गैस विवाद में नया मोड़

अंबानी बंधु
Image caption अंबानी बंधुओं के बीच विवाद सुप्रीम कोर्ट में है

गैस की कीमत पर अंबानी बंधुओं के विवाद में नया मोड़ आ गया है. वाम दलों ने प्रधानमंत्री को इस मुद्दे पर एक पत्र भेजा है.

प्रधानमंत्री को भेजी गई चिट्ठी में कहा गया है कि प्राकृतिक गैस राष्ट्रीय संपत्ति है और इसे निजी जायदाद में तब्दील नहीं होने देना चाहिए.

प्रधानमंत्री को यह चिट्ठी लोकसभा और राज्यसभा के तीस वामपंथी सांसदों ने लिखी है. चिट्ठी में कहा गया है कि प्राकृतिक गैस देश की संपत्ति है और पूरे देश की अर्थव्यवस्था को कुछ निजी व्यावसायिक घरानों के हाथों में गिरवी नहीं रखा जा सकता.

इस मुद्दे पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के नेता डी राजा कहते हैं, "हमनें प्रधानमंत्री से कहा है कि सरकार अपने पक्ष पर कायम रहे. सरकार ने हाल ही में स्पष्ट किया है कि प्राकृतिक गैस राष्ट्रीय संपत्ति है और इसलिए इस पर मालिकाना हक़ सरकार का है."

चिट्ठी में प्रधानमंत्री से आग्रह किया गया है कि कृष्णा-गोदावरी क्षेत्र से निकाली जा रही गैस को बेचने का अधिकार सरकार अपने हाथ में ले.

विवाद

मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस पेट्रोलियम को कई अन्य निजी कंपनियों के साथ केजी बेसिन में गैस निकालने और बेचने का पट्टा दिया गया है. जब पट्टा दिया गया तब मुकेश और उनके छोटे भाई अनिल अंबानी साथ-साथ थे.

लेकिन दोनों भाइयों के बीच वर्ष 2005 में बँटवारे के बाद पेट्रोलियम-गैस कारोबार मुकेश अंबानी के पास चला गया और ऊर्जा कारोबार अनिल के खाते में.

बँटवारे में तय हुआ कि रिलायंस पेट्रोलियम केजी बेसिन से निकलने वाली गैस का एक हिस्सा अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस पावर को लगभग ढ़ाई डॉलर प्रति घनमीटर के हिसाब से बेचेगी.

लेकिन अब मुकेश अंबानी की कंपनी नई कीमत पर गैस बेचना चाहती है. इसके विरोध में अनिल अंबानी मुंबई हाईकोर्ट गए. अदालत ने अनिल के पक्ष में फ़ैसला सुनाते हुए रिलायंस पेट्रोलियम से तयशुदा कीमत पर ही गैस देने को कहा.

इसके विरोध में मुकेश अंबानी सुप्रीम कोर्ट गए जहां मामले की सुनवाई चल रही है.

इसी बीच केंद्र सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी है जिसमें कहा गया है कि गैस राष्ट्रीय संपत्ति है जिसकी कीमत दो भाई मिल कर तय नहीं कर सकते.

नफ़ा- नुकसान

भारत सरकार का कहना है कि उसे अंबानी बंधुओं के विवाद से कोई मतलब नहीं है. उद्योग जगत का मानना है कि केंद्र सरकार के इस रुख़ से मुकेश अंबानी की दलील को परोक्ष रुप से समर्थन मिलता है.

Image caption अनिल अंबानी ने पेट्रोलियम मंत्रालय पर मुकेश का पक्ष लेने का आरोप लगाया है.

और घाटा छोटे भाई अनिल अंबानी की कंपनी को होगा जिसे सस्ती दर पर गैस नहीं मिल पाएगी.

अनिल अंबानी ने खुले तौर पर आरोप लगाया है कि पेट्रोलियम मंत्रालय और इसके मंत्री मुरली देवड़ा मुकेश अंबानी के इशारे पर काम कर रहे हैं.

मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी ने संसद में यह कहते हुए ये मुद्दा उठाया कि गैस नहीं मिलने से उत्तर प्रदेश के दादरी में प्रस्तावित पाँच हज़ार मेगावाट का पावर प्लांट शुरु नहीं हो पा रहा है.

यह पूछे जाने पर कि प्रधानमंत्री को चिट्ठी भेजना पारिवारिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं है, डी राजा का कहना था, "सरकार को साफ़ करना है कि गैस की जो कीमत तय हो वह तर्कसंगत और पारदर्शी हो."

उम्मीद की जा रही है कि पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवरा सोमवार को संसद में इस मुद्दे पर सरकार का पक्ष रखेंगे.

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