गुरुग्रामः मस्जिद सील होने के बाद क्या था इलाक़े का माहौल?

  • 15 सितंबर 2018
मस्जिद, गुरुग्राम, हिंदू-मुस्लिम

हरियाणा के गुरुग्राम मंडल आयुक्त ने सेक्टर 5 के शीतला माता कॉलोनी स्थित मस्जिद का सील खोलने के आदेश दिए हैं.

दो दिनों पहले मस्जिद को नगर निगम ने ये कहकर सील कर दिया था कि इसका निर्माण अवैध रूप से किया गया और पास में ही वायु सेना का डिपो भी है.

बीबीसी से बात करते हुए गुरुग्राम के आयुक्त डी सुरेश ने कहा कि मस्जिद को सील करने की पहल ग़लत थी.

सील करने से पहले नगर निगम ने मस्जिद कमिटी को न नोटिस दिया था और न ही मौखिक रूप से कुछ कहा था.

हलाकि शुक्रवार की नमाज़ मस्जिद में नहीं हो पायी क्योंकि समाज के हर वर्ग के प्रतिनिधियों के साथ आयुक्त ने बैठक की थी.

इस बैठक में जिलाधिकारी सहित सरकारी अमले के वरिष्ठ लोग और नूह के विधायक ज़ाकिर हुसैन भी शामिल थे.

Image caption गुरुग्राम के आयुक्त डी सुरेश

एकता और संयम का दिया परिचय

डी सुरेश ने कहा कि गुरुग्राम की छवि बिगड़ने की कोशिश की गई मगर यहाँ के लोग हमेशा आपस में मिलजुलकर ही रहते आए हैं.

उनका कहना था कि माहौल बिगाड़ने की कोशिश लोगों ने आपस में मिलकर ही विफल की है.

गुरुग्राम का सेक्टर 5 अपने आप में एक अलग मिसाल है क्योंकि इस इलाक़े में मस्जिद चर्च और मंदिर एक साथ हैं.

नागरिक एकता मंच के प्रतिनिधि और गुरुग्राम के निवासी राहुल ने आयुक्त के साथ हुई बैठक के बाद कहा कि हर समाज में कुछ बुरे लोग होते हैं जो माहौल ख़राब करने की कोशिश करते हैं.

मगर गुरुग्राम महानगरों के जैसा ही है, जहां इतनी सारी कंपनियां हैं और जहां देश के विभिन्न इलाक़ों से लोग आकर यहां काम करते हैं.

सेक्टर 5 में पुलिस बल का भारी बंदोबस्त की गई है. दो दिनों पहले जब मस्जिद को सील किया गया तो स्थानीय लोग वहीं धरने पर बैठ गए थे.

लोगों का कहना था कि बिना किसी सूचना के मस्जिद को सील कर दिया गया था.

गुरुग्राम नगर निगम का तर्क है कि वायुसेना का डिपो करीब है और उसके 300 मीटर के दायरे में कोई अवैध निर्माण नहीं किया जा सकता है, इसलिए कुल मिलाकर 11 भवनों को सील किया गया जिसमें मस्जिद भी शामिल है.

मगर यहां के रहने वाले लोग कहते हैं कि नगर निगम का ये क़दम उन संगठनों के दबाव में लिया गया जो मस्जिद में लाउडस्पीकर और सड़क पर नमाज़ पढ़ने का विरोध करते रहे हैं.

शुक्रवार सवेरे गुरुग्राम का जिला प्रशासन हरकत में आया और उसने समाहरणालय के पास मस्जिद का विरोध करने वाले 'भारत बचाओ संगठन' के धरना दे रहे सदस्यों को जबरन हटाया.

उसी तरह मस्जिद में तालाबंदी के ख़िलाफ़ धरना दे रहे लोगों को भी वहां से हटा दिया गया.

प्रशासन को आशंका थी कि शुक्रवार को नमाज़ पढ़ने वाले और विरोध करने वालों के बीच तनाव हो सकता है. मगर प्रशासन की पहल के बाद गुरुग्राम में शांति बनी रही.

वहीं मस्जिद के पास ही स्थित शीतला माता मंदिर के प्रांगण में कुछ लोग खाना बनाने में व्यस्त थे.

इस मोहल्ले में हिन्दू, मुस्लिम और ईसाई रहते हैं.

एक-दूसरे के त्योहारों में शामिल होते रहे हैं हिंदू-मुस्लिम

मोहल्ले के मुहाने पर तैनात पुलिसकर्मी किसी को उस रास्ते पर आने नहीं दे रहे हैं. दुसरे रास्ते से हम किसी तरह मस्जिद के पास पहुंचे.

वहाँ कोने पर हिन्दुओं के घर हैं.

हमें देखते ही उन्होंने 'राम सलाम' किया और पीने का पानी लेकर आये.

थोड़ी देर में मंदिर में बन रही पूरी और सब्ज़ी भी आ गयी. हमने हिंदू परिवारों के साथ बाहर बैठकर खाना शुरू किया.

यहां के रहने वाले बताते हैं कि मस्जिद के आसपास के लोग दशकों से वहां रह रहे हैं. हिन्दू, मुसलमान और ईसाई, सभी समुदाय के लोग वहां मिल जाएंगे पर इन सभी में आपस में कभी बैर नहीं रही है.

एक स्थानीय हिन्दू नागरिक का कहना था, "यहां तो कुछ नहीं हुआ. मगर बाहर वाले ज़्यादा दिलचस्पी ले रहे हैं. हमें किसी से कोई शिकायत नहीं रही है. पर्व-त्योहार भी हम आपस में मिलकर ही मनाते हैं."

इलाक़े के बुज़ुर्ग हाजी अलीन ख़ान बताते हैं कि हिंदू पर्व-त्योहारों में मुसलमान भी शामिल होते रहे हैं.

Image caption हाजी अलीन ख़ान

उनका कहना था: "मैं ख़ुद गौशाला में पैसे देता हूँ. यहां के मंदिर में जब भी जागरण होता है तो हम उसमे ख़ुद शामिल होते हैं. इस जगह का नाम ही शीतला माता कॉलोनी है. बाहर वाले माहौल बिगाड़ रहे हैं."

इमरान क़ुरेशी और यूनुस भी गुरुग्राम में ही पैदा हुए और यहीं रहते आ रहे हैं. वो कहते हैं कि कुछ तत्व मुसलामानों के बीच भी ऐसे हैं जिन्हे यहां की मस्जिद से कोई लेना देना नहीं है.

वो कहते हैं,"मगर मस्जिद के नाम पर कुछ लोग नेतागिरी करने से बाज़ नहीं आ रहे हैं. ये वही लोग हैं जो माहौल ख़राब करने की कोशिश कर रहे हैं."

नूह के विधायक ज़ाकिर हुसैन भी उस बैठक में शामिल थे जो मंडल आयुक्त ने बुलाई थी. वो भी कहते हैं कि गुरुग्राम में कभी भी सम्प्रदायों के बीच तनाव नहीं रहा है.

जहाँ तक रही बात मस्जिद को सील करने की, वो सरकार और प्रशासन के पहल की तारीफ़ करते हुए कहते हैं कि अधिकारियों और प्रबुद्ध नागरिकों ने माहौल को ख़राब होने से बचा लिया.

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