भारतीय में विदेश जाने का उत्साह घटा

प्रवासी
Image caption वर्ष 2008 में 8.49 लाख कम प्रशिक्षित भारतीय कामगार विदेश गए. लेकिन 2009 के पहले तीन महीनों में पिछले साल के मुकाबले उनकी संख्या घटी और 1.71 लाख कामगार विदेश गए

भारत से खाड़ी देशों में जाने वाले कम प्रशिक्षित प्रवासियों की संख्या वर्ष 2004 और 2008 के भीतर दोगुना हो गई लेकिन आर्थिक मंदी के बाद ये घट गई है.

वर्ष 2008 में जहाँ लगभग साढ़े आठ लाख ऐसे कामगार विदेश गए, वहीं वर्ष 2009 के पहले तीन महीनों में ये संख्या केवल 1.71 लाख थी, जो पिछले वर्ष के मुकाबले में ख़ासी कम है.

उधर बांग्लादेश से खाड़ी देशों में जाने वाले प्रवासियों की संख्या भारत से भी ज़्यादा है. आर्थिक मंदी के कारण दस प्रतिशत बांग्लादेशियों को उनके देश वापस भेज दिया गया.

खाड़ी देशों को जाने वाले नेपाली कामगारों की संख्या पिछले एक साल में 13 प्रतिशत घट गई है. ग़ौरतलब है कि आर्थिक मंदी का ज़्यादा असर न होने के कारण सऊदी अरब को जाने वाले या वहाँ से आने वाले कामगारों की संख्या में ज़्यादा फर्क़ नहीं पड़ा है.

ये जानकारी बीबीसी वर्ल्ड सर्विस और अमरीका स्थिति माइग्रेश पॉलिसी इंस्टीट्यूट के संयुक्त अध्ययन में पिछले एक साल में विश्व भर में प्रवासियों की आवाजाही का नतीजा है.

वर्ष 1950 से भारत से बाहर जाने वाले कामगारों को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बाँटा जा सकता है.

पहली श्रेणी उनकी है जो ख़ासे प्रशिक्षित कर्मचारी हैं और ये मुख्य रुप से उद्योगिक पश्चिमी देशों को जाते हैं. ये सिलसिला 1950 में शुरू हुआ लेकिन इसमें गति 1990 में आई. एक अनुमान के तहत वर्ष 2000 से पहले भारत से पश्चिमी देशों में लगभग 10.25 लाख लोग गए और इनमें अधिकतर काफ़ी प्रशिक्षित थे.

वर्ष 2008 में अमरीका ने जिन 4.09 लाख प्रशिक्षित कर्मचारियों को एच-1बी वीज़ा दिया उनमें 38 प्रतिशत भारतीय थे. इसी प्रकार ब्रिटेन में 22 हज़ार अति प्रशिक्षित कर्मचारियों को दिए जाने वाले वीज़ा में 40 प्रतिशत भारतीय थे.

भारत से आर्थिक मकसदों के लिए प्रवासन करने वाले दूसरी श्रेणी के वो लोग हैं जो अप्रशिक्षित या फिर कम प्रशिक्षित कामगार हैं. इनका ठिकाना खाड़ी के देश हैं. अनुमान है कि वर्ष 2000 तक खाड़ी देश में 30 लाख भारतीय मज़दूर थे. खाड़ी देशों के लिए वर्ष 2008 में लगभग साढ़े आठ लाख कम प्रशिक्षित कामगारों को वीज़ा जारी किया गया, जो वर्ष 2004 के मुक़ाबले में 78 प्रतिशत की वृद्धि थी.

भारत से वर्ष 2008 में जो 8.48 लाख कम प्रशिक्षित प्रवासी विदेश खाड़ी देशों में गए उनमें से 41 प्रतिशत संयुक्त अरब अमीरात और 27 प्रतिशत सऊदी अरब गए, यानि 96 प्रतिशत कामगार खाड़ी के देशों में गए. लेकिन आर्थिक संकट के कारण वर्ष 2009 में एक लाख 71 हज़ार ही छोटे मोटे कामगार बाहर गए. जो कि पिछले साल की तुलना में काफ़ी कम है.

बांगलादेश

बांगलादेश से खाड़ी के देश जान वालों की संख्या में हाल में भी इज़ाफ़ा हुआ है. हालाँकि वैश्विक आर्थिक मंदी की वजह से लगभग 10 प्रतिशत बांगलादेशी प्रवासी कामगारों को स्वदेश लौटना पड़ा है.

1970 के दशक के मध्य में बांगलादेश की सरकार ने लोगों को बाहर भेजना शूरु किया. वर्ष 2006 और 2007 के बीच बांग्लादेश से खाड़ी देशों में जाने वाले प्रवासियों की संख्या दोगुना से अधिक – 3.82 लाख से बढ़ कर 8.32 लाख हो गई.

खाड़ी देशों में जाने वाले बांग्लादेशियों में से लगभग 50 प्रतिशत बांग्लादेशी सऊदी अरब और 10 प्रतिशत मलेशिया को जाते हैं. इस बार बड़ी संख्या में बांगलादेशी कामगारों के काम का अनुबंध ख़त्म होने के बाद दोबारा नहीं दिया गया है और उन्हें पिछले एक साल से अपने देश वापस जाने के लिए कहा जा रहा है. वर्ष 2008-09 में 71 हज़ार बांग्लादेशियों को उनके देश भेजा जा चुका है.

नेपाल

नेपाल के कम प्रशिक्षित कामगारों का हाल भी दूसरे दक्षिण एशियाई देशों, विशेष तौर पर भारत जैसा है. आर्थिक मंदी की वजह से पिछले वित्तीय वर्ष में नेपाल से जाने वाले कामगारों की संख्या में 13 प्रतिशत गिरावट आई है.

वर्ष 2008-09 में 2.17 लाख प्रवासी नेपाली बाहर काम करने के लिए गए जबकि 2007-08 में 2.49 लाख लोग काम के लिए खाड़ी देशों में गए थे. हालाँकि, नेपाली प्रवासी अब भी सऊदी अरब जा रहे हैं.

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