मंदी के साए से निकले शेयर बाज़ार

शेयर

विश्व विख्यात वित्तीय संस्था लेहमन ब्रदर्स के धराशायी होने के एक साल बाद जब इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि वैश्विक आर्थिक संकट धीरे-धीरे दूर हो रहा है, तो सीधा असर शेयर बाज़ारों पर भी दिखाई दे रहा है.

अमरीका और यूरोप समेत एशियाई बाज़ारों में भी ज़बरदस्त तेज़ी दिखाई दे रही है. एशिया में भारतीय शेयर बाज़ार पिछले वर्ष के मुक़ाबले सौ फ़ीसदी से ऊपर आ चुका है.

सब प्राइम संकट से अमरीका में मंदी की शुरुआत हुई और जब संकट चरम पर था तब अमरीकी शेयर बाज़ार डाऊ जोंस और नैस्डैक गोता लगाते हुए अस्सी के दशक के स्तर पर पहुँच गए.

लेकिन अब जब अमरीका में रियल स्टेट बिजनेस फिर उठ रहा है और घरों की बिक्री के आँकड़े बढ़ने लगे हैं तो इसका सीधा असर शेयरों पर दिखाई दे रहा है.

बुधवार को डाऊ जोंस 108 अंक उछल कर छह अक्तूबर 2008 के स्तर पर पहुँच गया और यह नौ हज़ार 791 अंकों पर बंद हुआ. वहीं आईटी कंपनियों वाला नैस्डैक 30 अंक ऊपर जाकर 2133 अंकों पर बंद हुआ.

यूरोप में तेज़ी

इटली, जर्मनी और ब्रिटेन के शेयर बाज़ार भी एक साल के सर्वोच्च स्तर पर कारोबार कर रहे हैं. लंदन का सूचकांक फुटसी पिछले साल सितंबर के स्तर पर आ गया है.

Image caption नकदी बढ़ने के कारण बाज़ार में निवेश बढ़ा है.

बुधवार को फुटसी डेढ़ फ़ीसदी की बढ़त के साथ 5124 पर बंद हुआ.

कच्चे तेल के भाव जहां आर्थिक सुस्ती के समय 49 डॉलर प्रति बैरल तक गिर गए थे, वह बढ़ कर अब 72 डॉलर प्रति बैरल हो गया है जिससे संकेत मिलता है कि विकास के इंजन के लिए ज़रूरी इंधन की माँग बढ़ने लगी है.

एशियाई बाज़ारों को अमरीका से बल मिल रहा है. अमरीकी फेडरल रिजर्व के प्रमुख बेन बर्नान्के ने कहा है कि ऐसा लगता है कि मंदी अब ख़त्म हो चुकी है. अमरीका में अगस्त महीने के दौरान औद्योगिक उत्पादन 0.8 फ़ीसदी बढ़ा है.

इसका ये मतलब निकाला जा रहा है कि अमरीका में घरेलू माँग बढ़ने लगी है जिससे एशियाई देशों से अमरीका को होने वाला निर्यात फिर गति पकड़ सकता है.

सेंसेक्स

Image caption भारतीय बाज़ार तेज़ गति से बढ़ रहे हैं.

एशिया में अगर चीन को छोड़ दें तो भारत, जापान, थाईलैंड, मलेशिया, ताइवान, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया के शेयर बाज़ारों में तेज़ी दिखाई दे रही है और ये इस साल के सर्वोच्च स्तर पर हैं.

बैंक ऑफ़ जापान ने वित्तीय स्थिति को बेहतर बताया है. आँकड़ों के मुताबिक जापान से निर्यात में वृद्धि हुई है.

भारत में सितंबर महीने में अच्छी बरसात के बाद सूखे की आशंका कम हुई है जिससे शेयर बाज़ारों को बल मिला है और आर्थिक विकास दर के छह फ़ीसदी रहने की संभावना जताई जा रही है.

गुरूवार को तीन दिनों की लगातार बढ़त के बाद कारोबार बराबरी पर बंद हुआ. अहम् बात ये है की गुरूवार के कारोबार के दौरान निफ्टी 5000 के लेवल को पार कर गया जो मई 2008 के बाद पहली बार देखने को मिला है.

पर रिलाएंस इंडस्ट्रीज के शेयरो में गिरावट के कारण निफ्टी ये स्तर बरकरार नहीं रख सका. उधर बीएसइ सेंसेक्स में भी थोडी बढ़त देखी गयी और सूचकांक 16,711 पर बंद हुआ.

लेकिन कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि अचानक शेयर बाज़ारों में आई तेज़ी से निवेशकों को सतर्क रहने की भी ज़रूरत है.

हॉंगकॉंग के डीबीएस बैंक से जुड़े पीटर ले का कहना है, "एशियाई बाज़ार अभी सबको पीछे छोड़ रहे हैं लेकिन ऐसा सिर्फ़ बाज़ार में नकदी आ जाने से हुआ है. मुझे लगता है कि अब यहाँ से बढ़त की तुलना में बाज़ारों के नीचे आने का ख़तरा ज़्यादा है."

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