नेपाल प्रेस में नए नक़्शे और लिपुलेख विवाद पर क्या लिखा जा रहा

  • सुरेंद्र फुयाल
  • काठमांडू से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
नेपाली अख़बार

नेपाल सरकार ने दो दिन पहले एक 'ऐतिहासिक निर्णय' में नेपाल का नया राजनीतिक नक़्शा जारी किया जिसमें लिम्पियाधुरा, कालापानी और लिपुलेख को नेपाल की सीमा में दिखाया गया है.

भारत सरकार नेपाल के इस क़दम से काफ़ी नाराज़ है और सरकार ने आधिकारिक रूप से इसपर आपत्ति भी जताई है.

नेपाल की कैबिनेट ने इसे अपना जायज़ दावा क़रार देते हुए कहा कि 'महाकाली (शारदा) नदी का स्रोत दरअसल लिम्पियाधुरा ही है' जो फ़िलहाल भारत के उत्तराखण्ड का हिस्सा है.

नेपाल की कैबिनेट का यह फ़ैसला भारत की ओर से लिपुलेख इलाक़े में सीमा सड़क के उद्धाटन के दस दिनों बाद आया था.

लिपुलेख से होकर ही तिब्बत चीन के मानसरोवर जाने का रास्ता है. इस सड़क के बनाए जाने के बाद नेपाल ने कड़े शब्दों में भारत के क़दम का विरोध किया था.

नया राजनीतिक नक़्शा सामने आने के बाद से ही नेपाल की मीडिया में अधिकांश बड़ी सुर्खियाँ इस मुद्दे के इर्द-गिर्द बन रही हैं. सभी अख़बारों ने बीते दिनों में इस मुद्दे को प्रमुखता से प्रकाशित किया है.

हालांकि कुछ अख़बारों ने नए नक़्शे पर नेपाल के दावे के साथ-साथ भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से बुधवार को दी गई दलीलों और टिप्पणियों को भी अपने यहाँ जगह दी है.

'अपने क्षेत्र की रक्षा करने में कतराना कैसा'

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बात सरहद पार

दो देश,दो शख़्सियतें और ढेर सारी बातें. आज़ादी और बँटवारे के 75 साल. सीमा पार संवाद.

बात सरहद पार

समाप्त

नेपाल सरकार के स्वामित्व वाले दैनिक अख़बार 'गोरखा पत्र' ने पहले पन्ने पर नया नक़्शा प्रकाशित किया है और शीर्षक लिखा है: 'नेपाल का नया नक़्शा सार्वजनिक हुआ'. इसके नीचे नेपाल की भूमि प्रबंधन मंत्री पद्मा कुमारी आर्यल का बयान है, 'हम अपने राष्ट्रीय क्षेत्रों की रक्षा करने से कतराते नहीं हैं.'

सरकार के स्वामित्व वाले एक अन्य अख़बार, 'द राइज़िंग नेपाल' ने भी बैनर हेडलाइन दी है, जिसमें लिखा है, 'सरकार ने कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को शामिल कर नया मानचित्र जारी किया.' अख़बार ने इसके नीचे सरकार द्वारा जारी किया नया नक़्शा प्रकाशित किया है.

निजी स्वामित्व वाले नामी दैनिक अख़बारों- कांतिपुर, द काठमांडू पोस्ट, अन्नापूर्णा पोस्ट, नागरिक और नया पत्रिका ने भी इस मुद्दे पर सभी अपडेट और विश्लेषणों के साथ नये नक़्शे को प्रकाशित किया है.

साथ ही इन अख़बारों ने भारतीय विदेश मंत्रालय द्वारा जारी किये गए बयान को भी छापा है. इन अख़बारों ने नेपाल के लोगों को यह समझाने का प्रयास किया है कि इस मुद्दे पर भारत की चिंताएं क्या हैं.

दैनिक अख़बार कांतिपुर ने काफ़ी सारी सूचनाओं के साथ एक आर्टिकल प्रकाशित किया है, जिसे अख़बार ने स्पष्ट प्रमाण बताया है, कि आख़िर क्यों नेपाल का अपने नक़्शे को लिम्पियाधुरा, कालापानी और लिपुलेख तक फैला लेना जायज़ है.

अख़बार ने 1816 सुगौली संधि, भारत द्वारा जारी किये गए 1857 के मानचित्र, 1860 की संधि, 1875 के मानचित्र, स्थानीय लोगों की भूमि राजस्व की रसीदों, 1958 के चुनाव में मतदाता सूची और 1961 की राष्ट्रीय जनगणना का हवाला देते हुए नेपाल सरकार के क़दम को सही ठहराया है.

'भारत और नेपाल की मानचित्र पर जंग'

नेपाल के लगभग सभी निजी क्षेत्र के मीडिया संस्थानों ने भारतीय विदेश मंत्रालय के बयान को यह कहते हुए स्थान दिया है कि 'नेपाल का ये क़दम भारत के लिए अस्वीकार्य है.'

'द काठमांडू पोस्ट' अख़बार ने कुछ विशेषज्ञों का नज़रिया इस शीर्षक के साथ प्रकाशित किया है, 'एक नए मानचित्र को लेकर नेपाल और भारत के बीच जंग की स्थिति.'

