अनाज उत्पादन घटने की आशंका

धान की खेती
Image caption उपज घटने का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है

वाणिज्य और उद्योग संगठन एसोचैम के आकलन के मुताबिक बारिश सामान्य से कम होने के कारण इस वर्ष भारत में कृषि उत्पादन घटने की आशंका है.

एसोचैम के मुताबिक जून महीने के आख़िर तक मॉनसून किसानों के साथ आँख मिचौली खेलता रहा और बारिश सामान्य से सात फ़ीसदी कम हुई.

इस आधार पर खेतिहर उपज में पिछले साल के मुक़ाबले 3.8 फ़ीसदी की कमी आ सकती है और आर्थिक विकास या सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में कृषि कि हिस्सेदारी 1.8 फ़ीसदी रह सकती है.

हालांकि ये आँकड़ा भी तभी पूरा होगा जब कृषि के साथ रखे गए सहायक क्षेत्रों जैसे जंगलों से होने वाली आमदनी और मछली पालन को जोड़ दिया जाए.

एसोचैम के मुताबिक उपज में कमी का सीधा असर उन उद्योगों पर पड़ सकता है जो कृषि क्षेत्र को कच्चे माल की आपूर्ति करते हैं. साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की आमदनी घटने के कारण उपभोक्ता सामानों की माँग गिर सकती है.

एसोचैम के प्रवक्ता का कहना है कि वैश्विक आर्थिक सुस्ती का असर भारत पर कम हुआ क्योंकि यहाँ घरेलू माँग में भारी कमी नहीं आई थी.

लेकिन मॉनसून के दगा देने से गाँवों में माँग घटना लाज़िमी है और इसके बुरे परिणाम हो सकते हैं.

एसोचैम का कहना है कि उत्पादन घटने से अनाजों की कीमतें ऊपर जा सकती है. साथ ही पनबिजली उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है क्योंकि जलाशयों में जलस्तर गिर रहा है.

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