आसियान और चीन के बीच खुला व्यापार

  • 31 दिसंबर 2009
आसियान देशों के झंडे (फ़ाइल फ़ोटो)
Image caption मुक्त व्यापार समझौता वर्ष 2002 में हुआ था और इसे धीरे-धीरे लागू किया जाता रहा है.

दक्षिणपूर्वी एशियाई देशों के संगठन आसियान और चीन के बीच हुए खुला व्यापार समझौता पहली शुक्रवार, पहली जनवरी से पूरी तरह से लागू होने जा रहा है.

इस समझौते के शुरु होने से 1.9 अरब लोगों के बीच क़रीब दो सौ अरब डॉलर का व्यापार होने की संभावना देखी जा रही है.

इसके लागू हो जाने के बाद यह दुनिया का तीसरा बड़ा व्यापार क्षेत्र बन जाएगा.

एक ओर चीन इस समझौते से उम्मीद कर रहा है कि उसकी कच्चे माल की दिक़्कतें दूर हो सकेंगीं, जबकि आसियान देशों के सदस्य चीन के विशाल बाज़ार में अपने लिए संभावनाएँ देख रहे हैं.

आसियान बहुत विविधता वाले देशों का समूह है जिसमें एक ओर सिंगापुर जैसा विकसित सदस्य है तो लाओस जैसा, ग़रीब कम्युनिस्ट देश भी है.

लेकिन इस समझौते के बाद आसियान चीन का चौथा बड़ा व्यापार सहयोगी बन जाएगा और संभावना है कि वह चीन के व्यापार का दस प्रतिशत हिस्सा साझा करेगा.

संभावनाएँ

इस समझौते के लागू होने से चीन को उम्मीदें हैं कि उसके प्राकृतिक संसाधनों की कमी पूरी हो सकेगी.

चीन के वाणिज्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी झांग केनिंग ने एक पत्रवार्ता में कहा है कि समझौते से चीन के निर्माण उद्योग को काफ़ी सहायता मिलेगी.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार झांग केनिंग ने कहा, "चीन और आसियान देशों के कई ऐसे उत्पाद हैं जो एक दूसरे के लिए उपयोगी हैं."

उनका कहना था, "मुक्त व्यापार क्षेत्र स्थापित होने से आसियान देशों से आयात बढ़ाकर हम व्यापार की अपनी पूरी प्रक्रिया में सुधार की संभावना देखते हैं."

उन्होंने बताया कि चीन दक्षिण कोरिया के साथ भी मुक्त व्यापार समझौते की संभावनाओं पर विचार कर रहा है, हालांकि अभी अंतिम दौर की चर्चा शुरु नहीं हुई है.

आसियान देशों के सदस्यों को चीन की सस्ती उपभोक्ता वस्तुओं और कार के सस्ते कलपुर्जों से प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा.

वियतनाम, थाईलैंड और कंबोडिया जैसे देशों में टेक्सटाइल, फुटवियर और इस्पात उद्योग को भी चीन के सस्ते उत्पादों से चुनौती मिलने वाली है.

थाईलैंड को अपनी सस्ती ज्वेलरी और सौंदर्य प्रसाधन के लिए चीन में बड़ा बाज़ार मिल जाएगा तो कुछ देशों को अपने उद्योंगों के लिए चीन से कच्चा माल भी मिल सकेगा.

इतिहास

Image caption चीन के सस्ते सामान से कई देशों को परेशानी भी हो सकती है

चीन और आसियान के बीच मुक्त व्यापार समझौता नवंबर 2002 में हुआ था.

इसके बाद से दोनों पक्ष धीरे-धीरे व्यापार टैक्स दरों में कटौती करते रहे हैं.

समझौते के बाद पहली बार वर्ष 2005 में वस्तुओं और सेवाओं के लिए व्यापार टैक्स की दरें घटाई गईं थीं और उसके बाद 2007 में दूसरे दौर की कटौती हुई. लेकिन निवेश पर समझौता वर्ष 2009 के अगस्त में ही पूरा हुआ.

जैसा कि समझौता हुआ है, इंडोनेशिया, ब्रुनेई, मलेशिया, फ़िलिपीन्स, सिंगापुर और थाईलैंड के लिए चीन के साथ व्यापार टैक्स में 90 प्रतिशत कटौती वर्ष 2010 से ही लागू हो जाएगी.

लेकिन लाओस, वियतनाम, कंबोडिया और बर्मा के लिए यह कटौती वर्ष 2015 से लागू होगी.

टेक्सटाइल और कुछ इलेक्ट्रॉनिक सामानों के व्यापार को संवेदनशील माना गया है और 10 प्रतिशत वस्तुओं पर व्यापार दर में कटौती धीरे-धीरे की जाएगी.

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