गूगल मामले पर तनातनी क़ायम

गूगल
Image caption गूगल मामले पर राष्ट्रपति ओबामा भी बयान दे चुके हैं

चीन ने इससे इनकार किया है कि गूगल पर हुए कथित साइबर हमले में सरकार का कोई हाथ है. साथ ही उसने अमरीका पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप भी लगाया है.

चीन के उद्योग मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ को बताया कि चीन पर साइबर हमले का आरोप 'आधारहीन' है.

कुछ दिन पहले ही अमरीका की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने चीन से कहा था कि वो गूगल के उस दावे की जाँच कराए, जिसमें कहा गया था कि चीन स्थित हैकरों ने उसे निशाना बनाया था.

इंटरनेट सर्च कंपनी गूगल ने चीन से हटने की चेतावनी भी दी है.

चीन के उद्योग और सूचना तकनीक मंत्रालय के एक अनाम प्रवक्ता ने शिन्हुआ को बताया, "प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से चीन पर साइबर हमले का आरोप आधारहीन है. हम कड़ाई से इसका विरोध करते हैं. इंटरनेट सुरक्षा पर चीन की नीति स्पष्ट और पारदर्शी है."

इस बीच चीन के सरकारी समाचार पत्र चाइना डेली ने भी अमरीका के ख़िलाफ़ मोर्चा खोला है. अख़बार का कहना है कि अमरीका अपनी राजनीति, व्यापार के तरीक़े और संस्कृति अन्य देशों पर थोपना चाहता है.

आरोप

अमरीकी सरकार को पाखंडी की संज्ञा देते हुए अख़बार ने लिखा है कि अमरीका की कुछ सरकारी एजेंसियों ने कथित रूप से ग़ैर क़ानूनी रास्ता अपनाते हुए बड़ी संख्या में लोगों के निजी ई-मेल अकाउंट्स की जाँच की है.

गुरुवार को अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने चीन से कहा था कि वो साइबर हमले के आरोपों की जाँच कराए.

इसी महीने गूगल ने आरोप लगाया था कि हैकरों ने उसके सॉफ़्टवेयर कोड और चीन के एक मानवाधिकार कार्यकर्ता के ई-मेल अकाउंट में सेंध लगाने की कोशिश की थी.

गूगल का आरोप था कि ये साइबर हमले चीन से हुए थे. जब वर्ष 2006 में गूगल ने google.cn लाँच किया था, उस समय ये समझौता हुआ था कि वह सर्च के मामले में कुछ सूचनाओं को सेंसर करेगा.

चीन के अधिकारी बार-बार ये कहते रहे हैं कि गूगल और अन्य विदेशी इंटरनेट कंपनियों का चीन में स्वागत है लेकिन उन्हें देश के क़ानून और परंपराओं का पालन करना पड़ेगा.

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