'बुनियादी ढाँचे को पटरी पर लाएँगे'

कमलनाथ
Image caption अब सरकार 80 फ़ीसदी ज़मीन अधिग्रहित होने के बाद ही टेंडर जारी करेगी

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री कमलनाथ ने उम्मीद जताई है कि बुनियादी ढाँचे में सुधार होगा और इस क्षेत्र में विदेशी निवेश आएगा.

कमलनाथ ने बीबीसी संवाददाता पल्लवी जैन के साथ एक विशेष बातचीत कर रहे थे. पेश है इस बातचीत के प्रमुख अंश.

सरकार ने बुनियादी ढाँचे को पटरी पर लाने पर ज़ोर दिया है. यह उसकी प्राथमिकताओं में से एक है. सरकार इसके लिए क्या क़दम उठा सकती है या उठा रही है?

प्रमुख बात यह है की हम अपना लक्ष्य बना रहे हैं. इसके लिए हमने अपनी क्षमता बढ़ाने का काम शुरू कर दिया है. इसके लिए ज़रूरतों पर हम अभी से ध्यान देना शुरू करें.

क्या कारण है की बुनियादी ढाँचा क्षेत्र में निजी निवेश और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफ़डीआई)ज़्यादा नहीं देखा गया है?

निजी भागेदारी इसलिए नहीं है क्योंकि उनके साथ समझौते तैयार नहीं किए गए लेकिन अब वे तैयार हो गए है.

इसके बाद उम्मीद है कि निजी निवेश तो आएगा ही क्योंकि आज भारत निवेश करने के लिए आकर्षक जगह है. ऐसे में मुझे नहीं लगता की निवेश को लेकर कोई दिक़्क़त होगी.

कई ऐसी परियोजनाएँ हैं जो शुरू तो हुईं लेकिन अभी तक अपने अंजाम तक नहीं पहुँच पाई हैं. इन परियोजनाओं को पूरा करने के लिए सरकार क्या क़दम उठा रही है?

इसमें सबसे ज़्यादा महत्त्वपूर्ण बात यह है की हम ज़मीन उपलब्ध कराएँ. ज़मीन अधिग्रहण पर ध्यान दें. जिसकी ज़मीन अधिग्रहीत होती है उसकी कीमत बढ़ जाती है लेकिन लोगों को इसमें शंका रहती है की ज़मीन तो अधिग्रहीत हो जाती है पर सड़कें नहीं बनतीं हैं.

इसे देखते हुए अब हमने तय किया है की जब तक 80 फ़ीसदी ज़मीन अधिग्रहीत नहीं होती है तब तक हम कोई टेंडर नहीं लाएंगे. इस तरह के संशोधनों के बाद मुझे विश्वास है की जो ज़मीन की बात है वह काफ़ी सुधरेगी.

ऐसा माना जा रहा ही की दुनिया की तुलना में भारत में विकास दर काफ़ी अच्छी रहेगी.क्या आपको लगता है की ये संभव है या फिर लोग ज़्यादा महत्वकांक्षी हो रहे हैं?

नहीं, हम ज़्यादा महत्वकंक्षीं नहीं हो रहे हैं. हमारी जो बुनियादी बातें हैं वे काफ़ी सही और मज़बूत हैं. उस आधार पर मुझे पूरा विशवास है की हमारे विकास की जो गति रही है, उस पर हम बने रहेंगे.

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