दुबई सरकार ने दुबई वर्ल्ड से पल्ला झाड़ा

Image caption खजूर के पेड़ के आकार का ये द्वीप भी दुबई वर्ल्ड की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं का हिस्सा है.

दुबई की सरकार ने कह दिया है कि वो सरकारी निवेश कंपनी, दुबई वर्ल्ड, के कर्ज़ों की गारंटी नहीं लेगी.

सरकार के प्रवक्ता अब्दुल रहमान अल सालेह ने कहा है कि कंपनी के कर्ज़ों की कुछ ज़िम्मेदारी कर्ज़दाताओं को भी उठानी होगी.

दुनिया की सबसे बड़ी निवेश कंपनियों में से एक, दुबई वर्ल्ड ने पिछले हफ़्ते अपने साठ अरब डॉलर के कर्ज़ की अदायगी के लिए छह महीने का समय मांगा था जिसके बाद दुनिया भर के शेयर बाज़ार लड़खड़ा गए थे.

सरकारी प्रवक्ता का कहना था: ``कर्ज़दाताओं को लगता है कि दुबई वर्ल्ड सरकार का हिस्सा है लेकिन ये सच नहीं है.''

इस एलान के बाद दुबई और अबू धाबी में बाज़ार ईद के त्योहार की वजह से बंद थे और सोमवार को जब बाज़ार खुले तो दुबई में 7.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई वहीं अबू धाबी के शेयर बाज़ार 8.3 प्रतिशत नीचे गिरे.

इन दोनों बाज़ारों में अब तक की ये सबसे ज़्यादा गिरावट है.

इसके पहले संयुक्त अरब अमीरात के केंद्रीय बैंक ने स्थित को संभालने के उद्देश्य से उन बैंकों को पैसे उपलब्ध करवाने का ऐलान किया जिन्हें इसकी ज़रूरत है.

बीबीसी के आर्थिक विश्लेषक ऐंड्रयू वाकर का कहना है कि दुबई वर्ल्ड की समस्याओं की जड़ मकानों की कीमतों में आई उछाल में है.

ज़मीन जायदाद की खरीद बिक्री से जुड़ी दुबई वर्ल्ड की शाखा, नख़ील, ने कई महत्वाकांक्षी रिहाइशी परियोजनाओं में निवेश किया. इसमें खजूर के पेड़ की आकार में बने वो द्वीप भी थे जो दुनिया भर के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं.

दुबई में भी रियल एस्टेट की कीमतो में भारी गिरावट आई है और नख़ील को अपने कर्ज़ चुकाने में मुश्किलें आ रही हैं.

दुबई में उठी इस समस्या से जो अफ़रातफ़री मची उससे चिंताएं इस बात की भी उठीं कि पिछले कुछ महीनों में उभरती अर्थव्यवस्थाओं में जो तेज़ी दिखी थी वो कितनी वास्तविक थी.

लेकिन पिछले हफ़्ते की गिरावट के बाद बाज़ार फिर से संभल गए हैं.

चिंता उन बैंकों को लेकर भी है जिन्होंने दुबई वर्ल्ड को कर्ज़ दिया है और ये काफ़ी हद तक संभव है कि संयुक्त अरब अमीरात और यूरोप के कुछ बैंकों को नुकसान उठाना पड़ेगा.

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