आर्थिक विकास दर में बढ़ोत्तरी

मौजूदा वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में भारत की आर्थिक विकास की दर 6.1 प्रतिशत तक पहुँच गई है.

Image caption कई क्षेत्रों में अपेक्षा के अनुरुप बढ़ोत्तरी नहीं हुई है

ऐसा उस समय हुआ है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वित्तीय संकट के कारण निर्माण और कई अन्य सेवा क्षेत्रों पर असर पड़ा है.

इससे पिछली तिमाही में आर्थिक विकास की दर 5.8 प्रतिशत थी. हालाँकि इस तिमाही की आर्थिक विकास दर पिछले साल इसी समय के मुक़ाबले काफ़ी कम है.

पिछले साल यानी वर्ष 2008 में इस तिमाही के दौरान आर्थिक विकास की दर 7.8 प्रतिशत दर्ज की गई थी.

सरकार और रिजर्व बैंक ये दावा करते रहे हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था में 6 प्रतिशत की दर से बढ़ोत्तरी होगी.

आकलन

अधिकारियों के मुताबिक़ अगर कृषि क्षेत्र में विकास बुरी तरह प्रभावित न हुई तो इस वित्तीय वर्ष में अपेक्षा के अनुरूप की बढ़ोत्तरी होगी.

सरकारी आँकड़ों के मुताबिक़ मौजूदा वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में खनन, विद्युत और वित्तीय क्षेत्र में सबसे ज़्यादा बढ़ोत्तरी दर्ज की गई.

खनन क्षेत्र में 7.9 फ़ीसदी, विद्युत में 6.2 और वित्तीय क्षेत्र में 8.1 फ़ीसदी की बढ़ोत्तरी हुई. इनके अलावा निर्माण और सामुदायिक सेवा क्षेत्र में भी वृद्धि हुई है.

हालाँकि कृषि और विनिर्माण क्षेत्र में कम दर से वृद्धि हुई है. होटल, व्यापार, परिवहन और संचार जैसे सेवा क्षेत्रों में काफ़ी कम दर से बढ़ोत्तरी हुई है.

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