बरमूडा ट्राएंगल के ग़ायब जहाज देखे हैं?

बरमूडा का नाम सुनते ही हमारे ज़हन में बरमूडा के रहस्यमयी त्रिकोण या 'बरमूडा ट्राएंगल' का ख़याल आता है, जहां पर सैकड़ों जहाज़ और विमान लापता हो चुके हैं.

कैरेबियन सागर में मोतियों जैसे बिखरे ये द्वीप महज़ 26 वर्ग मील के दायरे में फैले हैं. मगर इनके चारों तरफ क़रीब दो सौ वर्ग मील में कोरल रीफ़ यानी मूंगे की चट्टानें हैं.

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बरमूडा एक ब्रिटिश उपनिवेश है. यहां का मुख्य कारोबार टूरिज़्म है. इसके समुद्री किनारे और मूंगे की चट्टानें दुनिया भर से लोगों को लुभाती हैं.

मगर ये इलाक़ा समुद्री सफ़र के लिए बेहद ख़तरनाक है. बरमूडा के पास का जो इलाक़ा है वहां समंदर के सीने में सैकड़ों डूबे जहाज़ों के मलबे हैं.

मूंगे की चट्टानें

दुनिया भर में डूबे जहाज़ों के मलबे की सबसे बड़ी तादाद यहां मिलती है.

बरमूडा के आस-पास के इलाक़ों में लोग समंदर में डुबकी लगाकर इन मलबों और मूंगे की चट्टानों को देखने के लिए आते हैं.

अब जो लोग यहां नहीं आ पाते, उनके लिए यहां की ख़ूबसूरती और समंदर में छुपे राज़ अनदेखे ही रह जाते हैं.

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लेकिन अब वैज्ञानिकों ने बरमूडा के पास समुद्र में डूबे जहाज़ों की तस्वीरें बाक़ी दुनिया तक पहुंचाने के लिए नया प्रोजेक्ट शुरू किया है.

ये वैज्ञानिक समुद्र के भीतर जाकर मलबों की 3-D तस्वीरें बना रहे हैं, जिनकी मदद से फिर मलबों की नक़ल तैयार की जाएगी, ताकि वो लोग भी इसे देख सकें, जो बरमूडा नहीं आ पाते.

इसकी शुरुआत हुई है, बरमूडा के पास डूबे अमरीकी जहाज़ मोंटाना से, क़रीब सत्तर मीटर लंबा ये जहाज़ 1863 में डूबा था.

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डेढ़ सौ साल से पुराने मलबे

जब अमरीका में गृह युद्ध हो रहा था, तो ये बाग़ी राज्यों के लिए सामान की सप्लाई करने के काम में लाया जाता था.

अब इस जहाज़ के समुद्र के भीतर क़रीब डेढ़ सौ साल से पड़े मलबे की 3-D तस्वीरें बनाई जा रही हैं.

इनकी मदद से इस जहाज़ की डिजिटल नक़ल तैयार की जाएगी.

इस रिपोर्ट को तैयार करने वाले एडे एडेप्शियन कहते हैं कि समंदर में डुबकी लगाकर मलबा देखना बेहद रोमांचकारी तजुर्बा है.

आप लहरों के नीचे, इतिहास को देख रहे हैं. वो इतिहास जो डेढ़ सौ सालों से यूं ही पड़ा हुआ है. जिस पर तमाम समुद्री जीवों ने अपना डेरा बना लिया है.

इस प्रोजेक्ट से जुड़े डॉक्टर फिलिप रोउजा कहते हैं कि मोंटाना बेहद विशाल जहाज़ था. इसके पहिए, इसके ब्वॉयलर, इसकी विशालता की गवाही देते हैं.

उन्होंने तो डुबकी लगाकर इस जहाज़ के मलबे को देखने का दिलचस्प तजुर्बा कर लिया.

अब फोटोग्रामेट्री नाम की तकनीक की मदद से इस मलबे की जो तस्वीरें निकाली जा रही हैं, उनसे इस जहाज़ के मलबे की डिजिटल नक़ल तैयार की जाएगी. इसे आने वाली नस्लें भी दे सकती हैं.

इस इलाक़े में जहाज़ों के सैकड़ों मलबे हैं. लेकिन हर कोई तो यहां डुबकी लगाकर इन्हें नहीं देख सकता. मगर अब नए प्रोजेक्ट की मदद से दुनिया इन मलबों को देख सकेगी.

(अंग्रेजी में मूल लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी पर उपलब्ध है.)

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