आसियान-चीन के बीच मुक्त व्यापार

आसियान देशों के झंडे (फ़ाइल फ़ोटो)
Image caption मुक्त व्यापार समझौता वर्ष 2002 में हुआ था और इसे धीरे-धीरे लागू किया जाता रहा है.

एक जनवरी 2010 से दक्षिणपूर्वी एशियाई देशों के संगठन आसियान और चीन के बीच मुक्त व्यापार समझौता लागू हो गया है. आबादी के हिसाब से यह दुनिया का सबसे बड़ा व्यापार क्षेत्र बन गया है.

जानकारों का मानना है कि दो अन्य मुक्त व्यापार क्षेत्रों - यूरोपीय यूनियन और उत्तर अमरीका व्यापार क्षेत्र को इससे कड़ी टक्कर मिलेगी.

इस व्यापार क्षेत्र में चीन, इंडोनेशिया, मलेशिया, सिंगापोर, थाईलैंड, फ़िलिपींस और ब्रूनेई शामिल हैं और इसका मक़सद आयात किए जाने लगभग 90 प्रतिशत सामान पर लगने वाले कर को ख़त्म करना है.

इसका एक मुख्य उद्देश्य इस क्षेत्र की 1.9 अरब आबादी के बीच क्षेत्री व्यापार को बढ़ाना और एशियाई अर्थव्यवस्था की विकसित देशों पर निर्भरता को घटना है. इस क्षेत्र में करीब दो सौ अरब डॉलर का व्यापार होने की संभावना देखी जा रही है.

कई संभावनाएँ, कुछ आशंकाएँ भी

जहाँ अनेक देश मुक्त व्यापार क्षेत्र की संभावनाओं से फ़ायदा उठाने की सोच रहे हैं वहीं फ़िलिपींस और इंडोनेशिया में इसका विरोध भी हुआ है.

इन देशों में कपड़ा, जूते और स्टील उद्योग के व्यवसाय में जुटे लोगों को डर है कि चीन के सस्ते आयातित उत्पाद से उन्हें नुकसान हो सकता है. वियतनाम, थाईलैंड और कंबोडिया के उद्योगों को भी चुनौती मिलने वाली है.

उधर चीन को उम्मीद है कि इससे उसकी कच्चे माल की दिक़्कतें दूर हो सकेंगीं.

आसियान बहुत विविधता वाले देशों का समूह है जिसमें एक ओर सिंगापुर जैसा विकसित सदस्य हैं तो लाओस जैसा, ग़रीब कम्युनिस्ट देश भी है.

लेकिन इस समझौते के बाद आसियान चीन का चौथा बड़ा व्यापार सहयोगी बन जाएगा और संभावना है कि वह चीन के व्यापार का दस प्रतिशत हिस्सा साझा करेगा.

जानकारों का मानना है कि आसियान देशों के सदस्यों को चीन की सस्ती उपभोक्ता वस्तुओं और कार के सस्ते कलपुर्जों से भी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा.

वियतनाम, थाईलैंड और कंबोडिया के उद्योगों को भी चुनौती मिलने वाली है.

थाईलैंड को अपनी सस्ती ज्वेलरी और सौंदर्य प्रसाधन के लिए चीन में बड़ा बाज़ार मिलेगा तो कुछ देशों को अपने उद्योंगों के लिए चीन से कच्चा माल भी मिल सकेगा.

Image caption चीन के सस्ते सामान से कई देशों को परेशानी भी हो सकती है

इतिहास

चीन और आसियान के बीच मुक्त व्यापार समझौता नवंबर 2002 में हुआ था.

इसके बाद से दोनों पक्ष धीरे-धीरे आयात करों में कटौती करते रहे हैं.

समझौते के बाद पहली बार वर्ष 2005 में वस्तुओं और सेवाओं के लिए व्यापार टैक्स की दरें घटाई गईं थीं और उसके बाद 2007 में दूसरे दौर की कटौती हुई. लेकिन निवेश पर समझौता वर्ष 2009 के अगस्त में ही पूरा हुआ.

जहाँ इंडोनेशिया, ब्रुनेई, मलेशिया, फ़िलिपीन्स, सिंगापुर और थाईलैंड के लिए चीन के साथ 90 फ़ीसदी व्यापार में कर वर्ष 2010 से ही ख़त्म हो जाएगा लेकिन लाओस, वियतनाम, कंबोडिया और बर्मा के लिए यह कटौती वर्ष 2015 से लागू होगी.

टेक्सटाइल और कुछ इलेक्ट्रॉनिक सामानों के व्यापार को संवेदनशील माना गया है और 10 प्रतिशत वस्तुओं पर व्यापार दर में कटौती धीरे-धीरे की जाएगी.

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