'विकास दर छह प्रतिशत से अधिक होगी'

प्रणब मुखर्जी
Image caption प्रणब मुखर्जी ने कहा कृषि उत्पादन सूखे के कारण इस वर्ष 20 से 25 प्रतिशत घट सकता है

भारत के वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने उम्मीद जताई है कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में भारत की अर्थव्यवस्था की विकास दह प्रतिशत से अधिक रहेगी और वित्तीय क्षेत्र में सुधारों को आगे बढ़ाने और विनिवेश करने के बारे में कोई चिंता नहीं होनी चाहिए.

दिल्ली में एडिटर्स गिल्ड ऑफ़ इंडिया के साथ बातचीत में उनका कहना था, "पिछले पाँच साल में सकल घरेलु उत्पाद (जीडीपी) की विकास दर आठ प्रतिशत थी जबकि वर्ष 2008-09 में ये 6.7 प्रतिशत थी. इस साल सूखे के कारण कुछ कहना मुश्किल है. यदि कोई बड़ी समस्या न हुई तो ये संभव होगा कि 2009-10 में विकास दर छह प्रतिशत से अधिक होगी."

सूखे का ज़िक्र करते हुए उनका कहना था कि देश के कुल 252 ज़िले सूखे से प्रभावित हैं और संभावना है कि कृषि उत्पाद सूखे के कारण 20 से 25 प्रतिशत घट सकता है.

'सुधारों की चिंता न करें'

उनका कहना था कि पिछले साल की दो आख़िरी तिमाहियों में तेल की बढ़ी कीमतों, बढ़ी हुई महँगाई और वैश्विक वित्तीय संकट के कारण ख़ासी मुश्किलें आईं.

उनका कहना था कि आर्थिक सुधार एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है और ये सही दिशा में चल रहे हैं. उनका कहना था कि आर्थिक सुधारों के बारे में कोई चिंता नहीं होनी चाहिए.

विदेशों के साथ व्यापार नीति के बारे में उनकी टिप्पणी थी कि भारत के मुख्य व्यापार सहयोगी अमरीका और यूरोपीय संघ मुश्किलों का सामना कर रहे हैं और इससे भारतीय निर्यात प्रभावित हो सकते हैं.

लेकिन उन्होंने ज़ोर देकर ये भी कहा, "हमें उम्मीद है कि अगले पाँच साल में निर्यात को बढ़ाना संभव होगा और वर्ष 2014 तक ये दोगुना हो जाएँगी."

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