सूखे का सामना करने के लिए आयात

प्रणब मुखर्जी
Image caption केंद्रीय वित्त मंत्री ने कृषि मंत्रियों की बैठक के बाद बताया कि भारत को आयात करना पड़ सकता है

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि सूखे की मौजूदा स्थिति से निबटने के लिए खाद्य पदार्थों का आयात करना पड़ सकता है.

देश के आधे से अधिक ज़िले सूखे की चपेट में हैं और इससे लगभग 70 करोड़ लोग प्रभावित हुए हैं.

लेकिन सरकार ने अभी ये बताने से इनकार किया है कि वह खाद्य पदार्थों में क्या-क्या चीज़ें और कब आयात करेगी. सरकार का कहना है कि ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि घोषणा कर देने के बाद विश्व बाज़ार में उनकी क़ीमतों पर असर पड़ सकता है.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीनी की क़ीमतें पहले ही रिकॉर्ड स्तर पर चल रही हैं और इसमें कुछ हद तक भारत में चीनी का उत्पादन कम होने का भी योगदान बताया जा रहा है.

भारत चीनी के साथ ही दालों और खाद्य तेल के सबसे बड़े उपभोक्ता देशों में से एक है.

प्रणब मुखर्जी ने कहा कि जो भी पदार्थ कम होगा उसका घरेलू स्टॉक बढ़ाने के लिए आयात किया जाएगा.

उन्होंने कृषि मंत्रियों की एक बैठक के बाद ये घोषणा की. सरकार पहले ही देश के 600 में से 300 से ज़्यादा ज़िलों को सूखा प्रभावित बता चुकी है.

प्रणब मुखर्जी ने कहा, "सूखे से केवल उत्पादन ही प्रभावित नहीं होता बल्कि इसका असर पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. मगर खाद्य पदार्थों की कमी को पूरा करने के लिए सरकार उनका आयात भी करेगी. माँग और आपूर्ति के बीच तालमेल बैठाने के लिए कम आपूर्ति वाली चीज़ों का आयात किया जाएगा."

कोशिशें जारी

Image caption भारत में आधे से ज़्यादा ज़िले सूखे से प्रभावित बताए जा रहे हैं

बैठक के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने कहा, "स्थिति काफ़ी बुरी है और ये न सिर्फ़ फ़सलों की बुआई और फ़सलों का मामला है बल्कि छोटे किसानों और मज़दूरों के लिए तो मवेशियों की सेहत, उनके पीने के पानी और चारे का भी मसला है."

पवार का कहना था कि सरकार क़ीमतों को स्थिर रखने की हर कोशिश करेगी साथ ही उन्होंने राज्य सरकारों से अपील की कि वे खेतों में लगी हुई फ़सल बचाने की पूरी कोशिश करें.

इस संबंध में उन्होंने केंद्र की ओर से हरसंभव मदद का भरोसा भी दिलाया.

शरद पवार ने कहा, "ख़रीफ़ फ़सलें तो नष्ट हुई हैं मगर हमें यक़ीन है कि रबी की फ़सलें ठीक हो सकती हैं."

कम वर्षा की वजह से फ़सलें प्रभावित हुई हैं और उसके चलते खाद्य पदार्थों की क़ीमतों में 10 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी हो चुकी है.

चावल और गन्ने का उत्पादन इसकी वजह से सबसे ज़्यादा प्रभावित होने की आशंका है.

भारत में ये भी चिंता जताई जा रही है कि कई पदार्थों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क़ीमतें इसीलिए बढ़ रही हैं क्योंकि भारत में उनके आयात की संभावना बनी है.

प्रणब मुखर्जी के अनुसार क़ीमतें न चढ़ें इसी को रोकने के लिए अभी पदार्थों का ब्यौरा नहीं दिया जा रहा है.

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