दुबई वर्ल्ड ने बैंकों से चर्चा शुरु की

  • 1 दिसंबर 2009
दुबई
Image caption कुछ पर्यवेक्षकों मानते हैं कि कर्ज़ की पहले बताई जा रही राशि से चिंताएं बढ़ गई थीं

अरबों डॉलर के कर्ज़ के संकट में फँसी निवेश कंपनी दुबई वर्ल्ड ने कहा है कि उसने अपना कर्ज़ नए सिरे दिए जाने की व्यवस्था करने पर बैंकों से बातचीत शुरु की है.

ग़ौरतलब है कि ये घोषणा उस समय हुई है जब दुबई की सरकार ने स्पष्ट तौर पर दुबई वर्ल्ड के कर्ज़ की गारंटी लेने से इनकार कर दिया है.

वित्त मंत्री अब्दुल रहमान अल-सालेह ने कहा, "....कर्ज़ देने वालों को लगता है कि दुबई वर्ल्ड सरकार का हिस्सा है, जो ग़लत है. अब्दुल रहमान अल सालेह ने कहा है कि कंपनी के कर्ज़ों की कुछ ज़िम्मेदारी कर्ज़दाताओं को भी उठानी होगी.

बीबीसी के मध्य पूर्व बिज़नेस रिपोर्टर बेन थाम्पसन का कहना है, "इस बयान से कर्ज़दाताओं को आश्चर्य हुआ है क्योंकि लोगों को ये लगता था कि जो कर्ज़ वे देते हैं, सरकार उसकी गारंटी लेगी. दुबई में व्यवसायिक क्षेत्र और सरकार के बीच का रिश्ता धुंधला सा ही है."

चर्चा 26 अरब के कर्ज़ की

सरकारी निवेश कंपनी दुबई वर्ल्ड ने अपने बैंकों से 26 अरब डॉलर के कर्ज़ की अदायगी के बारे में व्यवस्था पर बातचीत कर रही है.

दुबई वर्ल्ड के कर्ज़ अदायगी से संबंधित संकट के सार्वजनिक होने के बाद भारत समेत दुनिया भर के शेयर बाज़ार गिरे थे.

अनेक भारतीय जो दुबई में दशकों से काम करते रहे हैं, उनकी नौकरियाँ ख़तरे में आ गई हैं क्योंकि निवेश कंपनी दुबई वर्ल्ड कोई एक प्रतिष्ठान नहीं बल्कि पूँजी निवेश के हिसाब से उसका अनेक कंपनियों और प्रतिष्ठानों में दख़ल है.

बीबीसी के आर्थिक मामलों के संवाददाता एंड्रयू वॉकर का कहना है कि जिन कंपनियों के 26 अरब डॉलर की कर्ज़ अदायगी के बारे में बात हो रही है वे हैं - लिमिट्लेस और नाखील. इसमें छह अरब डॉलर के इस्लामी बॉंड भी हैं जिन पर इस्लामी क़ानून के हिसाब से ब्याज नहीं दिया जाता.

कई अन्य कंपनियाँ इस चर्चा के घेरे में नहीं हैं क्योंकि दुबई वर्ल्ड के अनुसार उनकी वित्तीय हालत ठीक है.

कुछ पर्यवेक्षकों का कहना है कि अब जिस राशि की बात हो रही है उससे कई निवेशकों की चिंता घटी है क्योंकि पहले आई रिपोर्टों से ये चिंता थी कि राशि कहीं अधिक है और बहुत अधिक संख्या में निवेशकों पर असर पड़ सकता है.

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