इसी महीने में नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने कोविड-19 महामारी के ख़िलाफ़ भारत के साथ एकजुट रहने की प्रतिबद्धता जताई थी.

लेकिन जब केपी शर्मा ओली ने नेपाल का नया नक़्शा जारी करते हुए यह स्पष्ट किया कि 'नेपाल अपनी ज़मीन का एक इंच हिस्सा भी नहीं छोड़ेगा' तो नेपाल के सभी प्रमुख मीडिया संस्थानों ने उनके इस बयान को 'साहसिक और बोल्ड' बताया.

दैनिक अख़बार नागरिक ने अपने संपादकीय में, जिसका शीर्षक है- 'शुक्रिया!', नेपाल सरकार से 'राजनयिक बातचीत शुरू करके, इस विवाद को सुलझाने' का आग्रह किया है ताकि 'दोनों देशों के बीच अनूठे संबंध और भी अधिक ऊंचाइयों तक' पहुँच सकें.

'नए नक़्शे का जश्न हास्यास्पद'

लेकिन कांतिपुर अख़बार के एक संपादकीय लेखक चंद्र किशोर ने इस मुद्दे पर अपने महत्वपूर्ण विचार रखे हैं.

'द बॉउंड्री ड्रॉन' शीर्षक वाले अपने लेख में उन्होंने चेतावनी दी है कि 'जब तक नेपाली लोगों की आवाजाही के लिए ज़रूरी इंफ़्रास्ट्रक्चर का विकास नहीं किया जाता, और जब तक कालापानी के लोग भारत पर निर्भर हैं, तब तक नेपाली सरकार की दिवाली पर नए नक़्शे का जश्न मनाने की प्रस्तावित योजना हास्यास्पद है. इससे सीमा पर रह रहे लोगों की तकलीफ़ों पर नमक छिड़कने के अलावा कुछ हासिल नहीं होगा.'

चंद्र किशोर की रिपोर्ट नेपाल की सीमा पर काली नदी से पूर्व में बसे सुदूर पश्चिमी प्रांत के हालात पर रोशनी डालती है, जहाँ नेपाली लोग भारतीय ब्रिज, फ़ुटपाथ और रोड का इस्तेमाल अपनी आवाजाही के लिए करने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी ओर इस इलाक़े में बाज़ार, स्कूल और स्वास्थ्य सेवा केंद्र जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं.

इन सीमावर्ती इलाक़ों में रहने वाले लोगों की ये हालत उन नारों से एकदम अलग है जिन्हें बीते दशकों में काठमांडू के लोगों से सुना गया है जिसमें वो भारत के कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख के क़ब्ज़े के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाते रहे हैं.

भारत ने इन इलाक़ों पर अपना क़ब्ज़ा होने से हमेशा इनकार ही किया है.

सवाल और जवाब

कोरोना वायरस के बारे में सब कुछ

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस क्या है? लीड्स के कैटलिन से सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले

    कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है

    सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं

    कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.

    ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.

    कोरोना वायरस के अहम लक्षणः ज्यादा तेज बुखार, कफ़, सांस लेने में तकलीफ़

    लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.

  • एक बार आप कोरोना से उबर गए तो क्या आपको फिर से यह नहीं हो सकता? बाइसेस्टर से डेनिस मिशेल सबसे ज्यादा पूछे गए सवाल

    जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.

    यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.

    ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.

    यह नया वायरस उन सात कोरोना वायरस में से एक है जो मनुष्यों को संक्रमित करते हैं.
  • कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है? जिलियन गिब्स

    वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.

    कोविड-19 के कुछ लक्षणों में तेज बुख़ार, कफ़ और सांस लेने में दिक्कत होना शामिल है.

    वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.

    इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.

  • क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है? सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक

    दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.

    ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.

    फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.

    • बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
    • जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
    • खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
  • आप कितने दिनों से बीमार हैं? मेडस्टोन से नीता

    हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.

    इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.

    अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.

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मेरी स्वास्थ्य स्थितियां

आपके सवाल

  • अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है? फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन

    अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.

    अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.

  • क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है? स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड

    ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.

    ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.

  • जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं? कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे

    कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.

    लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.

    कोरोना वायरस की वजह से वायरल निमोनिया हो सकता है जिसके लिए अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
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अपने आप को और दूसरों को बचाना

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है? हार्लो से लोरैन स्मिथ

    शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.

    क्वारंटीन उपायों को लागू कराते पुलिस अफ़सर

    फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.

  • क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए? मैनचेस्टर से एन हार्डमैन

    पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.

    मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.

    फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.

    यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.

  • अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए? लंदन से ग्राहम राइट

    अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.

    सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.

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मैं और मेरा परिवार

आपके सवाल

  • मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा? बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल

    गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.

    यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.

    गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.

  • मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए? मीव मैकगोल्डरिक

    अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.

    अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.

    ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.

  • बच्चों के लिए क्या जोखिम है? लंदन से लुइस

    चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.

    ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.

    हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.

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