ईरान अमरीका के सामने कभी नहीं झुकेगा: हसन रूहानी- पाँच बड़ी ख़बरें

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2018 में अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ 2015 में हुए परमाणु क़रार को तोड़ा और फिर इस साल की शुरुआत में तीन जनवरी को अमरीका ने ईरान के प्रभावशाली सैन्य कमांडर क़ासीम सुलेमानी को मारा, तब से दोनों देशों के बीच की दुश्मनी चरम पर पहुंच गई है.

ट्रंप ने सत्ता में आने के बाद से ही ईरान के साथ 'मैक्सिमम प्रेशर' की नीति अपना रखी है. इसके तहत ईरान पर कई तरह के कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए गए हैं. इतना कुछ होने के बाद भी कोई पक्ष झुकने को तैयार नहीं है. रविवार को ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा कि ईरान दबाव में आकर कभी बातचीत शुरू नहीं करेगा.

हसन रूहानी ने कहा, ''हम अमरीकी दबाव के सामने नहीं झुकेंगे. मजबूरी में हम अमरीका के साथ बातचीत शुरू नहीं करेंगे.'' हालांकि अमरीका के कड़े आर्थिक प्रतिबंधों से ईरान की अर्थव्यवस्था की हालत बहुत ही नाजुक स्थिति में पहुंच गई है.

प्रतिबंधों के कारण ईरान अपना तेल नहीं बेच पा रहा है. ईरान अमरीका से नए परमाणु क़रार को लगातार ख़ारिज कर रहा है. ईरान का कहना है कि जब तक अमरीका 2015 के परमाणु समझौते को बहाल नहीं करता है और आर्थिक पाबंदी नहीं हटाता है तब तक कोई बातचीत शुरू नहीं होगी.

रूहानी ने कहा, ''ईरान के ख़िलाफ़ अमरीका की 'अधिकतम दबाव' की नीति नाकाम हो चुकी है. हमारा दुश्मन बख़ूबी जानता है कि दबाव की उसकी रणनीति अप्रभावी हो चुकी है. बिना ईरान की मदद से संवेदनशील इलाक़ा मध्य-पूर्व में शांति और स्थिरता संभव नहीं है. कई देशों ने सऊदी अरब की ओर से हमें पैग़ाम भेजा लेकिन मसला सऊदी अरब से नहीं है.''

ईरान के विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ़ ने शनिवार को कहा कि सऊदी अरब ने जनरल क़ासीम सुलेमानी के मारे जाने के बाद ईरान से संपर्क किया लेकिन जब ईरान ने बात आगे बढ़ाने की कोशिश की तो वो पीछे हट गया.

ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि सऊदी अरब पर अमरीका का दबाव है. जवाद ज़रीफ़ ने सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फ़ैसल बिन फ़रहान अल साऊद के दावे को ख़ारिज कर दिया कि सऊदी अरब ने ईरान से कभी संपर्क नहीं किया है.

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दिग्विजय सिंह कमलनाथ के साथ या सिंधिया के साथ?

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मध्य प्रदेश की कांग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री कमलनाथ बनाम ज्योतिरादित्य सिंधिया मामले में अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सामने आए हैं.

दिग्विजय सिंह ने खुलकर किसी का पक्ष नहीं लिया लेकिन कमलनाथ का बचाव करते दिखे.

पत्रकारों ने दिग्विजय सिंह से पूछा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया का कहना है कि अगर उनकी सरकार ने वचनपत्र में किए वादों को पूरा नहीं किया तो वो सड़क पर उतरेंगे. इस पर दिग्विजय सिंह ने कहा, ''अकेले सिंधिया जी ही क्यों उतरेंगे, हम सब उनका साथ देंगे?"

दिग्विजय सिंह ने कहा, ''वचनपत्र में किए वादे कांग्रेस के हैं और इसे पूरा करने की ज़िम्मेदारी हम सबकी है. वादा केवल सिंधिया जी ने नहीं किया है, बल्कि हम सबने किया है. वचनपत्र पाँच साल के लिए होता है. अभी तो सवा साल ही हुए हैं और इनमें से कई वादे कमलनाथ जी ने पूरे किए हैं. ये बिल्कुल ग़लतफ़हमी है कि सिंधिया जी किसी के ख़िलाफ़ हैं. कांग्रेस कमलनाथ जी के नेतृत्व में एकजुटता से खड़ी है.''

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अराजक तत्वों से निपटने में संयम बरते पुलिस: अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को 73वें स्थापना दिवस पर दिल्ली पुलिस की जमकर सराहना की. उन्होंने सलाह भी दी कि अराजक तत्वों से निपटने में संयम बरते.

