पाकिस्तान के सारे आरोप बेबुनियाद और झूठ पर आधारित हैं: भारत

  • 10 सितंबर 2019
पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी इमेज कॉपीरइट Getty Images
Image caption पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी

पाकिस्तान ने कहा है कि भारत प्रशासित कश्मीर के 80 लाख लोग पिछले छह हफ़्तों से क़ैद में रह रहे हैं.

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचसीआर) की जिनेवा में मंगलवार को हुई बैठक में भारत पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, ''दशकों से भारतीय दमन के शिकार क़रीब 80 लाख कश्मीरी भारतीय सेना के ग़ैर-क़ानूनी क़ब्ज़े के कारण पिछले छह हफ़्तों से पूरी तरह से क़ैद में रह रहे हैं.''

क़ुरैशी के अनुसार कश्मीर घाटी में केवल कुछ ही दिनों में भारतीय सेना की संख्या सात लाख से बढ़ाकर क़रीब 10 लाख कर दी गई है.

भारत ने पाँच अगस्त को जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले संवैधानिक प्रावधान अनुच्छेद 370 को समाप्त करने की घोषणा की थी. उसके बाद भारत सरकार ने सुरक्षा का हवाला देते हुए पूरी घाटी को तक़रीबन बंद कर रखा है. इंटरनेट, मोबाइल, लैंडलाइन पर पाबंदी लगी हुई है. ज़्यादातर इलाक़ों में धारा 144 लागू है.

पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने कहा कि भारत ख़ुद को लोकतंत्र, संघवाद और धर्म-निरपेक्षता का गढ़ होने का दावा करता है लेकिन वो जो कश्मीर में कर रहा है वही उसका असली चेहरा है.

इमेज कॉपीरइट MEA/TWITTER

लेकिन भारत ने पाकिस्तान के इन तमाम आरोपों को ख़ारिज कर दिया है.

यूएनएचसीआर की बैठक में पाकिस्तानी विदेश मंत्री के वक्तव्य का जवाब देते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय की सचिव (पूर्व) विजय ठाकुर सिंह ने कहा कि भारत ने कश्मीर को लेकर जो फ़ैसला किया है वो संसद में बहस के बाद लागू हुआ है.

उनका कहना था, ''अनुच्छेद 370 को ख़त्म करने का फ़ैसला हमारी संसद के ज़रिए लिया गया था. ये एक स्ततंत्र देश का लिया गया फ़ैसला है जो पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला है. कश्मीर में बुनियादी सेवाएं धीरे-धीरे बहाल की जा रही हैं. मेरी सरकार सामाजिक एंव आर्थिक समानता और न्याय के लिए प्रगतिशील नीतियां अपनाकर सकारात्मक क़दम उठा रही है.''

उन्होंने पाकिस्तान को वैश्विक आतंकवाद का केंद्र बताया और कहा कि पाकिस्तान जितने आरोप लगा रहा है, वो बेबुनियाद और झूठ पर आधारित हैं. उन्होंने कहा कि कश्मीर में जो पाबंदियां लगाई गई हैं, वो सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लागू की गईं हैं.

इमेज कॉपीरइट Getty Images
Image caption पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी

'धरती की सबसे बड़ी जेल'

इससे पहले पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने परिषद की बैठक में कहा कि पिछले छह हफ़्तों में भारत ने जम्मू-कश्मीर को इस धरती की सबसे बड़ी जेल में तब्दील कर दिया है जिसमें लोगों को न तो बुनियादी सुविधाएं मिल रही हैं और न ही उनका बाहरी दुनिया से कोई संपर्क हो पा रहा है.

उनके अनुसार लोगों को इमरजेंसी स्वास्थ्य सुविधाएं भी नहीं मिल रही हैं. क़ुरैशी ने कहा कि कश्मीर के राजनेताओं समेत क़रीब छह हज़ार लोग बिना किसी क़ानूनी प्रावधान के गिरफ़्तार कर लिए गए हैं.

उन्होंने कहा कि ये आरोप केवल पाकिस्तान नहीं लगा रहा है बल्कि कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया और कई निष्पक्ष विश्लेषकों ने भी भारत प्रशासित कश्मीर में रह रहे लोगों की दर्दनाक कहानियां दुनिया के सामने लाईं हैं.

उन्होंने 29 अगस्त को प्रकाशित बीबीसी की एक रिपोर्ट का भी हवाला दिया जिसमें बीबीसी ने पाया था कि कई आम नागरिक भारतीय सेना के ज़ुल्म के शिकार हुए हैं.

उन्होंने भारत पर कटाक्ष करते हुए कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का दावा करने और ख़ुद को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य बनने की तमन्ना रखने वाले देश का यही असली चेहरा है.

