अनिल अंबानी की परियोजना को झटका

अनिल अंबानी
Image caption अनिल अंबानी की ये परियोजना खटाई में पड़ती नज़र आ रही है

उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अनिल अंबानी के रिलायंस एनर्जी समूह की प्रस्तावित दादरी पावर प्रोजेक्ट को जमीन आवंटन का मुलायम सरकार का आदेश रद्द कर दिया है.

कोर्ट के इस निर्णय से अब रिलायंस समूह को किसानों के साथ बातचीत करके नए सिरे से जमीन अधिग्रहण करना पड़ सकता है.

यह भी संभावना है कि रिलायंस समूह हाईकोर्ट के इस फ़ैसले सुप्रीमकोर्ट में चुनौती दे.

तत्कालीन मुलायम सरकार ने 11 फरवरी, 2004 को अनिल अंबानी की रिलायंस एनर्जी कंपनी को ग़ाजियाबाद के दादरी इलाक़े में लगभग ढाई हजार एकड़ जमीन गैस से चलने वाला बिजली कारखाना लगाने के लिए दी थी.

परियोजना पूरी होने पर यहाँ दस हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन होना था.

मुलायमसिंह यादव का कहना था कि इससे उत्तर प्रदेश को दो रुपए प्रति यूनिट की दर से सस्ती बिजली मिलेगी और उत्तर प्रदेश सन 2008 तक बिजली के मामले में आत्म निर्भर हो जाएगा.

लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह के नेतृत्व में किसानों ने जबरन जमीन अधिग्रहण के ख़िलाफ़ आंदोलन चलाया.

मुलायम सिंह यादव पर अनिल अंबानी की कंपनी को ज़रूरत से ज्यादा जमीन देने, पक्षपात और भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए गए.

दूसरी ओर अनिल अंबानी के भाई मुकेश अंबानी की कंपनी ने रिलायंस एनर्जी को गोदावरी बेसिन से सस्ती गैस देने से भी मना कर दिया.

इस तरह जमीन मिल जाने के बावजूद अनिल अंबानी का बिजली परियोजना मूर्त रूप नही ले सकी.

मुलायम के चुनाव हारने और मायावती की सरकार बनाने से भी अनिल अंबानी को झटका लगा.

अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने किसानों के पक्ष में फ़ैसला कर दिया.

कोर्ट ने कहा है कि जमीन अधिग्रहण कानून की धारा चार के मुताबिक़ किसानों को अपनी आपत्ति दर्ज करने का मौक़ा ज़रूर मिलना चाहिए था.

हालाकि परियोजना की अधिकाँश जमीन रिलायंस एनर्जी के पास है और 20 फ़ीसदी से कम किसानों ने ही जमीन अधिग्रहण अदालत में चुनौती दी थी.

लेकिन कोर्ट ने उन किसानों को भी मुआवजा लौटाकर फिर से आपत्ति दाखिल करने का मौक़ा दे दिया है जिनकी जमीन रिलायंस के कब्ज़े में है.

इस तरह अब यह पूरी परियोजना ही खटाई में पड़ गई है.

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