अमित शाह ने कहा, ''जब आप पीछे देखते हैं तो पता चलता है कि दिल्ली पुलिस न सिर्फ़ देश में बल्कि पूरे विश्व में सबसे अच्छे पुलिस बलों में से एक है. गर्व महसूस करना चाहिए कि इसकी नींव सरदार वल्लभ भाई पटेल ने रखी थी.''

नई पुलिस लाइन किंग्सवे कैंप ग्राउंड में आयोजित समारोह में गृह मंत्री अमित शाह ने 42 पुलिसकर्मियों को शौर्य पदक, राष्ट्रपति पदक और पुलिस पदक से सम्मानित किया और दंगा निरोधी दस्ते, महिला पुलिस समेत विभिन्न टुकड़ियों के साथ परेड का निरीक्षण किया.

जब अमित शाह दिल्ली पुलिस की तारीफ़ कर रहे थे तभी सोशल मीडिया पर जामिया मिल्लिया इस्लामिया की लाइब्रेरी में पढ़ाई कर रहे छात्रों पर दिल्ली पुलिस का डंडा मारते हुए वीडियो वायरल हो रहा था.

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राज्यसभा में और कमज़ोर होगा विपक्ष

इस साल सत्तारूढ़ एनडीए को राज्यसभा में बहुमत मिल सकता है. ऊपरी सदन में विपक्ष और कमज़ोर होने वाला है. कांग्रेस इस साल के अंत तक ख़ाली होने वाली 68 सीटों में कई हार जाएगी.

कांग्रेस राज्यसभा में अपनी 19 सीटों में से क़रीब नौ सीटें खो सकती है. कुछ राज्यों की विधानसभाओं में उसकी सीटें काफ़ी कम हुई हैं. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार कांग्रेस प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कुछ दिग्गजों को राज्यसभा में ला सकती है.

बीजेपी राज्यसभा में बड़ी बढ़त हासिल कर सकती है. फ़िलहाल राज्यसभा में एनडीए के पास बहुमत नहीं है. बिल पास कराने के लिए उसे अपने क़रीबी दलों अन्नाद्रमुक और बीजेडी से सहयोग लेना पड़ता है.

245 सदस्यों वाली राज्यसभा में बीजेपी के 82 और कांग्रेस के 46 सदस्य हैं. सदन में 12 नामित सदस्य भी हैं, जिनमें आठ बीजेपी के समर्थन में हैं.

दरअसल, बीजेपी के खाते में जाने वाली नवंबर में एक राज्यसभा सीट उत्तराखंड में और दस उत्तर प्रदेश से ख़ाली हो रही हैं. महाराष्ट्र में छह सीटें ख़ाली हो रही हैं. इसमें राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी प्रमुख शरद पवार की सीट भी शामिल है.

तमिलनाडु में छह सीटें ख़ाली हो रही हैं. पश्चिम बंगाल और बिहार में पांच-पांच सीटें ख़ाली हो रही हैं. गुजरात, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में चार-चार सीटें ख़ाली हो रही हैं.

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नेशनल कॉन्फ़्रेंस ने रखी शर्त

जम्मू-कश्मीर में होने वाले पंचायत उपचुनाव में नेशनल कॉन्फ़्रेंस भी उतरने के लिए तैयार है लेकिन पार्टी ने शर्त रखी है कि उसके नेताओं को रिहा किया जाए.

इस बार जम्मू-कश्मीर के पंचायत चुनावों में पार्टियां अपने चुनाव चिह्न पर प्रत्याशी उतार सकेंगी. पिछले 70 सालों में यह पहला मौक़ा होगा जब जम्मू-कश्मीर के पंचायत चुनावों में उम्मीदवार अपनी पार्टी के चुनाव चिह्न के साथ मतदाताओं के पास जाएंगे.

जम्मू-कश्मीर में ख़ाली पड़े 1011 सरपंच और 11639 पंच पदों पर होने वाले चुनाव पाँच मार्च से शुरू होंगे. हालांकि अभी केंद्र शासित लद्दाख में ख़ाली पड़े पंच-सरपंच के लिए चुनाव नहीं हो रहा है.

पंचायत उपचुनाव के पहले चरण की अधिसूचना जारी होने के साथ ही प्रदेश बीजेपी ने अपना प्रचार अभियान शुरू कर दिया है. इस बीच, नेशनल कॉन्फ़्रेंस ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी शैलेंद्र कुमार को पत्र लिखा है कि पार्टी चुनाव लड़ने को राज़ी है, लेकिन इसके लिए उसके नेताओं को रिहा किया जाए.

इस समय पार्टी प्रमुख फ़ारूख़ अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महासचिव अली मोहम्मद सागर पब्लिक सेफ़्टी एक्ट के तहत हिरासत में हैं.

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