अंतरिम बजट में सामाजिक क्षेत्र पर ज़ोर

प्रणब मुखर्जी
Image caption सरकार को वैश्विक मंदी के बाद भी आर्थिक विकास दर 7.1 फ़ीसदी रहने की उम्मीद है

भारत में वर्ष 2009-10 के अंतरिम बजट में कोई बड़ा नीतिगत फ़ैसला नहीं हुआ.

आयकर में छूट, रियल स्टेट सेक्टर के लिए कुछ घोषणाओं और उद्योग जगत के लिए प्रोत्साहन की उम्मीद की जा रही थी लेकिन बजट में इस तरह की घोषणा नहीं हुई.

संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार की ओर से बजट पेश करते हुए प्रणब मुखर्जी ने पिछले पाँच वर्षों में सरकार की उपलब्धियों पर ध्यान केंद्रित किया.

उन्होंने वैश्विक मंदी के बावजूद भारत का आर्थिक विकास दर 7.1 फ़ीसदी रहने की संभावना जताई और इसे बड़ी उपलब्धि बताया. साथ ही उन्होंने ये भी जोड़ा कि मंदी के असर से निपटने के लिए कोई भी बड़ा फ़ैसला अगली सरकार को करना होगा.

मंदी का ज़िक्र करते हुए उनका कहना था, "वैश्विक मंदी का असर अभी ख़त्म नहीं हुआ है. विकासशील देश इस संकट से जूझ रहे हैं और वर्ष 2009 में स्थिति और ख़राब होने का अंदेशा है."

विकास दर

आगामी लोक सभा चुनाव से पहले आख़िरी बजट में प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि सरकार लगातार तीन वर्षों तक नौ फ़ीसदी विकास दर हासिल करने में कामयाब रही.

उन्होंने कहा कि इस दौरान राजकोषीय घाटे में उल्लेखनीय कमी आई है और सकल घरेलू बचत दर बढ़ कर 37 फ़ीसदी हो गई है.

प्रणब मुखर्जी ने कहा कि टैक्स और जीडीपी का अनुपात 12.5 फ़ीसदी हो गया.

प्रणब मुखर्जी ने कहा कि मंदी के बावजूद अप्रैल-नवंबर 2008 के बीच 23 अरब डॉलर से ज़्यादा का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश भारत में आया है.

उन्होंने कहा कि आर्थिक मंदी के असर से निपटने के लिए जो भी उपाय ज़रूरी हैं वो किए जाएंगे और इसकी ज़िम्मेदारी नई सरकार पर होगी.

सामाजिक क्षेत्र

प्रणब मुखर्जी ने कहा कि साठ फ़ीसदी आबादी की खेती पर निर्भरता को देखते हुए यूपीए सरकार ने पिछले पाँच वर्षों में किसानों के लिए बजट में तीन सौ फ़ीसदी की वृद्धि की है.

शिक्षा का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि नई परियोजनाएँ शुरु की गईं जिनका फ़ायदा अब दिखाई दे रहा है.

उनका कहना था कि ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना में उच्च शिक्षा के मद में नौ सौ फ़ीसदी की वृद्धि की गई.

प्रणब मुखर्जी ने अल्पसंख्यकों, महिलाओं और जनजातियों के कल्याण के लिए उठाए गए विभिन्न क़दमों का ज़िक्र किया.

कर सुधार

यूपीए सरकार के कर सुधारों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सीमा शुल्क और आयकर की दरों को तर्कसंगत बनाया गया है.

सेवाकर और निर्यात शुल्क की दरों को भी सुगम बनाया गया है. उनका कहना था, "इन संरचनात्मक परिवर्तनों को आईटी के ज़रिए और आसान बनाया गया है."

वर्ष 2008-09 के लिए 95 हज़ार करोड़ रूपए राजस्व वसूली के लक्ष्य को बढ़ा कर 96 हज़ार करोड़ रूपए कर दिया गया है.

दो लाख करोड़ रूपए से ज़्यादा के राजस्व घाटे की संभावना इस वित्त वर्ष के लिए जताई गई है जो बजट का चार फ़ीसदी से अधिक है. पहले यह लक्ष्य एक फ़ीसदी का रखा गया था.

बुनियादी संरचना

ग्रामीण विकास, सड़क निर्माण, आईटी जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा देने के लिए बजटीय समर्थन बढ़ाने की घोषणा की गई है.

जवाहर लाल नेहरू शहरी विकास योजना के लिए बजट सहायता बढ़ाई गई है. प्रणब मुखर्जी ने कहा कि दिसंबर तक 39 हज़ार करोड़ रूपए इस मद में स्वीकृत किए गए.

अगले वित्त वर्ष के लिए 30 हज़ार करोड़ रूपए राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना के लिए दिए गए हैं.

बजट में 13 हज़ार करोड़ रूपए सर्वशिक्षा योजना के लिए देने का प्रस्ताव है.

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लिए 12 हज़ार 70 करोड़ रूपए देने का प्रस्ताव है. भारत निर्माण योजना के मद में 40 हज़ार नौ सौ करोड़ रूपए दिए गए हैं.

निर्यात को बढ़ावा देने के लिए शुल्क में दो फ़ीसदी कटौती की घोषणा की गई लेकिन ये उन्हीं क्षेत्रों पर लागू होगा जहाँ रोज़गार के ज़्यादा अवसर हैं.

रक्षा बजट बढ़ा कर एक लाख 41 हज़ार 703 करोड़ रूपए कर दिया गया है.