महँगाई में पिसती रही जनता

महँगाई
Image caption लोगों को उम्मीदें नए साल से है

वर्ष 2009 में पूरे साल आम जनता महँगाई के आँकड़ों के बीच पिसती रही.

कुछ महीनों तक तो महँगाई दर शून्य से नीचे रही लेकिन वास्तविकता इसके उलट थी.

कारण, दूध, सब्ज़ी, तेल जैसे ज़रूरी सामानों के दाम आसमान छू रहे थे और साल की विदाई तक इससे निजात मिलने के आसार बेहद कम ही नज़र आ रहे हैं.

पाँच दिसंबर को खत्म हफ्ते में आवश्यक (प्राइमरी) वस्तुओं की महँगाई दर लगभग 15 फ़ीसदी पर पहुंच गई है.

प्याज, आलू और दलहनों की जेब छलनी करने वाली आसमान छूती कीमतों ने आम आदमी को वर्ष 2009 में डराए रखा.

संसद के शीतकालीन सत्र में भी ये मुद्दा उठा लेकिन सरकार का कहना है कि महँगाई सीजनल है और कुछ महीनों में ठीक हो जाएगी. वर्ष के दौरान जहाँ आलू की कीमतें दोगुनी बढ़ीं, वहीं दलहन की कीमतें 42 प्रतिशत महँगी हुईं और प्याज 23.4 प्रतिशत महँगा हुआ.

विनिर्मित सामग्रियों में चीनी ने सबसे ज्यादा मुद्रास्फीति को बढ़ाने में योगदान किया.

चीनी इस साल के शुरू में 22 रूपए किलो बिकती थी लेकिन अब इसका दाम लगभग 40 रूपए किलो हो चुका है.

मुद्रास्फ़ीति के मासिक आधार पर आँकड़े जारी करने के अलावा सरकार ने मुद्रास्फीति के लिए आधार वर्ष को 1993-94 की बजाय 2004-05 करने का भी फैसला किया है.

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