पहली नैनो की चाबी सौंपी

नैनो कार
Image caption नैनो का बड़ी बेसब्री से इंतज़ार किया जा रहा था

दुनिया की सबसे सस्ती टाटा नैनो कार शुक्रवार की शाम को मुंबई की सड़कों पर उतारी गई.खुद रतन टाटा ने ने नैनो कार खरीदने वाले पहले व्यक्ति को अपने हाथ से चाबी सौंपी. नैनो के बाज़ार में आने से भारतीय कार बाज़ार में एक बहुत बड़ा बदलाव आने की उम्मीद लगाई जा रही है.

पहली कार हासिल करने वाले व्यक्ति का नाम है अशोक रघुनाथ विचारे और वह भारतीय कस्टम विभाग में काम करते हैं.

उन्होंने बीबीसी से कहा कि वह इस सम्मान पर ख़ुशी से फूले नहीं समा रहे हैं.

शुरुआती दो लाख लोगों ने नैनो की बुकिंग के लिए अपनी अर्ज़ियां दी थीं जिनमें से लॉटरी के ज़रिए केवल एक लाख लोगों की बुकिंग ली गई और उन्हें ये लखटकिया कार मुहैया कराई जाएगी.

आपको याद होगा कि इसी साल मार्च में एक रंगारंग कार्यक्रम में इस लखटकिया कार को उतारा गया था. इस गाड़ी को लोगों के सामने पेश करते हुए रतन टाटा ने कहा था कि वो भारतीय परिवारों को आसान कीमतों में ट्रांसपोर्ट का एक बेहतर माध्यम उपलब्ध कराना चाहते हैं.

फिलहाल इस कार के तीन मॉडल बाज़ार में उतारे जाएंगे जिनमें से बेसिक मॉडल में एयरबैग्स,एयरकंडीश्निंग,रेडियो और पावर स्टेयरिंग नहीं होगी. हांलाकि ये सारी सुविधाएं दूसरे अन्य मॉडलों में मुहैया कराई जाएंगी.

यूरोपीय मॉडल

टाटा की योजना साल 2011 तक लखटकिया कार से थोड़ा बड़ा यूरोपीय वर्ज़न बाज़ार में उतारने की योजना है जिसकी कीमत लगभग तीन लाख बीस हजार रुपए होगी.

रतन टाटा का मानना है कि लखटकिया के आने से लाखों आम भारतीयों की यात्रा आसान हो जाएगी. उनका ये भी मानना है कि तेजी से उभरते हुए मिडिल क्लास भारतीय जो अब तक मोटरसाइकिल पर सफ़र करते रहे हैं वो अब इस आसान कीमत वाली लखटकिया कार से सुरक्षित यात्रा कर सकेंगे.

इधर कार डीलरों का मानना है कि अगर टाटा की इस नई लखटकिया गाड़ी लोगों को पसंद आती है तो टाटा के सामने मांग पूरी करने की बड़ी चुनौती होगी क्योंकि टाटा नैनो की फैक्ट्री जो कि मध्य भारत के गुजरात में स्थित है उसकी क्षमता हर साल ढाई लाख कार बनाने की है वहां अगले साल तक काम शुरु नहीं हो सकेगा और मौजूदा प्लांट की क्षमता केवल पचास हजार कार के निर्माण की है.

लखटकिया कार के बाज़ार में आने में देर हुई और वो अपने नियत समय से देर तक लोगों तक पहुंच रही है. शुरुआत में इसका प्लांट पश्चिमी बंगाल में लगना था लेकिन वहां किसानों की ज़मीनों को लेकर उठे विवाद के बाद टाटा को अपना प्लांट हटाना पड़ा था.

टाटा मोटर्स,टाटा ग्रुप का हिस्सा है जो बड़ी संख्या में कारें,ट्रक का निर्माण करता है. यह भारत के शीर्ष कार निर्माता कंपनी है लेकिन पिछले आठ सालों से घाटे की मार झेल रही है.

संबंधित समाचार