कर्मचारियों की पायलटों से अपील

Image caption जेट एयरवेज़ के पायलट कुछ दिनों से काम पर नहीं आए हैं.

निजी विमान कंपनी जेट एयरवेज़ के कर्मचारियों ने पायलटों से काम पर लौटने की अपील की है. कर्मचारियों ने कहा कि 'हड़ताल' से सबका नुकसान हो रहा है.

जेट के कर्मचारियों( नॉन-पायलट विंग) ने दिल्ली में पत्रकार वार्ता की और कहा कि आर्थिक मंदी के इस दौर में सब कर्मचारियों को मिलकर काम करने की ज़रूरत है.

इन लोगों का कहना था कि वैसे ही आर्थिक मंदी के कारण व्यवसाय प्रभावित हुआ है और इस हड़ताल के कारण जेट को नुकसान हो रहा है जबकि अन्य एयरलाइनों को इसका फ़ायदा मिल रहा है.पत्रकार वार्ता में आए कर्मचारियों ने केवल 600 पायलटों के कारण बाकी हज़ारों कर्मचारी प्रभावित हो रहे हैं.

जेट एयरवेज़ के पायलट अपने दो सहयोगियों को नौकरी से निकाले जाने को लेकर सामूहिक अवकाश पर चले गए हैं.

विवाद

दरअसल, विवाद की शुरुआत तब हुई जब पायलटों की एक यूनियन, नेशनल एविएटर्स गिल्ड में जेट एयरवेज़ के 750 पायलटों में से 600 शामिल हो गए.

इस यूनियन में इन पायलटों का प्रतिनिधित्व जेट के दो पायलट, डी बालारामन और सैम थॉमस कर रहे हैं. बालारामन इस यूनियन के महासचिव हैं और सैम इसके संयुक्त सचिव.

जानकार बताते हैं कि इन दोनों के यूनियन में पदभार संभालने के बाद ही प्रबंधन ने उन्हें कार्यभार से मुक्त कर दिया. प्रबंधन के इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ जेट एयरलाइंस के पायलटों ने मंगलवार को काम पर आने से मना कर दिया.

पायलटों के आंदोलन की अगुआई कर रहे नेशनल एविएटर्स गिल्ड के संयुक्त महासचिव कैप्टन सैम थॉमस ने समाचार एजेंसी पीटीआई के साथ बातचीत में कहा है कि स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है.

उन्होंने कहा, "अभी तक कोई बातचीत नहीं हुई है. स्थिति ज्यों की त्यों बनी हुई है. हमें प्रबंधन की ओर से बातचीत का कोई न्यौता नहीं मिला है."

दूसरी ओर जेट एयरवेज़ के एक प्रवक्ता ने बताया है कि 400 पायलटों के अवकाश पर चले जाने के कारण गुरुवार को अभी तक 163 घरेलू और 35 अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को रद्द कर दिया गया है.

स्थिति से निपटने के लिए कंपनी ने एक आपदा प्रबंधन केंद्र स्थापित किया है, जो दिन-रात स्थिति पर नज़र रखे हुए है.

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