'जिनेवा कंवेन्शन की अनदेखी'

शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा कि भारत बल के प्रयोग से कश्मीर की मुस्लिम बहुल आबादी को बदल कर मुसलमानों को अल्पसंख्यक बनाने की साज़िश रच रहा है.

उन्होंने कहा कि भारत का पाँच अगस्त का फ़ैसला अंतरराष्ट्रीय क़ानून की खुली अवहेलना है. उनके अनुसार भारतीय क़दम चौथे जिनेवा कंवेन्शन की भी अनदेखी करता है और सुरक्षा परिषद के कई प्रस्तावों का भी उल्लंघन है.

उनके अनुसार भारत का ये कहना कि कश्मीर उसका आंतरिक मामला है, ये पूरी तरह झूठ है.

उनके अनुसार कश्मीर का मुद्दा संयुक्त राष्ट्र के एजेंडे पर पिछले 70 सालों से है और इसी साल 16 अगस्त को कश्मीर पर बातचीत के लिए सुरक्षा परिषद की हुई बैठक इस बात का पक्का सुबूत है.

उन्होंने कहा कि कश्मीर में आज जो कुछ हो रहा है अब वो केवल किसी देश विशेष का मामला नहीं रह गया है बल्कि एक अधिकृत और विवादित भूमि पर रह रहे लोगों पर ज़ुल्म और ज़्यादती की जा रही है जो अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों की अनदेखी है. इसलिए ये अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय है और ये कभी भी भारत का आंतरिक मामला नहीं हो सकता है.

उन्होंने तीखे हमले करते हुए कहा कि कश्मीर में जो कुछ हो रहा है वो रवांडा, स्रेब्रेनिका, रोहिंग्या की याद दिलाता है. उन्होंने कहा कि कश्मीर में भारतीय ज़ुल्म और ज़्यादती नरसंहार है.

कुरैशी ने कहा कि भारत अपने ज़ुल्म को छिपाने के लिए इसे 'आतंकवाद और सीमा पार आतंकवाद' कह रहा है जो कि शर्मनाक है.

उन्होंने कहा कि अगर भारत के पास छुपाने के लिए कुछ नहीं है तो उसे अपने हिस्से में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के ज़रिए नियुक्त जाँच कमेटी को आने की इजाज़त देनी चाहिए. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपने हिस्से के कश्मीर में जाँच कमेटी को आने की इजाज़त देने को तैयार है.

उन्होंने ये भी कहा कि मानवाधिकार परिषद को कश्मीर के लोगों की तकलीफ़ पर ध्यान देना चाहिए और बढ़ती मानवीय त्रासदी से उभरते ख़तरे के संकेतों का सामाधान करना चाहिए.

इमेज कॉपीरइट EPA

क़ुरैशी ने इसके लिए परिषद को चार क़दम उठाने का सुझाव भी दिया.

1- भारत से कहना चाहिए कि वो पैलेट गन का इस्तेमाल तुरंत बंद करे. रक्तपात बंद करे. कर्फ्यू हटाए. क्लैंपडाउन (बंदी) और संचार पर लगी पाबंदियों को ख़त्म करे. मौलिक आज़ादी बहाल करे, राजनीतिक क़ैदियों को आज़ाद करे, मानवाधिकार की रक्षा करने वालों को निशाना बनाना बंद करे. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और विभिन्न मानवाधिकार संस्थाओं के प्रति वचनबद्धता निभाए जिसका पालन अंतरराष्ट्रीय क़ानून के मुताबिक़ ज़रूरी है. अधिकृत जम्मू-कश्मीर में भारत के बेरहम आपातकालीन क़ानूनों को बने रहने की मंज़ूरी नहीं दी जा सकती है.

2- कश्मीर के मासूम लोगों के मानवाधिकारों का उल्लंघन करने के दोषियों को न्याय के दायरे में लाया जाए. इस मामले में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार के कमिश्नर की सिफ़ारिश के आधार पर जाँच आयोग बनाया जाना चाहिए.

3- हाई कमिश्नर कार्यालय और मानवाधिकार परिषद की ओर से जिन्हें विशेषाधिकार मिले हुए हैं, उन्हें भारत अधिकृत कश्मीर में भारत की ओर से किए जा रहे मानवाधिकार उल्लंघन की निगरानी और रिपोर्ट करने को कहा जाए और उन्हें परिषद को लगातार प्रगति की जानकारी देते रहने को कहा जाए.

4- भारत से कहा जाए कि वो मानवाधिकार संगठनों, अंतरराष्ट्रीय मीडिया को बिना रूकावट के भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर में जाने की इजाज़त दे.

ये भी पढ़ेंः

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार