वो शहर जिसने दुनिया को अपने पहाड़ बेच डाले

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स्विट्ज़रलैंड की ख़ूबसूरती से कौन वाक़िफ़ नहीं? ठंडे मौसम औऱ बर्फ़बारी के श़ौकीन लोगों का तो सपना होता है कि उन्हें यहां कुछ पल बिताने का मौक़ा मिल जाए. बॉलीवुड ने यहां की ख़ूबसूरती को ख़ूब इस्तेमाल किया है.

स्विट्ज़रलैंड, बॉलीवुड के मशहूर फ़िल्म डायरेक्टर यश चोपड़ा की पहली पसंद था. उनकी कोशिश होती थी कि अपनी फ़िल्म का कम से कम एक गाना तो वो यहां ज़रूर शूट करें. शायद उनकी फ़िल्मों से ही आम भारतीयों ने स्विट्ज़रलैंड को ज़्यादा क़रीब से जाना.

स्विट्ज़रलैंड में भी एक ऐसी जगह है जिसके बारे में शायद आप नहीं जानते. उसका नाम है. सेंट मॉरिट्स. ये अल्पाइन पर्वतों पर स्थित स्विट्ज़रलैंड का रिज़ॉर्ट टाउन है. यहां साल भर बर्फ़ की मोटी चादर बिछी रहती है. लोग यहां ना सिर्फ़ स्कीईंग के लिए आते हैं, बल्कि इसकी पहचान विंटर टूरिज़्म रिज़ॉर्ट के तौर पर भी है.

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क्यों मशहूर हुआ सेंट मॉरिट्स?

सेंट मॉरिट्स इतना मशहूर कैसे हुआ, इसके पीछे एक बड़ी दिलचस्प कहानी है. क़िस्सा 1864 का है.

एक दिन एन्गाडिनर कुल्म होटल के मालिक योहानिस बैड्रट, लंदन से स्विटज़रलैंड घूमने आए अमीर कारोबारियों के साथ बैठे थे. बातों का दौर चल रहा था. इन्हीं में से कुछ ने कहा कि लंदन की जानलेवा सर्दी लौटने वाली है. इस पर होटल के मालिक योहानिस ने कहा कि जनाब आप यहां पहाड़ों में आकर सर्दियां गुज़ारें. सेंट मॉरिट्स में बर्फ़बारी का मज़ा लीजिए. यहां सर्दी का मौसम बहुत शानदार होता है. भरी सर्दी में भी आप यहां बिना जैकेट के रह सकते हैं.

लंदन से आए कारोबारियों का समूह ये बात मानने को राज़ी नहीं था. बस इसी बात पर शर्त लग गई कि अगर होटल के मालिक का दावा ग़लत साबित हुआ तो उसे पूरी सर्दी यहां रहने और सफ़र का सारा ख़र्च उठाना होगा.

व्यापारियों और सैलानियों का ये ग्रुप उसी साल दिसंबर के महीने में यहां फिर से आया. शर्त के मुताबिक़ इन सभी को हफ़्ते भर के सफ़र पर निकलना था. सभी सिर से लेकर पैर तक फ़र के कपड़ों में लिपटे थे. तय पाया गया था कि पहाड़ों पर 2,284 मीटर की दूरी तय करके ये सभी जूलियर पास पहुंचेंगे.

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बर्फ़ के बावजूद पसीना आने लगा

लेकिन सेंट मॉरिट्स तक पहुंचते ही आसमान एक दम साफ़ हो गया. सभी को पसीने आने लगे और जैकेट उतारने पड़े. होटल का मालिक योहानिस शर्त जीत चुका था.

इसी के साथ सेंट मॉरिट्स के बेहतरीन मौसम के क़िस्से भी लोगों की ज़ुबान पर आने लगे. दूर तक बिछी बर्फ़ की सफ़ेद चादर और खिलते हुए सूरज का मज़ा लेने के लिए दूर-दूर से सैलानी यहां आने लगे.

यहां सैलानियों की तादाद इतनी बढ़ी कि बड़े-बड़े होटल खुलने लगे. 1896 में योहानिस बैड्रट के बेटे कैस्पर ने अपने पिता के नाम पर एक फ़ाइव स्टार होटल खोला जिसका नाम रखा, 'बैड्रट पैलेस'.

इस होटल के मैनेजर का कहना है कि कुछ लोग शर्त वाली बात को महज़ एक कहानी मानते हैं. लेकिन ऐसा हक़ीक़त में हुआ था. इस शर्त से पहले लोग यहां सिर्फ़ गर्मी के मौसम में ही आते थे.

सेंट मॉरिट्स की एक टूरिस्ट प्लेस के तौर पर मार्किटिंग का श्रेय पूरी तरह से योहानि बैड्रट को जाता है. जिस साल योहानिस ने शर्त लगाई थी, उसी साल स्विट्ज़रलैंड में पहला टूरिस्ट ऑफ़िस खुला.

इस जगह से जुड़ी एक और कहानी है.

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कमला नेहरू भी इलाज के लिए आईं

कहा जाता है कि 1861 में यहां एक पादरी ईसा मसीह का संदेश फैलाने के इरादे से आया था. जब वो वापस इंग्लैंड गया तो उसने स्विट्ज़रलैंड की तारीफ़ में एक ब्रिटिश अख़बार को ख़त लिखा. ख़त में उसने लिखा की सर्दियां बिताने के लिए ये एक बेहतरीन जगह है.

हालांकि उस दौर में भी कुछ स्विस इलाक़े अच्छे व्यापारिक केंद्र के तौर पर काम कर रहे थे.

दावोस, अरोसा और लुसान ऐसे इलाक़े थे जहां बड़े-बड़े सनोटोरियम खोले गए थे. इन्हीं में से एक में बीसवीं सदी की शुरुआत में पंडित नेहरू की पत्नी कमला नेहरू भी इलाज के लिए आई थीं.

यहां सांस की बीमारियों और टीबी का इलाज बड़े पैमाने पर किया जाता था. लेकिन पादरी का ख़त अख़बार में छप जाने से इस इलाक़े की शोहरत और फैल गई.

1880 तक ब्रितानी सैलानियों की तादाद इतनी ज़्यादा बढ़ गई कि अंग्रेज़ी बोलने वालों के लिए यहां से एक स्थानीय अख़बार छपने लगा. अख़बार का नाम था 'एनगाडिनर एक्सप्रेस एंड अल्पाइन'.

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आधुनिकता का लिबास 21वीं सदी से पहली ही ओढ़ा

इसके अलावा और भी ऐसी बहुत सी बातें और चीज़ें थीं जो यहां पहली बार हुई थीं. बैड्रट की कोशिशों से पहले तक यहां सिर्फ 75 सैलानियों के रहने का इंतज़ाम था. लेकिन धीरे-धीरे यहां सुविधाएं बढ़ाई गईं.

अगले 40 सालों में यहां दो हज़ार से ज़्यादा सैलानियों के रहने का इंताज़ाम हो गया. बैड्रट ने इस इलाक़े के आधुनिकीकरण के लिए भी बहुत कोशिशें कीं. 1879 में स्विट्ज़रलैंड में पहली इलेक्ट्रिक लाइट और स्ट्रीट लाइट एनगाडिनर कुल्म में ही लगाई गई थी.

इसी साल स्विट्ज़रलैंड में पहली बार फ्लश वाले टॉयलेट और पहला पनबिजली प्लांट लगाया गया था. 1882 तक आते-आते यहां आईस स्केटिंग के मुक़ाबले होने लगे. यूरोप में होने वाली ये पहली ऐसी प्रतियोगिता थी.

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सेंट मॉरिट्स की कहानी किसी इलाक़े के आमूल-चूल बदलाव की बड़ी मिसाल है.

2018 के सीज़न में यहां नौवां फाइव स्टार होटल खुलने वाला है. अब यहां की अर्थव्यवस्था में विदेशी कंपनियों ने भी दिलचस्पी लेनी शुरू कर दी है.

लेकिन जो बात यहां के पारंपरिक होटलों में है वो कहीं और नहीं.

मिस्र के पिरामिड की तरह बर्फ़ से ढके यहां के पहाड़ और मैदानों में बिछी सफ़ेद चांदनी का लुत्फ़ लेने का जो मज़ा यहां है वो कहीं और नहीं. इसका सेहरा पूरी तरह से योहानिस बैड्रट के सिर सजता है.

(बीबीसी ट्रैवल पर मूल लेख अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)

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