और महंगे हो सकते हैं तेल, ईंधन

  • 4 फरवरी 2010

महंगाई के मुद्दे पर विपक्ष और आम लोगों का निशाना बन रही केंद्र सरकार अब तेल और ईंधन के दाम बढ़ाने पर विचार कर सकती है.

किरीट पारिख के नेतृत्व में गठित विशेषज्ञों की एक टीम ने केंद्रीय पैट्रोलियम मंत्रालय को पैट्रोलियम पदार्थों की क़ीमतों में बढ़ोत्तरी करने का सुझाव दिया है.

समिति ने अपनी सिफ़ारिश में कहा है कि घरेलू ईंधन के लिए इस्तेमाल होने वाली एलपीजी गैस का दाम प्रति सिलेंडर 100 रूपए तक बढ़ाया जाना चाहिए.

साथ ही कैरोसिन यानी मिट्टी के तेल का दाम छह रूपए प्रति लीटर बढ़ाने की भी सिफ़ारिश की गई है.

समिति ने सरकार को सुझाया है कि सरकार पैट्रोल और डीजल के मूल्य निर्धारण से अपना नियंत्रण समाप्त करे. यदि ऐसा होता है तो पैट्रोल के दामों में तीन रूपए प्रति लीटर और डीजल के दामों में तीन से चार रूपए प्रति लीटर तक की बढ़त देखने को मिल सकती है.

अपनी रिपोर्ट केंद्रीय पैट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा को सौंपते हुए किरीट पारिख ने कहा है कि पैट्रोलियम पदार्थों के लिए केंद्र सरकार की मौजूदा मूल्य निर्धारण नीति एक टिकाऊ व्यवस्था नहीं है.

उन्होंने सुझाया है कि सरकार को पैट्रोलियम पदार्थों के मूल्य निर्धारण का काम खुद न करके अंतरराष्ट्रीय क़ीमतों के आधार पर होने देना चाहिए. इससे सरकार सब्सिडी के अनावश्यक बोझ से तो बचेगी ही, साथ ही कंपनियों को होने वाले नुकसान को भी कम किया जा सकेगा.

पारिख ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि केंद्र सरकार को चाहिए कि पैट्रोल और डीजल के मूल्य निर्धारण को नियंत्रित करना बंद करे. सरकार को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत दिए जाने वाले कैरोसिन तेल और घरेलू इस्तेमाल वाली एलपीजी गैस पर कुछ हद तक सब्सिडी जारी रखनी चाहिए.

इस रिपोर्ट में की गई सिफ़ारिशों को अगर केंद्र सरकार अमल में लाती है तो महंगाई पर पहले से घिरती आ रही सरकार के लिए और मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं और उसे विरोध का सामना करना पड़ सकता है.

पैट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा ने बताया है कि रिपोर्ट को अगले एक सप्ताह के भीतर केंद्र सरकार या केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष पेश किया जा सकता है.

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