अनिश्चितताओं के बीच आर्थिक सुधार जारी

रूपया

भारतीय रिज़र्व बैंक का कहना है कि अर्थव्यवस्था में सुधार हो रहा है पर साथ ही यह चेतावनी भी दी है कि अर्थव्यवस्था में अनिश्चतता की स्थिति अब भी बनी हुई है.

रिज़र्व बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति की तिमाही समीक्षा में रेपो और रिवर्स रेट में कोई बदलाव भी नहीं किए हैं.

बैंक ने आर्थिक विकास दर को छह प्रतिशत पर आंका है.

इन सब के बीच सकारात्मक संकेत यह है कि भारतीय उद्योग जगत के संगठन, कन्फ़ेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज़ (सीआईआई) ने कहा है कि उसे आर्थिक विकास की दर सात प्रतिशत रहने की आशा है. रिज़र्व बैंक की यह नीति बैंको की आशा के अनुरुप रही. बैंक का कहना कि औद्योगिक उत्पादन में बढ़ोत्तरी, व्यापार जगत में विश्वास और बढ़ते हुए खाद्य भंडार. ये सभी अर्थव्यवस्था में आ रहे सुधार के सूचक है.

सिर उठाती चिंताएं

हालांकि अर्थव्यवस्था के कुछ नकारात्मक पहलू भी है जैसे मानसून में देरी, खाद्य पदार्थो की कीमतो में लगातार हो रही बढ़ोत्तरी, विश्वभर में उपभोक्ता कीमतों में आ रही उछाल, विदेशी मांग में कमी का बना रहना और बढ़ता हुआ वित्तीय घाटा.

रिज़र्व बैंक का कहना है कि मार्च 2010 तक मुद्गास्फीति की दर पांच प्रतिशत तक बढ़ जाएगी.

आर्थिक सचिव अशोक चावला इस बारे में बताते हैं, ''आरबीआई को मुद्रास्फीति की चिंता है, वो उस पर नज़र रखेंगे पर फिलहाल उन्हें किसी नीतिगत बदलाव की ज़रुरत महसुस नहीं हो रही है और मौजुदा संतुलित नीति को बदलने की कोई ज़रुरत नहीं है.'' इस नीति पर प्रतिक्रिया देते हुए उद्योग संगठन, फ़िक्की के महासचिव अमित मित्रा का कहा, ''सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक अच्छा काम कर रहे हैं, ब्याज दर धीरे धीरे कम कर रही है और अब हम ज़ोर दे रहे है कि निजी बैंक भी ब्याज दरों को कम करें.'' रिज़र्व बैंक का सरकार को संदेश है कि वो वित्तीय स्थिति को मज़बूत करने पर अब अपना ध्यान केंद्रित करे.

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