खाद्य पदार्थों के मूल्य बढ़े

सब्ज़ियाँ
Image caption सब्ज़ियों के दामों में भी बढ़ोत्तरी हुई है

16 जनवरी को समाप्त हुए सप्ताह में खाद्य पदार्थों की चीज़ों में महंगाई एक बार फिर बढ़ गई है. खाद्य पदार्थों की क़ीमतों में 0.59 फ़ीसदी बढ़ोत्तरी हुई है और अब महंगाई की दर 17.40 प्रतिशत हो गई है.

इससे पहले तीन सप्ताह से इसमें गिरावट हो रही थी. इससे पहले सप्ताह में महंगाई की दर 16.81 प्रतिशत थी.

इस बीच रिज़र्व बैंक ने संकेत दिए हैं कि वह महंगाई पर क़ाबू पाने के लिए अपनी मौद्रिक नीति में कुछ कड़े क़दम उठा सकता है.

रिज़र्व बैंक शुक्रवार को अपनी तिमाही मौद्रिक नीति समीक्षा पेश करेगा.

महंगाई

गुरुवार को आए आँकड़ों के अनुसार 16 जनवरी को ख़त्म हुए सप्ताह में अंडे व सब्ज़ी के दामों में बढ़ोतरी के कारण खाद्य मुद्रास्फीति की दर में इजाफ़ा हुआ है.

पिछले एक साल में आलू की क़ीमतें 57.56 फीसदी तक बढ़ चुकी हैं, जबकि दालें 46.87 फ़ीसदी महंगी हुई हैं.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान अंडे के दाम 6, सब्जी के 2.1 और मसाले के 2 फीसदी बढ़े.

प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई की दर इस दौरान 14.66 फीसदी रही. प्राथमिक वस्तुओं में खाद्य एवं गैर खाद्य पदार्थ शामिल होते हैं.

16 जनवरी को समाप्त सप्ताह के दौरान ईंधन, ऊर्जा, बिजली और ल्यूब्रिकेंट्स के मूल्यों में गिरावट आई.

मौद्रिक नीति

अपनी मौद्रिक नीति में कुछ कड़े क़दम उठाने के संकेत देते हुए रिज़र्व बैंक ने कहा है कि विकास में बाधा खड़े किए बिना महंगाई पर क़ाबू पाना उसके लिए सबसे बड़ी चुनौती है.

रिज़र्व बैंक ने कहा है, "दिसंबर 2009 में खाद्य पदार्थों के मूल्यों में 21.9 फ़ीसदी की बढ़ोत्तरी ने संकेत दिए हैं कि प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई भी बढ़ सकती है."

उसका आकलन है कि खाद्य पदार्थों में हुई मूल्य वृद्धि का असर ग़ैर खाद्य पदार्थों पर भी पड़ सकता है.

ऐसे समय में आमतौर पर रिज़र्व बैंक बाज़ार में आने वाले नक़द राशि में कटौती करती है.

विशेषज्ञों का अनुमान है कि रिज़र्व बैंक को इसके लिए नकद आरक्षित अनुपात यानी सीआआर बढ़ाना पड़ सकता है.

सीआरआर बैंकों की जमा धन राशि का वह हिस्सा होता है, जिसे उन्हें केंद्रीय बैंक के पास रखना पड़ता है.

केंद्रीय बैंक शुक्रवार को तिमाही मौद्रिक नीति समीक्षा पेश करेगा.

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