विकास सूचकांक में और पीछे भारत

Image caption गरीब और अमीर देशों के बीच खाई बढ़ी है

भारतीय अर्थव्यवस्था भले ही वैश्विक मंदी के दौर में नहीं चरमराई और विकास की गति जारी रही लेकिन संयुक्त राष्ट्र की मानें तो लोगों का औसत जीवन स्तर बेहतर नहीं हुआ है.

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) ने 182 देशों के सर्वेक्षण के आधार पर मानव विकास सूचकांक जारी किया है.

ग़ौर करने वाली बात ये है कि भारत इससे पहले 128वें स्थान पर था लेकिन इस साल वह पाँच पायदान नीचे फिसल कर 134 वें स्थान पर चला गया है.

इस सूचकांक में सिर्फ़ किसी देश के सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी का सहारा नहीं लिया जाता बल्कि औसत जीवन स्तर निकालने के लिए ग़रीबी, साक्षरता और लिंग आधारित मानकों को आधार बनाया जाता है.

यूएनडीपी का कहना है, "कुल मिलाकर सूचकांक में भारत ने धीमी प्रगति की है. वर्ष 2000 में इसका अंक 0.55 था जो वर्ष 2007 में बढ़ कर 0.612 हो गया."

लेकिन भारत की तुलना में अन्य देशों ने और तेज़ी से प्रगति की जिसके कारण भारत पीछे छूट गया.

मानव विकास सूचकांक के मामले में पड़ोसी देशों चीन, श्रीलंका और भूटान ने भी भारत को पीछे छोड़ दिया. चीन 92 और श्रीलंका 102 वें स्थान पर है.

नॉर्वे सबसे ऊपर

सूचकांक में नॉर्वे फिर सभी देशों में सबसे ऊपर है जबकि नाइजर सबसे नीचे. नॉर्वे के लोगों का जीवनस्तर सबसे बेहतर पाया गया.

हालांकि रिपोर्ट से ये बात उजागर हुई है कि धनी और गरीब देशों के बीच खाई लगातार बढ़ती जा रही है.

साठ के दशक में तेल और गैस क्षेत्रों की खोज के बाद नॉर्वे की आमदनी बढ़ी और लोगों का जीवनस्तर भी.

दूसरी ओर नाइजर में हज़ारों लोगों को दो जून की रोटी तक उपलब्ध नहीं है. नाइजर के बाद अफ़ग़ानिस्तान रहन-सहन के लिहाज़ से सबसे ख़राब देश है.

सूचकांक के मुताबिक नाइजर में लोगों की औसत आयु सिर्फ़ 50 साल है जबकि नॉर्वे में 80 साल.

इस सूची में अमरीका 13 वें और ब्रिटेन 21 वें स्थान पर है.

संबंधित समाचार