बोनस देने वाले बैंक पर जुर्माना

आर्थिक मंदी से जूझने के लिए सहायता प्राप्त करने वाले बैंक ऑफ़ अमरीका पर निवेशकों को गुमराह करते हुए बोनस बाँटने के आरोप में भारी-भरकम जुर्माना लगाया गया है.

Image caption बैंक ऑफ़ अमरीका के ख़िलाफ़ अभी जाँच जारी है

बैंक ऑफ़ अमरीका ने 3.30 करोड़ डॉलर (लगभग 165 करोड़ रुपए) का जुर्माना भरना स्वीकार कर लिया है.

जब बैंक ऑफ़ अमरीका ने मेरिल लिंच का अधिग्रहण किया था तो उसने निवेशकों को आश्वासन दिया था कि उनकी सहमति के बिना मेरिल लिंच के अधिकारियों को बोनस नहीं बाँटा जाएगा.

लेकिन बाद में बैंक ऑफ़ अमरीका ने मेरिल लिंच को ये अधिकार दे दिए कि वह अपने अधिकारियों को 5.8 अरब डॉलर का बोनस बाँट ले.

उल्लेखनीय है कि बैंक ऑफ़ अमरीका को वर्ष 2008 में मंदी से उबरने के लिए सरकारी पैसे से मदद की गई थी. यानी यह पैसा टैक्स अदा करने वालों का था.

जब आर्थिक मंदी अपने चरम पर थी तो इस बैंक को मंदी से उबरने के लिए 25 अरब डॉलर की मदद की ज़रुरत थी.

जुर्माना

अमरीकी सेक्युरिटीज़ एंड एक्सचेंज (एसईसी) कमीशन ने जो आरोप बैंक को लगाए थे उसके बाद बैंक ऑफ़ अमरीका ने समझौते के तहत सोमवार को जुर्माना अदा करना स्वीकार कर लिया.

हालांकि बैंक ने एसईसी के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है और न ही इसका खंडन किया है. लेकिन उसके प्रवक्ता ने कहा, "बैंक समझता है कि इस मामले में समझौता पूरे मामले का सकारात्मक अंत है."

वैसे एसईसी ने कहा है कि जाँच की प्रक्रिया अभी जारी रहेगी.

एसईसी का कहना है कि मेरिल लिंच को वर्ष 2008 में भारी घाटा हुआ था लेकिन फिर भी उसने अपने कर्मचारियों को 3.6 अऱब डॉलर बोनस के रुप में बाँटे.

बैंक और एसईसी के बीच यह समझौता उस समय हुआ है जब अमरीकी संसद की प्रतिनिधि सभा ने उस क़ानून के पक्ष में मतदान किया, जिसमें कहा गया है कि उन परिस्थितियों में बोनस नहीं बाँटे जाने चाहिए जबकि इससे बैंक के भविष्य को ख़तरा हो.

पिछले हफ़्ते ही एक रिपोर्ट में कहा गया था कि वॉल स्ट्रीट के बैंकों ने मंदी के दौर में भी अपने प्रदर्शन को दरकिनार रखते हुए बोनस बाँटे.

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