शेयरधारक करेंगे वेतन वृद्धि का फ़ैसला

माइक्रोसॉफ्ट
Image caption माइक्रोसॉफ्ट दुनिया की अग्रणी सॉफ़्टवेयर कंपनी है

कंप्यूटर सॉफ्टवेयर की सबसे बड़ी कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने फ़ैसला किया है की कंपनी के निदेशकों की वेतन वृद्धि का फ़ैसला शेयरधारकों के वोट से होगा.

हालाँकि ये फ़ैसला बाध्यकारी नहीं होगा.

इस अमरीकी कंपनी का कहना है कि अगले 19 नवंबर को होने वाली शेयरधारकों की वार्षिक बैठक में इस मुद्दे पर पहली बार वोट डाले जाएंगे और उसके बाद हर तीसरे साल शेयरधारक इस बारे में मतदान किया करेंगे.

आर्थिक मंदी के दौरान अमरीकी कंपनियों पर इस बात के लिए दबाव बना हुआ है की वो अपने बड़े अधिकरियों की मोटी तनख्वाहों में कटौती करें. माइक्रोसॉफ्ट ने भी इसी दबाव के कारण ये क़दम उठाया है.

बड़ी कंपनियों के अधिकारियों के मोटी तनख्वाहों को लेकर अमरीकी जनता में इतना ज़्यादा विरोध है कि वॉशिंगटन में अमरीकी सांसद इस बारे में कोई कानून बनाने की सोच रहे हैं.

नेताओं में गुस्सा

माइक्रोसॉफ्ट का कहना है की हालाँकि वो शेयरधारकों के फैसले को मानने के लिए बाध्य नहीं होगी लेकिन यदि शेयरधारकों ने ज़रुरत से अधिक "नकारात्मक" रुख़ अपनाया तो उसे अपने शेयरधारकों से सीधे बात करनी होगी ताकि वो उनके पक्ष को भी समझ सके.

कुछ महीने पहले अमरीकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव ने एक विधेयक पास करके कंपनियों के शेयरधारकों को वोट के ज़रिए बड़े अधिकारियों की वेतन वृद्धि तय करने का अधिकार दिया था.

लेकिन इस विधेयक के अनुसार वोट के बाद भी कंपनी मालिक शेयरधारकों की राय को मानने के लिए बाध्य नहीं थे.

हालाँकि अमरीकी नेताओं की नाराज़गी मुख्य रुप से बैंकिंग क्षेत्र में काम करने वाले अधिकारियों से थी जो अपनी भारी तनख्वाहों के कारण बदनाम हो चुके थे..

माइक्रोसॉफ्ट के प्रमुख वकील ब्रेड स्मिथ ने कहा है, "कंपनी के बड़े अधिकारियों के वेतन के बारे में हम ये सोचते हैं कि समझदारी इसमें है कि शेयरधारकों के साथ और अधिक विचार विमर्ष किया जाना चाहिए."

माइक्रोसॉफ्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्टीव बालमर की तनख्वाह तो सिर्फ छह लाख 65 हज़ार डॉलर है, लेकिन उनके पास माइक्रोसॉफ्ट के जो शेयर हैं उनके दाम बढ़ कर अब दस अरब डॉलर हो गए हैं.

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