फीकी नज़र आई रेलवे की 'गुलाबी तस्वीर'

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Image caption पूर्व रेल मंत्री लालू यादव ने पिछले पूरे पाँच वर्षों में किराया न बढ़ा कर वाहवाही लूटी थी

भारत के पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव रेलवे की जो गुलाबी तस्वीर पेश करते आए थे, उसका रंग ममता बनर्जी के बजट में फीका पड़ गया.

कई मदों में रेलवे की आय में कमी आई है जिसका ज़िक्र तो ममता बनर्जी ने अपने भाषण में नहीं किया लेकिन संसद में रखे गए बजट में इसका स्पष्ट चित्रण है.

इसके बावजूद रेल किराए में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है.

रेलवे की कमाई के सबसे बड़े स्रोत यानी माल भाड़े में बढ़ोत्तरी की बज़ाए कमी के संकेत मिलते हैं.

फ़रवरी में जब तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने अंतरिम रेल बजट पेश किया था तब उन्होंने माल भाड़े से लगभग 59 हज़ार करोड़ रूपए की आमदनी का अनुमान लगाया था.

लेकिन अब इसे घटा कर 58 हज़ार 525 करोड़ रूपए कर दिया गया है. हालाँकि वर्ष 2008-09 से तुलना की जाए तो ये थोड़ी ज़्यादा है.

रेलवे की कुल आय का लक्ष्य 93 हज़ार 159 करोड़ रूपए से घटा कर 88 हज़ार 419 करोड़ रूपए कर दिया गया है.

माल भाड़े में कमी

यात्री किरायों से होने वाली आय में मिला जुला रुख़ दिखाई दे रहा है. जहाँ ऊपरी दर्जे यानी वातानुकूलित (एसी) श्रेणी से होने वाली आय में लगभग आठ अरब रूपए की वृद्धि हुई है, वहीं दूसरे दर्जे से होने वाली आय में 150 करोड़ रूपए से अधिक की गिरावट आने का अनुमान है.

अन्य स्रोतो से होने वाली आय (फुटकर आय) में 50 फ़ीसदी से ज़्यादा की गिरावट आने वाली है. लालू यादव ने अंतरिम बजट में इस मद से छह हज़ार करोड़ रूपए की आमदनी का अनुमान लगाया था लेकिन अब इसे संशोधित कर महज 2500 करोड़ रूपए के आस-पास किया गया है.

अगर आमदनी और खर्चे का अनुपात बिठाया जाए तो इसमें बड़ा फ़र्क नज़र आने वाला है. जहाँ खर्चा 15 फ़ीसदी से ज़्यादा की गति से बढ़ रहा है, वहीं आमदनी लगभग सात फ़ीसदी की सुस्त गति पर स्थिर नज़र आई.

Image caption यूपीए सरकार के दूसरे कार्यकाल का यह पहला रेल बजट है

रेलवे की पूँजी निधि (कैपिटल फंड) और विकास निधि (डेवलपमेंट फ़ंड) दोनों में कमी आई है.

अंतरिम बजट में विकास निधि के मद में लगभग पाँच हज़ार 300 करोड़ रूपए रखे गए थे लेकिन वर्ष 2009-10 के लिए इसे घटा कर लगभग चार हज़ार 400 करोड़ रूपए किया गया है.

पूंजी निधि में वर्ष 2008-09 के दौरान लगभग 21 हज़ार करोड़ रूपए खर्च हुए थे जबकि इस बार यह लगभग सात हज़ार करोड़ रूपए है.

इन दोनों मदों का इस्तेमाल रेलवे में तकनीकी विकास और नई रेल लाइनों के निर्माण पर होता है.

नहीं बढ़े किराए

रेल मंत्री ममता बनर्जी ने साधारण दर्जे स्लीपर और जेनरल के किरायों में कोई परिवर्तन नहीं किया.

ग़ौरतलब है कि पूर्व रेल मंत्री लालू यादव ने यूपीए सरकार के पिछले पूरे पाँच वर्षों के कार्यकाल में किराया न बढ़ा कर वाहवाही लूटी थी.

बल्कि अंतरिम रेल बजट पेश करते हुए सभी श्रेणियों के यात्री भाड़े में दो प्रतिशत कमी और माल भाड़े में कोई बदलाव न करने की घोषणा की थी.

इस बार ऊपरी दर्जे यानी वातानुकूलित श्रेणी में टिकटों की बिक्री से बढ़ी आय को देखते हुए किरायों में मामूली वृद्धि की सिफ़ारिश की गई थी लेकिन ममता ने इसे दरकिनार करते हुए लोक लुभावन बजट पेश किया.

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