चीनी भंडार ख़त्म होने की कगार पर

चीनी
Image caption चीनी के दाम दुनिया भर में बढ़ रहे हैं.

गन्ना उत्पादन में आई भारी कमी के कारण भारत में चीनी के दाम आसमान पर हैं.

इसे देखते हुए सरकार ने चीनी की जमाखोरी रोकने के लिए सख़्त क़दम उठाने के संकते दिए हैं.

ताज़ा निर्देश के मुताबिक कोई भी कंपनी 15 दिनों से ज़्यादा का चीनी भंडार अपने पास नहीं रख सकती.

इसका मकसद खुले बाज़ार में चीनी की आपूर्ति बढ़ाना है ताकि बढ़ती कीमतों पर क़ाबू पाया जा सके.

चीनी के भंडारण पर नियंत्रण अगले छह महीने तक लागू होगी. ये वैसे उपभोक्ताओं पर लागू होगी जो हर माह एक हज़ार किलो चीनी की खपत करते हैं.

भारत ने ब्राज़ील और थाईलैंड से चीनी आयात करने के लिए कॉंट्रेक्ट किया है.

भारत में आयात बढ़ने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में भी चीनी की कीमतों पर असर पड़ा है और वायदा बाज़ारों में इसके दाम बढ़ गए हैं.

बढ़ेगी कीमत

कृषि मामलों के जानकार और भारतीय चीनी उद्योग पर किताब लिख चुके पत्रकार हरवीर सिंह कहते हैं, "ऐसा नहीं है कि पहले आयात नहीं होता था. फ़र्क ये है कि इस बार अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में भी दाम बढ़ गए हैं."

वो कहते हैं, "अभी बाहर से आयात करने पर तैयार चीनी की कीमत 30-32 रूपए प्रति किलो है. लेकिन ख़ुदरा दुकान तक पहुँचते-पहुँचते ये 40 रूपए प्रति किलो की दर से बिकेगी."

भारत के घरेलू बाज़ार में हर साल 220 लाख टन चीनी की माँग रहती है. इस साल 150 लाख टन उत्पादन हुआ है और 90 लाख टन आयात हुआ है.

हरवीर सिंह कहते हैं, "इस हिसाब से 20 लाख टन का भंडार बचा है. इसे देखते हुए सरकार ने 25 लाख टन कच्चे चीनी के आयात का फ़ैसला किया जिसमें से 15 लाख टन की खेप आ गई है."

इस साल बड़े पैमाने पर चीनी का उत्पादन करने वाले देशों जैसे भारत, ब्राज़ील, थाईलैंड और ऑस्ट्रेलिया में गन्ने का उत्पादन कम हुआ है जिससे कीमते बढ़ी हैं.

इसके कारण आने वाले त्यौहारों के मौसम में चीनी की मिठास पाने के लिए और जेब ढीली करनी पड़ सकती है.

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