगरी और पोलैंड दो भाई हैं. ये साथ मिलकर लड़ाई करते हैं और साथ ही मौज-मस्ती करते हैं.

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दोनों देशों के बीच इस कदर पक्की दोस्ती है कि 23 मार्च को हंगरी और पोलैंड अपनी दोस्ती का फ्रेंडशिप डे मनाते हैं. ये दिन, दोनों ही देशों में राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया गया है.

'दोनों देशों की जड़ें एक ही हैं'

ये दोस्ती बेहद दिलचस्प है. आज जब दुनिया के तमाम मुल्क़ आपस में लड़ते-भिड़ते रहते हैं, तो हंगरी और पोलैंड ने दोस्ताना ताल्लुक़ की ज़बरदस्त मिसाल पेश की है.

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हंगरी के लोग अगर पोलैंड जाते हैं, तो बस उन्हें अपने देश का झंडा दिखाना होता है. फिर तो पोलैंड के लोग उनकी डटकर मेहमाननवाज़ी करते हैं.

हंगरी की पन्नोनिया यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर गैबोर लैग्ज़ी, पोलैंड के मामलों के जानकार हैं. प्रोफ़ेसर गैबोर बताते हैं कि हंगरी और पोलैंड एक ही पेड़ की दो शाखाएं हैं. दोनों की जड़ें एक ही हैं. दोनों देशों के बीच पिछले एक हज़ार सालों से गहरा सियासी, आर्थिक और सांस्कृतिक नाता रहा है.

प्रोफ़ेसर गैबोर कहते हैं कि इसकी बड़ी वजह ये रही कि सदियों पहले एक ही राजवंश ने दोनों देशों पर राज किया था.

14वीं सदी में हंगरी के राजा लुई महान को पोलैंड का ताज उस वक्त मिला, जब उनके मामा की मौत हो गई. लुई के मामा राजा कासीमिर तृतीय पोलैंड के राजा था. उनके कोई औलाद नहीं थी.

दादा बेम का योगदान

इसीलिए कासिमिर की मौत के बाद हंगरी के राजा लुई, पोलैंड के भी राजा बन गए. लुई महान की मौत के बाद उनकी बेटी जैडविगा, पोलैंड की पहली महारानी बनी. आज भी जैडविगा का नाम बड़े आदर से लिया जाता है.

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1576 में पोलैंड के लोगों ने हंगरी के राजकुमार इस्तवान बथोरी को अपना राजा चुना था. प्रोफ़ेसर गैबोर कहते हैं कि हंगरी और पोलैंड में केवल राजशाही का रिश्ता नहीं था. यहां के आम लोग भी एक दूसरे से जुड़े हुए थे.

1848 में जब हंगरी ने ऑस्ट्रिया के ख़िलाफ़ बग़ावत की, तो उसकी तरफ़ से लड़ने वालों में पोलैंड के महान जनरल जोसेफ बेम भी थे. उन्हें हंगरी के लोग आज भी दादा बेम के नाम से याद करते हैं.

जनरल बेम ने रूस के ख़िलाफ़ 1830 में पोलैंड की तरफ़ से लड़ाई की थी. फिर 1848 में वो ऑस्ट्रिया के ख़िलाफ़ हंगरी की तरफ से लड़े. दोनों ही देशों में जनरल बेम एक हीरो के तौर पर याद किए जाते हैं. जनरल बेम के अलावा भी पोलैंड के बहुत से योद्धाओं ने हंगरी की तरफ से लड़ाईयां लड़ीं.

मध्य काल में दोनों देशों के लोग एक दूसरे से शादी ब्याह के ज़रिए भी जुड़े हुए थे. दूसरे विश्व युद्ध के दौरान हंगरी और पोलैंड अलग-अलग खेमों में थे, फिर भी दोनों की दोस्ती अटूट रही. इसमें कड़वाहट नहीं आई.

जर्मनी का आतंक

दूसरे विश्व युद्ध में हंगरी जहां जर्मनी के साथ था, वहीं पोलैंड मित्र देशों यानी ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और अमरीका के साथ था. 1939 में जब पोलैंड पर जर्मनी ने कब्जा कर लिया, तो वहां के दस हज़ार लोगों को हंगरी ने अपने यहां पनाह दी थी. इस बात से जर्मनी नाराज़ भी हुआ था.

1944 में जब हंगरी ने मित्र देशों के साथ शांति के लिए बात शुरू की तो इससे भड़के जर्मनी ने हंगरी पर भी कहर बरपाना शुरू कर दिया था. ख़ास तौर से यहूदी और रोमा आबादी को जर्मनी के जुल्म का शिकार होना पड़ा था.

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इसी तरह 1956 में जब हंगरी ने सोवियत संघ की दखलंदाज़ी के खिलाफ बगावत की, तो, पोलैंड ने हंगरी के लोगों का खुलकर साथ दिया था. उन्होंने लड़ाई के लिए हथियार और दूसरे साजो-सामान हंगरी भेजे थे. पोलैंड के हज़ारों लोगों ने हंगरी के घायलों को ख़ून दिया था.

2016 में इस बगावत की 60वीं सालगिरह पर हंगरी ने इसे पोलैंड के साथ दोस्ती के साल के तौर पर मनाया था.

प्रोफ़ेसर गैबोर कहते हैं कि दोनों देशों के अवाम एक दूसरे को इतना पसंद करते हैं कि वहां की सरकारें भी दोस्ताना ताल्लुक बनाए रखने को मज़बूर होती हैं. तमाम सियासी दल भी अवाम की राय का एहतेराम करते हैं.

दोस्ती की वजह क्या है?

भले ही हंगरी और पोलैंड में तमाम सियासी दलों के बीच गहरी खाई है. पर, जब दोनों देशों के बीच दोस्ती की बात आती है, तो सभी सियासी दल भी एकजुट हो जाते हैं. इसीलिए जब 23 मार्च को दोनों देशों की दोस्ती के दिन के तौर पर मनाने का प्रस्ताव आया, तो दोनों ही देशों की संसद में बिना किसी विरोध के ये प्रस्ताव पारित हो गया.

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हंगरी के ग्योर और पोलैंड के पोन्ज़ान शहर में दोस्ती का ये दिन बड़े उत्साह से मनाया जाता है.

हंगरी और पोलैंड के लोग एक दूसरे को क्यों इतना पसंद करते हैं? इनकी दोस्ती का राज़ क्या है? इन सवालों के जवाब पक्के तौर पर नहीं दिए जा सकते.

हां, हंगरी और पोलैंड के लोग ये ज़रूर कहते हैं-ये दोस्ती...हम नहीं तोड़ेंगे...वो ख़ुद को BFF यानी सदा के सच्चे दोस्त बताते हैं.

(मूल लेख अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी ट्रैवल पर उपलब्ध है.)

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