'आर्थिक मदद अभी वापस नहीं लेंगे'

  • 20 सितंबर 2009
प्रणब मुखर्जी
Image caption प्रणब मुखर्जी ने बजट में कई रियायतों की घोषणा की थी.

भारत के वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि आर्थिक संकट से निपटने के लिए जारी किए गए प्रोत्साहन पैकेज को अभी वापस नहीं लिया जाएगा.

उन्होंने शनिवार को बंगलौर में कहा कि सरकार अभी 'इंतजार करो और देखो' की नीति अपनाएगी.

वैश्विक मंदी के असर से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने कई चरणों में उत्पाद शुल्क में छह और सेवा कर में दो प्रतिशत की कटौती की थी.

इसके साथ-साथ सरकारी निवेश बढ़ा कर आर्थिक विकास को पटरी पर लाने की कोशिश की गई है.

हालांकि आलोचकों का कहना है कि इस क़दम से राजकोषीय घाटा बढ़ेगा और सरकार के पास पैसे की कमी हो सकती है.

राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 2009-10 में सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के 6.8 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है.

वित्त मंत्रालय ने पहले ही साफ कर दिया है कि राजकोषीय घाटे के इस स्तर को झेला नहीं जा सकता. अगले वित्त वर्ष में इसे 5.5 प्रतिशत तथा 2011-12 में 4.4 प्रतिशत पर लाने का लक्ष्य है.

वैश्विक स्तर पर मंदी के बादल छंटने के संकेत मिलने पर कई देशों की सरकारें अपने यहां दिए गए प्रोत्साहन पैकेजों को वापस लेने पर विचार कर रही हैं.

लेकिन प्रणब मुखर्जी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय विचार यही है कि जब तक यूरोप और उत्तर अमरीका में सुधार पूरी तरह दिखाई नहीं देने लगे, तब तक प्रोत्साहनों को वापस न लिया जाए.

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