चीन और अमरीका में तनाव बढ़ा

  • 14 सितंबर 2009
Image caption चीन ने अमरीका के ऑटोमोबाइल और चिकन उत्पादों पर शिकंजा कस दिया है

चीन ने अमरीकी ऑटोमोबाइल और चिकन से बने उत्पादों पर डंपिंग विरोधी और सब्सिडी विरोधी जांच शुरू कर दी है.

बेहद कम क़ीमत पर वस्तुओं को बाज़ार में भर देने को डंपिंग कहते हैं.

चीन ने ये क़दम अमरीका द्वारा चीन में बने कुछ टायरों पर पैंतीस प्रतिशत अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने के फ़ैसले के बाद उठाया है.

चीन सरकार ने एक बयान जारी करके अमरीका के इस फै़सले का भारी विरोध किया है और इसे ‘व्यापार संरक्षणवाद की एक गंभीर कार्रवाई’ बताया है.

दरअसल चीन और अमरीका के बीच व्यापार के मुद्दे पर विवाद लगातार बढ़ता ही जा रहा है.

शुक्रवार को ओबामा प्रशासन ने सवारी वाहनों और हल्के ट्रकों के टायरों पर पैंतीस प्रतिशत अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने का फैसला किया.

इसके पीछे अमरीका का तर्क है चीन के टायरों की वजह से अमरीका का टायर उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुआ है और हज़ारों लोगों को नौकरियों से हाथ धोना पड़ा है.

ऐसा अमरीका के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार आयोग के निष्कर्षों में कहा गया है.

चीन सरकार ने अमरीका के इस क़दम का भारी विरोध किया है और बदले में ये फैसला किया.

चीन का कहना है कि चीनी उत्पादकों की शिकायत है कि अमरीकी उत्पादों की वजह से उनके घरेलू उद्योग को काफी नुकसान हुआ है.

दोनों देशों के बीच ऐसे समय में व्यापारिक टकराव हो रहा है जबकि दो हफ्ते से भी कम समय में दुनिया की बीस बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश पीट्सबर्ग में होने वाले जी-20 सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए पहुंच रहे हैं.

अमरीका ने आर्थिक मंदी से हुए नुकसान की भरपाई के लिए जहां चीन से मदद मांगी है वहीं कहा जा रहा है कि चीन इस बात से चिंतित है कि भारी अमरीकी शुल्क के चलते कहीं मंदी से उबरने में उसकी योजनाएं न धराशाई हो जाएं.

हाल ही में विश्वव्यापी वित्तीय सुधार योजना पर दोनों देशों ने एक साथ काम करने के वादे किए थे.

इसके बावजूद जिस तरह से व्यापार में आपसे हितों की टकराहट हो रही है उसके चलते ये योजना पटरी से उतर सकती है.

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